बेलगहना में तस्कारों ने काट डाले हरे- भरे पेड़

Jun 26, 2016

बेलगहना में तस्कारों ने काट डाले हरे- भरे पेड़

बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

जंगल में हरे- भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जारी है। बेलगहना रेंज के भेलवा टिकरी में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां साल, साजा व बीजा के 60-70 पेड़ों के ठूंठ ही बच गए हैं। वहीं वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है।

पौधे लगाना फिर उसे पेड़ बनाने के अलावा उसकी हिफाजत करना वन विभाग की जिम्मेदारी है। विभाग पौधे लगाने में ही विशेष दिलचस्पी लेता है। जाहिर है कि इसके लिए हर साल शासन लाखों रुपए स्वीकृत होता है। जब बात हिफाजत की आती है तो विभाग इसमें नाकाम साबित होता है। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। बेलगहना से खोंगसरा जाने वाले मार्ग के दोनों ओर जंगल है। यहां साल, साजा व बीजा के हरे- भरे पेड़ हैं। भेलवा टिकरी बीट के 1050 कक्ष क्रमांक में बड़ी संख्या में ठूंठ इसका प्रमाण है। ठूंठ लगभग 60 से 70 की संख्या में हैं। जिन्हें मार्ग से ही देखा जा सकता है। इस पर रेंज के किसी भी अधिकारी या बीट के कर्मचारियों की नजर इस पर अब तक नहीं पड़ी।

10 से 15 दिन के ठूंठ

इस क्षेत्र में अवैध कटाई को तस्कर 10-15 दिनों से लगातार अंजाम दे रहे हैं। इसका अंदाजा ठूंठों को देखकर लगाया जा सकता है। सभी ठूंठ ताजे हैं।

सागौन के 15 से अधिक ठूंठ

बेलगहना रेंज में 1050 कक्ष क्रमांक के अलावा सामने रोड के दूसरे किनारे पर सागौन की भी अवैध कटाई हुई है। जानकारी के मुताबिक यह नारंगी खंड है। ठूंठ का आकार देखने से यह स्पष्ट होता है कि पेड़ 20 साल पुराने हैं। लगभग 10 से 15 ठूंठ की पुष्टि भी हो रही है।

सूचना के बाद विभाग में मची खलबली

इस अवैध कटाई का मामला शनिवार को सीसीएफ बी आनंद बाबू के पास पहुंचा। इसके बाद उन्होंने आनन-फानन में उड़नदस्ता को जांच करने के निर्देश दिए। इससे बेलगहना रेंज में खलबली मच गई है। जानकारी के मुताबिक उड़नदस्ता स्टॉफ के वहां पहुंचने के बाद रेंज के अधिकारी व कर्मचारी सकते में आ गए। मामले की जांच चल रही है। लिहाजा विभागीय स्तर पर ठूंठ की संख्या और इस घटना के लिए कौन दोषी हैं इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

शनिवार को बेलगहना रेंज में अवैध कटाई की शिकायत मिली है। इसकी जांच के लिए उड़नदस्ता को भेजा गया है। साथ ही बेलगहना रेंजर को जांच करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सही पुष्टि होगी।

डीएन त्रिपाठी

एसडीओ, कोटा बिलासपुर वनमंडल

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