शहर में एक भी सड़क नहीं जिस पर करें भरोसा

Jun 12, 2016

शहर में एक भी सड़क नहीं जिस पर करें भरोसा

बिलासपुर। नईदुनिया न्यूज

शहर की सड़कों का केवल सीवरेज ही दुश्मन नहीं है। इसके अलावा भी दूसरी सरकारी और निजी एजेंसियां भी बिना किसी सूचना सड़कों की खुदाई करने में लगी हैं। इसके चलते एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जिस पर ट्रैफिक बिना किसी रुकावट के चल सके। कहीं जमीन धंसी हुई है तो कहीं किसी कारण से सड़कों को बीचों बीच काट दिया गया है। जहां सब कुछ ठीक है वहां दर्जनों स्पीड ब्रेकर बनाकर सड़क को चलने लायक नहीं छोड़ा है।

करोड़ों फूंकने के बाद भी एक भी सड़क ऐसी नहीं है,जिसे दावे के साथ कहा जा सके कि इसमें कोई खराबी नहीं है जो सड़क नई बनी है उसमें भी गड्ढे या जमीन धंसने की शिकायत आ गई है। इसके चलते गाड़ियां चलते-चलते अचानक ही गड्ढे या जमीन कटी होने के कारण रुक जाती है। नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल के शहर में सड़कों की हालत सबसे खराब है। इसके पीछे मुख्य कारण विभिन्न सरकारी और निजी ठेकेदारों में समन्वय और काम में गुणवत्ता का अभाव माना जा रहा है। एक सरकारी विभाग सड़क निर्माण करता है तो दूसरा उसे तुरंत ही खोदने के लिए तैयार बैठा रहता है। इन सब से अगर कुछ बच जाए तो बाकी कसर टेलीफोन केबल डालने वाले निकाल देते हैं। सड़कों का सबसे बड़ा दुश्मन सीवरेज को माना जा रहा है। उनका काम जहां चलता है, वहां सड़क की दुर्गती तो होती ही है जहां पहले काम चुके हैं वहां भी सड़क धंसने के कारण समस्या खड़ी हो रही है। इसे ठीक करने के बजाय केवल मरम्मत करने से सड़क असमतल हो जाती है। इसके अलावा सड़कों को लेकर होनी वाली समस्या के पीछे धूल को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। पिछले साल से एक तरफ की नाली से दूसरे तरफ तक सीधी चौड़ी सड़क निर्माण करने की बात अधिकारी करते रहे हैं, लेकिन कहीं भी काम शुरू नहीं कराया गया है। इसके चलते जैसे ही गाड़ियां डामर रोड से नीचे मिट्टी वाली जगह पर उतरती है धूल उड़ने लगती है।

असमतल हो गई सड़क (लिंक रोड)

शहर की जीवनरेखा समझी जाने वाली लिंक रोड को चौड़ी करने और बिना अवरोध यातायात के लिए प्रशासन ने यहां 72 पेड़ों की बलि दे दी है। इसके बाद भी हालत नहीं सुधरी। राजेंद्र नगर चौक से आगे बढ़ते ही इस सड़क पर गड्ढे दिखने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद वीआईपी बंगलों के सामने लगाई गई प्लास्टिक का स्पीड ब्रेकर कई जगह से टूटकर उखड़ गया है, लेकिन उसने अपनी निशानी छोड़ रखी है। सड़क पर इस टूटे स्पीड ब्रेकर के कारण गड्ढे हो गए हैं। इससे आगे बढ़ने पर दूर से पुलिस लाइन के सामने चिकनी सड़क दिखती है, लेकिन यह एक धोखा है। पुलिस मैदान के ठीक सामने सीवरेज के कारण सड़क धंसी हुई है। इसका एहसास उस पर गाड़ी चलते ही हो जाता है। इससे आगे सिविल लाइन थाने के सामने गड्ढों को पार करके जैसे ही बिग बाजार के सामने पहुंचेंगे तो वहां एक तरफ की सड़क ऊंची तो दूसरे तरफ की नीची हो गई है। अग्रसेन चौक के पास ही गेट लगाने के लिए बनाया गया कांक्रीट का स्टेड भी यातायात को बाधित करता है। यहां से आगे बढ़ने पर श्रीकांत वर्मा मार्ग चौक में सड़क के बीचों बीच काटकर नाला बनाया गया है। यहां काम तो पूरा हो गया है, लेकिन यहां बीचों बीच सड़क असमतल हो गई है। शहर में यही वह सड़क है जि जिस पर सर्वाधिक प्रयोग हुआ है।

