नहर खुदाई शुरू होते ही रातोंरात कृषि भूमि बन गई आवासीय

Aug 06, 2016

नहर खुदाई शुरू होते ही रातोंरात कृषि भूमि बन गई आवासीय

बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

अरपा-भैंसाझार बैराज की नहर का काम शुरू होते ही रास्ते में आने वाली कृषि भूमि का लोगों ने आवासीय में डायवर्सन करा लिया है। अब वे आवासीय के हिसाब से शासन से मुआवजा मांग रहे हैं। सिंचाई और राजस्व अधिकारियों की सांठगांठ से भूमि का मद परिवर्तन करने से शासन को लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। शिकायत मिलने पर चीफ सेक्रेटरी विवेक ढांढ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार गई। साथ ही कलेक्टर को ऐसे मामलों की जांच कर तत्काल सभी का डायवर्सन निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।

कोटा क्षेत्र में निर्माणाधीन अरपा-भैंसाझार बैराज की नहर का निर्माण शुरू हो गया है। इसके साथ सिंचाई विभाग ने कोटा और बिल्हा एसडीएम को नहर के रास्ते में आने वाली जमीन के अधिग्रहण के लिए पत्र जारी कर दिया है। जमीन अधिग्रहण की धारा 11 जारी होने के समय ज्यादातर जमीन कृषि भूमि थी। इसी हिसाब से उसका अधिग्रहण के लिए मुआवजा का प्रकरण तैयार किया गया। अब जब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है तो तखतपुर, बिल्हा, बोदरी, सकरी आदि शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कृषि भूमि को राजस्व अधिकारियों से सांठगांठ कर लोगों ने डायवर्सन करार आवासीय मद में परिवर्तन करा लिया है। जबकि जमीन पर ना घर है और ना ही किसी तरह का निर्माण। इस तरह मद परिवर्तन होने से शासन को लोगों को मुआवजा कृषि के बजाय आवासीय दर से देना पड़ रहा है। यह कृषि भूमि की तुलना में डेढ़ गुना अधिक है। इससे अचानक अरपा भैंसाझार बैराज की लागत भी बढ़ गई है। मामले की शिकायत चीफ सेकेट्री विवेक ढांढ से भी हुई थी। उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मानिटरिंग नहीं करने और समय पर राजस्व विभाग के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करने पर कड़ी फटकार लगाई है। इसके अलावा कलेक्टर को उन्होंने ऐसे प्रत्येक मामले की अलग अलग समीक्षा कर सभी डायवर्सन निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। धारा 11 के प्रकाशन के बाद नहर के रास्ते में आने वाली जितनी जमीन का डायवर्सन हुआ है उसे तत्काल निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में लाखों रुपए के भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है।

बैराज निर्माण में जमकर अफरातफरी

अरपा-भैंसाझार बैराज में जमीन अधिग्रहण और नहर बनाने को लेकर जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। सिंचाई विभाग के कोटा डिवीजन से लेकर जिला मुख्यालय में इस प्रोजेक्ट को देखने वाले अधिकारियों ने अपने हिसाब से नहर का रास्ता बदल दिया है। इसका ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध भी शुरू हो गया है। बिल्हा क्षेत्र के ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के इस फर्जीवाड़े के खिलाफ मुख्यमंत्री जनदर्शन तक में शिकायत की है।

मद परिवर्तन में भी सांठगांठ

अरपा-भैंसाझार प्रोजेक्ट के प्लान तैयार करने के दौरान भी जमकर अफरी तफरी की शिकायत हुई थी। नहर के रास्ते की पहले ही अधिकारियों को जानकारी होने के कारण इस दौरान प्रस्तावित नहर के आसपास के जमीनों की जमकर खरीद फरोख्त हुई थी। इसके बाद जब इन जमीनों का आवासीय में मद परिवर्तन हुआ तब भी आपत्ति लगाने के बजाय सिंचाई विभाग के अधिकारी मौन रहे।

सूखा पड़ा तो बेकार है बैराज

सिंचाई विभाग ने कोटा के पास अरपा भैंसाझार बैराज बनाने का काम शुरू किया है। इसमें नदी के पानी को मोड़कर खेतों तक पहुंचाना है। बैराज तब काम करेगा जब अच्छी बारिश के कारण नदी में पानी हो। सूखा पड़ने की दशा में नदी में ही बहाव नहीं हुआ तो इससे सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जा सकेगा। मतलब किसानों को जब पानी की सर्वाधिक जरूरत होगी तब बैराज साथ नहीं देगा। यही कारण है कि सिंचाई विभाग बैराज बनाने के बजाय बांध और एनीकट प्रमुखता से बनवाता है। वर्तमान में केवल कोटा में ही बैराज बनाने का काम किया जा रहा है। वह भी बरसाती नदी अरपा में। इससे भी प्रोजेक्ट को लेकर जानकार बहुत आशान्वित नहीं है।

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