सहकर्मी की पत्नी से अवैध संबंध, निगम कर्मचारी को 3 वर्ष की कैद

Jul 14, 2016

सहकर्मी की पत्नी से अवैध संबंध, निगम कर्मचारी को 3 वर्ष की कैद

बिलासपुर। सहकर्मी की पत्नी से अवैध संबंध रखने और उसे अपने साथ ले जाने के आरोपी नगर निगम के कर्मचारी को न्यायालय ने 3 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनवाई है। साथ ही 1000 रुपए अर्थदंड लगाया है। जुर्माना नहीं पटाने पर अभियुक्त को दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

दीनदयाल कॉलोनी मंगला निवासी नगर निगम के कर्मचारी की 6 जून 1990 में सरकंडा थाना क्षेत्र में रहने वाली युवती से शादी हुई। नवविवाहिता पति के साथ एक माह रहने के बाद मायके चली गई। कुछ साल बाद उसके मायके वालों ने समझाकर पति के पास भेज दिया। इसके बाद भी वह पति से विवाद व झगड़ा करती रही।

कोरबा में पदस्थापना के दौरान पत्नी ने पति के खिलाफ धारा 498 के तहत झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के बाद परिवार परामर्श केंद्र में सुलह कराया गया। बिलासपुर तबादला होने पर पति-पत्नी कुदुदंड में किराए के मकान में रहने लगे। 1999-2000 में एक पुत्र का जन्म हुआ। इस बीच नगर निगम बिलासपुर में पति के साथ काम करने वाले सहायक ग्रेड 3 राकेश वर्मा पिता किशोर वर्मा ने उसकी पत्नी से अवैध संबंध बना लिया। 14 सितंबर 2009 को पति ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया।

पत्नी ने पति के साथ रहने से इनकार कर दिया और आरोपी राकेश वर्मा के साथ चली गई। दोनों एक साथ रहने लगे। पति को छोड़कर जाने के बाद महिला ने अपने भाई के माध्यम से एक अनुबंध पत्र निष्पादन कर उसे भिजवाया। इसके बाद उसे धमकी दी जाने लगी। पति ने मामले की सिविल लाइन थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर पारिवारिक जीवन में जहर घोलने वाले को सजा दिलाने न्यायालय में धारा 497 के तहत परिवाद पेश किया।

परिवाद पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी एके रात्रे की अदालत में सुनवाई हुई। न्यायालय ने मामले में पाया कि आरोपी नगर निगम कर्मचारी राकेश वर्मा के इस कृत्य से परिवादी का सम्मान धूमिल हुआ है। इसके अलावा परिवादी एक सज्जन व्यक्ति है। आरोपी के इस कृत्य से उसका पारिवारिक जीवन खराब हुआ है। न्यायालय ने आरोपी को धारा 497 में 3 वर्ष की कठोर कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर अभियुक्त को 2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी

आरोपी को सजा दिलाने पीड़ित पति को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उसने अक्टूबर 2010 में सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पाया कि मामले में अपराध हुआ है।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत को परिवाद पर सुनवाई कर निर्णय करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने परिवाद पर सुनवाई की। 6 वर्ष की लंबी लड़ाई के बाद पति को न्याय मिला है।

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