सियासत तेज,कॉलेजों में दिखेगी जोगी पार्टी की धमक

Aug 03, 2016

सियासत तेज,कॉलेजों में दिखेगी जोगी पार्टी की धमक

बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

छात्रसंघ चुनाव 2016 का काउंटडाउन शुरू हो गया है। कैंपस से लेकर राजनैतिक गलियारों में सियासत तेज है। पहली बार कॉलेजों में छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस(जोगी) पार्टी की धमक नजर आएगी। संभाग के सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में छात्र नेता अभी से सक्रिय हो गए हैं। हालांकि जोगी पार्टी ने छात्र संगठन नहीं बनाया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ जनता युवा कांग्रेस के पदाधिकारी चुनाव की रणनीति बनाएंगे। उनका प्रयास निर्दलियों को सपोर्ट कर जितवाने का होगा। छात्रसंघ चुनाव में छात्र सुरक्षा मंच, विद्यार्थी मोर्चा, आम आदमी पार्टी और शिवसेना भी मैदान में उतरने को तैयार हैं।

बिलासपुर विश्वविद्यालय के साथ संबद्ध कॉलेजों में इस पर छात्रसंघ चुनाव बेहद रोचक होने वाला है। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस(जोगी) पार्टी पहली बार एबीवीपी और एनएसयूआई का समीकरण बिगाड़ने मैदान में अप्रत्यक्ष रूप से उम्मीदवार उतारेगी। पिछली बार भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन(एनएसयूआई) अधिकांश कॉलेजों में उम्मीदवार ही नहीं उतार पाई थी। इस बार जोगी पार्टी के आने से सियायत और तेज हो गया है। दोनों प्रमुख छात्र संगठनों का रास्ता आसान नहीं होगा। बीयू से संबद्ध संभाग के सभी 168 कॉलेजों में जोगी पार्टी के पदाधिकारी अभी से सेंधमारी में जुट गए हैं। पार्टी ने प्रत्यक्ष रूप से छात्र संगठन का अभी ऐलान नहीं किया है। फिर भी स्पष्ट है कि निर्दलियों पर पूरा फोकस रहेगा।

एबीवीपी-एनएसयूआई बेहाल

छात्रसंघ चुनाव को अब केवल 20 दिन बचे हैं। शहर के प्रमुख कॉलेजों में एबीवीपी और एनएसयूआई का बुरा हाल है। सीएमडी कॉलेज को छोड़ दें तो कहीं पर भी कार्यकर्ता सक्रिय नहीं दिख रहे। पिछली बार 124 कॉलेजों में मतदान हुआ था। इसमें से 36 कॉलेजों में र्निविरोध चुनाव हुए। जबकि अन्य में छात्रों ने अपने मत का उपयोग किया। शहर के बिलासा कन्या में निर्विरोध चुनाव हुआ तो एसबीटी व डीएलएस में विवाद के कारण उम्मीदवार ही नहीं उतरे।

पिछली बार यहां हुआ चुनाव

जिला कॉलेज

बिलासपुर 38

मुंगेली 10

जांजगीर 30

कोरबा 17

रायगढ़ 29

कुल 124

सोशल मीडिया में प्रचार शुरू

छात्र राजनीति चरम पर है। लगातार तीसरे साल कॉलेजों में चुनाव को लेकर सरगर्मी देखने को मिल रही है। कैंपस में भले ही छात्र संगठन के बड़े पदाधिकारी नदारद हो, लेकिन सोशल मीडिया में उम्मीदवारी शुरू हो गई है। फेसबुक, वाट्स एप और ट्विटर के जरिए हेल्प डेस्क बनाया गया है। इसमें छात्रों को सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उनसे विचार भी मांगे जा रहे हैं।

शहर के प्रमुख कॉलेजों में राजनीति

00 सीएमडी महाविद्यालय

सीएमडी महाविद्यालय शुरू से छात्र राजनीति का यह प्रमुख केंद्र है। पिछले साल एबीवीपी के दीपक अग्रवाल ने एनएसयूआई के रंजीत सिंह को 33 वोट से हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा किया था। इस बार स्थिति उलट है। एबीवीपी ने सालभर सक्रिय रहने वाले दीपक को निष्कासित कर दिया है। इससे माहौल बिगड़ गया है। यहां एनएसयूआई में गुटबाजी हावी है। इस वजह से अमितेश राय कभी भी अपने उम्मीदवारों को जीत नहीं दिला सके। इस बार जोगी पार्टी यहां सक्रिय है।