गड्ढा और चेंबर से परेशान

रविंद्रनाथ टैगोर चौक से लेकर अग्रसेन चौक तक की सड़क को देखें तो सबसे पहले होटल रीगल के सामने ही सड़क पर गड्ढा हो गया है। सालों से इस सड़क की ऐसी ही स्थिति है। यहां से आगे बढ़ने पर जैसे ही पुराना बसस्टैंड चौक पहुंचे तो नई तरह की परेशानी खड़ी हो जाती है। चौक में मंदिर के पास ही सड़क उखड़ी हुई है। इसके अलावा यहां नाला के पास छोड़ा गया चेंबर कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है। यहां से आगे बढ़ें तो ऊंची-नीची सड़क शुरू हो जाती है। नगर निगम ने पुराना बसस्टैंड चौक से लेकर अग्रसेन चौक तक लहरदार सड़क का निर्माण कराया है। गाड़ी यहां हिचकोले खाते हुए अगले चौक तक पहुंचती है। यह सब तब है जब यहां सुबह से लेकर देर रात तक वाहनों की भीड़ लगी रहती है। अग्रसेन चौक के पास खुला हुआ बड़ा नाला भी यहां जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में थोड़ी सी चूक भी खतरे से खाली नहीं है।

शहर की प्रतिष्ठा धूमिल कर रही रायपुर रोड

रायपुर की ओर से शहर आने वाले या दूसरे जिलों से राजधानी जाने वाले इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। यहां भी समस्या है। नेहरू चौक से आगे बढ़ने पर जिस तरफ सीवरेज की खुदाई हुई है वहां जमीन धंस गई है। इसके चलते ट्रैफिक यहां स्मूथ नहीं है। इससे आगे बढ़ने पर हेमू कालानी चौक के पास गड्ढे हो गए हैं। नेशनल हाईवे की इस सड़क पर निगम ने पहले बिना अधिकार के स्पीड ब्रेकर बनाया फिर अपने मन से ही उसे हटाने के नाम पर सड़क को खोद दिया और आगे बढ़ें तो मंदिर चौक में भी स्थिति कम खतरनाक नहीं है। यहां सड़क के बीच में बना चेंबर साल में 8 माह खुला रहता है। निगम उसे ढंक भी दे तो उनकी घटिया गुणवत्ता का ढक्कन भारी वाहनों के सामने ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाते। इसके बाद सीवरेज प्रभावित रोड की बारी आती है। मंदिर चौक से राजीव गांधी चौक तक पूरी सड़क असमतल है। इससे आगे सड़क के लिए जितनी सड़क है उसके आधे में ही डामरीकरण हुआ है। नतीजतन यहां धूल की समस्या है। सबसे व्यस्त महारणा प्रताप चौक में बीच की जगह भी मूर्ति हटाने के बाद असमतल हो गई है।

