मेंटेनेंस में चूक से बेपटरी हुई बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस

Aug 08, 2016

मेंटेनेंस में चूक से बेपटरी हुई बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस

बिलासपुर। बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की मुख्य वजह कोच के मेंटेनेंस में चूक को बताया जा रहा है। जांच के शुरुआती तथ्यों में कुछ इसी तरह की बात सामने आ रही है। एक तरफ का बोल्ट निकलने से ड्राबार की पकड़ कमजोर हो गई थी। इससे न केवल स्क्रू कपलिंग प्रभावित हुई बल्कि एसएलआर की तरफ का बफर इंजन के बफर से अलग अंदर की तरफ घुस गया। इसकेचलते ही इंजन व एसएलआर के सारे पहिए पटरी से नीचे उतर गए। हालांकि पूरी जांच के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा।

27 जुलाई को बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के इंजन व एसएलआर पटरी से उतर गए थे। यह घटना उस समय हुई जब ट्रेन कुम्हारी स्टेशन के पास अप से मिडिल लाइन में जा रही थी। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। घटना के बाद इंजीनियरिंग विभाग के दो स्टॉफ सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेल पथ पश्चिम ) पंकज कुमार व सहायक मंडल अभियंता निलेश कुमार (भिलाई-1) पर दोष मढ़ते हुए निलंबन की कार्रवाई कर दी गई।

घटना के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसे मैकेनिकल विभाग द्वारा दबाने की कोशिश की जा रही है। उससे घटना की वजह दूसरी ओर इशारा कर रहा है। सीधे तौर पर कहा जाए तो मेंटेनेंस में हुई चूक के कारण यह दुर्घटना हुई है। दरअसल इंजन व एसएलआर के बीच जो ड्राबार लगा था उसमें से एक ड्राबार के एक तरफ का बोल्ट निकल गया था जो स्पष्ट नजर भी आ रहा है। एक तरफ का बोल्ट निकलने से ड्राबार लटकने लगा। इससे स्क्रू कपलिंग सेंटर से हट गई और दोनों कोच के बीच का दोनों बफर एक दूसरे से अलग हो गए। एक बफर अंदर की तरफ घुस गया। बफर एक दूसरे से अलग होने के कारण ही ट्रेन बेपटरी हो गई और पटरी से उतरकर स्लीपर पर दौड़ने लगी।

जांच में लीपापोती

टीम ने जांच रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। इसमें मैकेनिकल विभाग की लापरवाही दबाते हुए इंजीनियर विभाग को दोषी ठहराया जा रहा है। घटना की वजह टंगरेल डैमेज को बताया जा सकता है। हालांकि ऐसा हुआ तो टीम खुद जांच के दायरे में आ जाएगी। क्योंकि डैमेज टंगरेल को बदलने के लिए घटना के सात दिन बाद 2 अगस्त को दोपहर एक बजे से दोपहर 3.10 बजे तक ब्लॉक लिया गया था। यदि टंगरेल डैमेज थी तो उसे तत्काल क्यों नहीं बदला गया। जानकार बताते हैं कि ऐसा करना जांच टीम की मजबूरी है। क्योंकि मैकेनिकल विभाग की लापरवाही उजागर हुई तो ट्रेनों के परिचालन में बड़ी दिक्कत आ सकती है।

क्या है ड्राबार

ड्राबर एक तरह की लोहे की पट्टी है जो प्रत्येक कोच के बीच में जहां कपलिंग की जाती है वहां लगता है। इसके कारण ही स्क्रू कपलिंग सेंटर में रहता है। साथ ही बफर में एक- दूसरे चिपके रहते हैं। इसके अलावा स्कू्र कपलिंग को एक बराबर ऊंचाई में रखने के लिए पेंडिंग प्लेट द्वारा व्यवस्था की जाती है। भले ही यह कम लंबाई की एक लोहे की पट्टी हो लेकिन इसके कारण ही टर्निंग वाली लाइन पर ट्रेन आसानी मुड़ जाती है।

घटना के बाद ड्राबार से छेड़छाड़

जानकारी के मुताबिक घटना के बाद ड्राबार लटक रहा था। लेकिन बाद में जब जानकार जांच करने के लिए पहुंचे तो ड्राबार गायब था। पूछताछ करने पर यह बात सामने आई कि मैकेनिकल विभाग के कर्मचारियों ने उसे काटकर अलग करते हुए फेंक दिया। जबकि रेलवे की दुर्घटना नियमावली 6.1.02 (9) यह कहती है कि जब तक जांच शुरू नहीं हो जाती या अधिकारी निर्देशित नहीं करते किसी पार्ट्स से छेड़छाड़ नहीं करनी है।

पूछताछ के बाद कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। बाद में ड्राबार को लाया गया। कर्मचारियों ने यह बात भी स्वीकार किया कि रेस्टोरेशन के लिए ड्राबार को काटा गया था। लेकिन यह बता नहीं पाए कि इसके लिए किसकी अनुमति ली गई थी।

रेल प्रशासन इस घटना को गंभीरता से ले रहा है। जांच के लिए टीम भी बनाई गई है। एक- दो दिन में जांच रिपोर्ट जोन कार्यालय को सौंप दी जाएगी। रिपोर्ट में जो दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ड्राबार से छेड़छाड़ के मामले में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। हिमांशु जैन, सीपीआरओ, दपूमरे

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