सोनू को जंगल में छोड़ने प्लान प्रस्तुत करने का आदेश

Jun 21, 2016

सोनू को जंगल में छोड़ने प्लान प्रस्तुत करने का आदेश

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने अचानकमार में बांधकर रखे उत्पाती हाथी सोनू को जंगल में छोड़ने को लेकर शासन को प्लान तैयार कर 3 सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। शासन को एनिमल वेलफेयर बोर्ड की जांच रिपोर्ट व एडवाइजरी को ध्यान में रखते हुए प्लान तैयार करना है।

अचानकमार क्षेत्र में दल से अलग हुए हाथी ग्रामीण क्षेत्र में लगातार उत्पात मचा रहा था। जनधन को लगातार नुकसान पहुंचाने पर प्रशासन ने हाथी को ट्रैंक्यूलाइजर से बेहोश कर बांधने का निर्देश दिया। इसके बाद वन विभाग ने दिसंबर में हाथी को बेहोश किया और उसे बांध कर रखा। जंजीर व रस्सी से बांधने से उसके पैर में घाव हो गया। इसके साथ ही वह कमजोर होने लगा था। इस मामले को लेकर रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की।

याचिका में कहा गया कि जंगली हाथी को बांधकर प्रताड़ित कर पालतू बनाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने वन विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड से जांच कराने व सलाह के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। एनिमल वेलफेयर बोर्ड ने हाथी को बांधकर रखे जाने के बावजूद उसके जंगली होने की प्रवृति में कोई परिवर्तन नहीं आने पर जंगल में छोड़ने की रिपोर्ट पेश की।

याचिका पर चीफ जस्टिस दीपक गुप्ता व जस्टिस संजय के. अग्रवाल की युगलपीठ में सुनवाई हुई। न्यायालय ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक- वन्य प्राणी छत्तीसगढ़ को बांधकर रखे गए हाथी के पुनर्वास व जंगल में छोड़ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड की जांच रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए प्लान तैयार कर 3 सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। याचिका में 7 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।

क्या है रिपोर्ट में

मेंरु एनिमल वेलफेयर बोर्ड के अधिकारियों ने 2 जून 2016 को सोनू का स्वास्थ्य निरीक्षण किया। कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में सोनू हाथी को रेडियो कॉलर लगाकर तत्काल निर्धारित प्राकृतिक रहवास में स्थानांतरित करने और इसके लिए उसे ज्यादा से ज्यादा हरा चारा देने व कंसंट्रेट खाना कम कर बांधने की जगह को दो से तीन बार बदलने को कहा गया है।

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