00 डीपी विप्र कॉलेज

डीपी विप्र कॉलेज में आशीर्वाद पैनल काफी सालों से कब्जा जमाते आ रहा है। इस पैनल को एनएसयूआई से जोड़कर देखा जाता था। हालांकि पिछले दो साल से यह पैनल स्वंतत्र होने का दावा कर रहा है। पिछले साल आशीर्वाद पैनल के यूपेश कुमार ने एबीवीपी के शत्रुघन पटले को 13 सौ वोटों से हराया था। इस साल भी यहां एबीवीपी गायब है। ऐसे में जोगी पार्टी यहां पहले से सक्रिय हैं। इस बार कार्यकर्ता बड़ी जीत के साथ नया आयाम रचना चाहते हैं।

00 जेपी वर्मा कॉलेज

शासकीय जेपी वर्मा कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय जरहाभाठा में पिछले साल एबीवीपी की गौरी गुप्ता ने स्वतंत्र पैनल के सत्यम दुबे को लगभग डेढ़ सौ वोटों से हराया था। इसमें काफी विवाद भी हुआ था। एबीवीपी के ही सागर बंजारे और शैलेंद्र यादव के दो गुट बंट गए थे। इस बार भी एनएसयूआई का नामोनिशान नहीं है। ऐसी स्थिति में इस बार एबीवीपी और जोगी गुट का सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। हालांकि एबीवीपी के उम्मीदवार अभी तय नहीं हैं।

00 केआर लॉ कॉलेज

कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय में पिछले साल एबीपीवी को तगड़ा झटका लगा था। एनएसयूआई की शबिना खान ने एबीवीपी के पुष्पलता खलको को 08 मतों से हराया था। इसके पहले यहां एबीवीपी का कब्जा था। इस बार नए समीकरण बनने से दोनों संगठनों से कोई उम्मीदवार नजर नहीं आ रहा है। एनएसयूआई के अधिकांश कार्यकर्ता और छात्र जोगी पार्टी में सक्रिय हैं। साफ है कि यहां भी इस साल चुनाव बेहद दिलचस्प होगा।

00 साइंस कॉलेज

शासकीय ई-राघवेंद्र राव विज्ञान महाविद्यालय में एबीवीपी और एनएसयूआई पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। पिछले साल आर्या स्वतंत्र पैनल के मनोज कुर्रे ने लक्ष्य पैनल के सागर गुप्ता को डेढ़ सौ वोट से हराया था। आर्या पैनल को एबीवीपी का समर्थन होने की बात ही कही जा रही है। पैनल के पदाधिकारी इसे नाकार रहे हैं। इस बार यहां रोचक मुकाबला संभव है। जोगी पार्टी ने यहां भी छात्रों के बीच पैठ जमा ली है।

क्या कहते हैं पदाधिकारी

जोगी पार्टी का प्रभाव कॉलेजों में कुछ भी नहीं है। एनएसयूआई पूरी ताकत से सभी कॉलेजों में उम्मीदवार उतारेगी। पिछली बार हमारी स्थिति काफी अच्छी थी। बिलासपुर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए थे। इस बार और बेहतर होगा।

तमीत छाबड़ा

जिलाध्यक्ष, एनएसयूआई

एबीवीपी हमेशा की तरह पूरे जोश और होश से चुनाव मैदान में उतरेगी। सारी तैयारी कर ली गई है। कहीं कोई कमी नहीं है। जहां दिक्कत थी उसे दूर कर लिया गया है। संगठन से दिशा निर्देश मिलने के बाद ही उम्मीदवारों को लेकर प्रक्रिया शुरू करेंगे। जोगी पार्टी एनएसयूआई का नुकसान करेगी। इससे हमें फायदा ही होगा।

निलय तिवारी

प्रमुख सदस्य,एबीवीपी

जोगी पार्टी ने अभी तक छात्र संगठन नहीं बनाया है। समर्थक छात्रों और कार्यकर्ताओं सक्रिय रहने के लिए कहा गया है। उन्हें निर्दलीय के तौर पर उतारकर समर्थन करेंगे।

जितेंद्र सिंह

संस्थापक सदस्य, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी)

जोगी पार्टी ने अभी तक छात्र संगठन नहीं बनाया है। समर्थक छात्रों और कार्यकर्ताओं सक्रिय रहने के लिए कहा गया है। उन्हें निर्दलीय के तौर पर उतारकर समर्थन करेंगे।

जितेंद्र सिंह

संस्थापक सदस्य, छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी)

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