पांच इवेंट में पदक लेने वाला देश का पहला तैराक बना शिवाक्ष

Jul 11, 2016

पांच इवेंट में पदक लेने वाला देश का पहला तैराक बना शिवाक्ष

बिलासपुर(निप्र)। बैंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय जूनियर तैराकी प्रतियोगिता के पांच इवेंट में पदक जीतकर 16 साल का शिवाक्ष देश का पहला तैराक बनने का गौरव हासिल किया है। इससे पहले यह उपलब्धि किसी को नहीं मिली है।

देवनंदननगर निवासी शिवाक्ष साहू ने जूनियर वर्ग में अपने खेल कौशल से सभी को आश्यर्चचकित कर दिया है। वह बैंगलुरु में चल रही सत्र 2015-2016 की राष्ट्रीय जूनियर प्रतियोगिता बटरफ्लाई, फ्री स्टाइल, इंडिविजुवल मिडले के 100 और 200 मीटर में एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक प्राप्त करने में सफलता पाई है। साथ ही उसे देश का पहला तैराक बनने का गौरव भी मिला। शिवाक्ष के पिता रमेश साहू शिक्षक और माता किरण गृहिणी हैं। शिवाक्ष के बड़े भाई भी राष्ट्रीय तैराक हैं। उन्हीं से प्रेरित होकर तैराक बनने की प्रेरणा मिली। वह 2006 से मात्र 6 वर्ष की उम्र से तैराकी सीखना शुरू किया। वह 2013 से राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिता में हिस्सा लेना प्रारंभ किया।

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0 पदकों की है लंबी सूची

शिवाक्ष को 40 वीं राष्ट्रीय जूनियर प्रतियोगिता में 200 मीटर व 100 मीटर बटर फ्लाई में रजत पदक मिला। 43वीं राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 200 मीटर बटर फ्लाई में रजत और 100मीटर इंडिविजुअल मिडले में कांस्य पदक मिला। राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता में 200मीटर बटर फ्लाई में कांस्य, 200मीटर और 100मीटर इंडिविजुअल मिडले में कांस्य पदक मिला। इसी कड़ी में 43वीं राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 200मीटर बटर फ्लाई में स्वर्ण, 200मीटर फ्री स्टाइल में रजत, 200मीटर व 400मीटर इंडिविजुअल मिडले में रजत और 100मीटर बटर फ्लाइ में कांस्य पदक हासिल किया है।

0 बैंग्लुरू में ले रहा प्रशिक्षण

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शिवाक्ष के पिता ने बताया कि शुरुआती प्रशिक्षण संजय तरण पुष्कर में हुआ। खेल की लगन को देखते हुए उसे 2015 से बैंगलुरु की डॉल्फिन स्वीमिंग अकादमी में द्रोणाचार्य अवार्डी निहार आमीन और राष्ट्रीय तैराकी कोच मधु कुमार के सानिध्य में प्रशिक्षण दिलवा रहे हैं। वह वहां अपनी मां के साथ रहते हुए एशियन और आलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना लिए प्रशिक्षण ले रहा है।

0 पढ़ाई के लिए आता है समय-समय पर

शिवाक्ष केपीएस में 12 वीं काछात्रा है लेकिन बैंगलुरु में रहने की वजह से स्कूल से मिले टिप्स से अपनी पढ़ाई पूरी करता है। पिता ने बताया कि पढ़ाई के लिए समय-समय पर आता है और स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई पूरा करता है।

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