दो पाटों में है उसलापुर सड़क

नेहरू चौक से उसलापुर तक जाने वाली सड़क का भी हाल बुरा है। नेहरू चौक से आगे बढ़ने पर कलेक्टोरेट के सामने बेरिकेट्स लगाने के लिए सड़क में गड्ढे कर दिए हैं। इससे आगे बढ़े तो जैसे ही सैनिक कल्याण बोर्ड का दफ्तर आता है,सीवरेज का असर यहां दिखना शुरू हो जाता है। यहां करीब 50 मीटर लंबाई में सड़क एक तरफ धंस गई है। प्रमुख रोड होने और यातायात के दबाव को देखते हुए इसका फिलहाल मरम्मत कराई जा रही है। पीडब्ल्यूडी उस पर डामर से पेचवर्क करा रहा है,लेकिन इससे भी सड़क स्मूथ नहीं हो रही है। यहां से आगे मंगला चौक के पास सड़क के किनारे गड्ढा हो गया है। मंगला चौक से उसलापुर तक जिस हिस्से में सीवरेज की खुदाई हुई थी,उसे नगरीय प्रशासन विभाग के चीफ इंजीनियर एसके जैन ने खुद खड़े होकर बनवाई थी। सड़क न धंसे इसके लिए यहां उन्होंने अपने अनुभव और इंजीनियरिंग का पूरा इस्तेमाल किया। उनका अनुभव एक बारिश से पहले तक ही काम आया। जैसे ही बारिश हुई यहां भी सड़क धंसनी शुरू हो गई। अब हाल यह है कि सड़क चलने लायक नहीं रह गई। अंततः पीडब्ल्यूडी यहां भी सीवरेज के गड्ढों को भरने में लगा है। इससे आगे उसलापुर तक पूरी सड़क असमतल और खस्ताहाल है।

यहां भी है परेशानी

तेलीपारा रोडः शहर के इस प्रमुख बाजार वाला पूरा रास्ता ही असमतल है। यहां भी पूरी चौड़ाई में सड़क निर्माण नहीं होने से धूल की समस्या स्थाई हो गई है। आगे बढ़ें तो पीपल पेड़ के पास सड़क को पेयजल की पाइप लाइन डालने के लिए खोदा गया था, लेकिन उसे बनाए बिना ही ठेकेदार भाग गया। नतीजतन यहां का गड्ढा स्थाई समस्या बन गया है।

सदर बाजार, गोल बाजारः शहर में इस बाजार वाले रास्ते की हालत पहले ठीक थी, लेकिन जैसे ही निगम ने यहां विकास कार्य कराने की ठानी इसकी भी दुर्दशा शुरू हो गई। नाली बनाने के नाम पर सड़क को जगह-जगह से खरोच दिया गया है। सड़क पर भवन निर्माण सामग्री का ढेर लगा रहता है। तीन माह में नाली तो नहीं बनी उलटे बनी बनाई सड़क जरूर खराब हो गई।

दयालबंद रोडः सीवरेज की खुदाई इस सड़क पर गांधी चौक से भगत सिंह चौक तक पूरी हो गई है। यहां ठेकेदार ने सड़क असमतल बना दी है। एक तरफ की सड़क ऊंची है दूसरे तरफ की नीची। सड़क चौड़ीकरण का काम भी यहां गुणवत्ताहीन था। इसके चलते उसमें भी कई जगह गड्ढे हो गए हैं।

गांधी चौक से तारबाहरः गांधी चौक से आगे जाने पर चढ़ाई के पास ही सड़क असमतल और उसमें गड्ढे हो गए हैं। यहां सड़क धंसने की शिकायत है। इससे आगे बढ़ने पर डीपी विप्र कॉलेज के सामने सड़क पर गड्ढे हैं। टैगोर चौक और उससे आगे पानी की पाइप लाइन डालने के लिए खोदे गए गड्ढे को वैसे ही छोड़ने से दिक्कत है।

मिशन अस्पताल रोडः इस सड़क की खराब स्थिति को लेकर महापौर किशोर राय ने ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। यहां एक तरफ से सड़क बन गई, लेकिन दूसरी तरफ अब भी सड़क खराब है। यहां सड़क असमतल होने के कारण भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

सामने बारिश का सीजन है। ऐसे में पूरी सड़क बनाने का समय नहीं है। इंजीनियरों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते समस्याग्रस्त सड़कों की पहचान कर लें और जल्द से जल्द से उसे ठीक कराएं ताकी बारिश में लोगों को समस्या न हो। बारिश के बाद सीवरेज के अधिकारियों और सभी विभागों से समन्वय बनाकर शहर की सड़कों को ठीक करने का अभियान चलाया जाएगा।

सौमिल रंजन चौबे

आयुक्त, नगर निगम

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