बिहार में शिक्षा का पोस्टमार्टम, इंटर टॉपर कहती है पॉलिटिकल साइंस का मतलब खाना विज्ञान

Jun 01, 2016

पटना। ई का बेटा, नाम व नंबर तोहरे हा ने। हां, माई, हमरे हा। फिर तोहार मेरिट पर इतना हंगामा काहे। उ कुछ ना माई, 500 के जगह 600 कह देनी हल। तोहरा तो पते बा, मास्टरों साहब के उतना ज्ञान नइखे की हमरा के समझा पाईं। यह व्यंग आज के शिक्षा व्यवस्था पर बहुत बड़ा तमाचा है कि जो टॉप करता है उसे पता नहीं होता कि कुल कितने मार्क्स का इम्तिहान उन्होंने दिया है। कोई पालिटिकल साइंस का मतलब खाना विज्ञान कहता है। लेकिन ऐसी कई खबर सामने आई हैं जिसमें मास्टर साहब का स्तर भी काफी निम्‍न स्‍तर का दिख रहा है। साफ शब्‍दों में कहें तो जहां नींव ही इतनी खोखली हो वहां बुलंद ईमारत की कल्पना कैसे कर सकते है। बिहार में इंटर की परीक्षा की स्टेट टॉपर रूबी कुमारी की मानें तो पॉलिटिकल साइंस में ‘खाना बनाने’ की पढ़ाई होती है। वैसे वे पॉलिटिकल साइंस को ‘प्रॉडिकल साइंस’ कहती हैं। रूबी को कुल 500 अंकों की परीक्षा में 444 अंक मिले हैं। हालांकि, वे कहती हैं कि उन्होंने तो 600 अंक की परीक्षा दी थी। टीवी चैनल पर विषय और उनके बारे में टेलीकास्ट हो रहे उनके इस ‘विशेष ज्ञान’ ने एक बार फिर पूरे देश में बिहार की स्कूली शिक्षा की किरकिरी करा दी है। 

पिछले वर्ष परीक्षा में सामूहिक नकल की तस्वीरें देश-विदेश की मीडिया में छाई रहीं। शिक्षा विभाग ने इस वर्ष नकल रोकने के लिए काफी कड़ाई की थी। अब रिजल्ट में ‘खेल’ की बात सामने आने पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने घोषणा की है कि इंटर के सभी तीनों संकायों के पांच-पांच टॉपर की उत्तर पुस्तिकाओं की फिर जांच होगी।

उनका साक्षात्कार भी लिया जाएगा, ताकि पता चल सके कि वे टॉपर होने के योग्य हैं कि नहीं। वैशाली जिले के निवासी इंटर साइंस टॉपर सौरभ श्रेष्ठ की योग्यता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। उसे इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के बारे में भी पता नहीं है। सौरभ श्रेष्ठ को इंटर साइंस में 500 में से 426 अंक मिले हैं। मजेदार बात यह है कि दोनों टॉपर एक ही ‘विवादित’ कॉलेज के विशुन राय कॉलेज भगवानपुर वैशाली के छात्र हैं। यह कॉलेज पिछले साल भी विवाद में आया था। रिजल्ट में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर तत्कालीन शिक्षा मंत्री पीके शाही ने कॉलेज का रिजल्ट रोक दिया था।

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