विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हंगामे पर नए सदस्यों की चिंता, अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष-विपक्ष की बैठक बुलाई

Jul 27, 2016

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान हंगामे पर नए सदस्यों की चिंता, अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष-विपक्ष की बैठक बुलाई

भोपाल। विधानसभा के सत्रों में प्रश्नकाल सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है कि जिसमें सदस्य अपने-अपने क्षेत्र सहित प्रदेश की समस्याओं को उठाते हैं लेकिन प्रश्नकाल के दौरान होने वाले हंगामे को लेकर विधायक चिंतित हैं। नए सदस्यों ने आज अपनी पीड़ा शून्यकाल में रखी तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की गुरुवार की सुबह बैठक बुलाने का फैसला सुनाया।

विधानसभा में आज मानसून सत्र के प्रश्नकाल में मात्र पांच लिखित सवालों पर ही चर्चा हो सकी जिनमें से कांग्रेस की इमरती देवी की अनुपस्थिति के कारण केवल ममता मीणा, मुरलीधर पाटीदार, ओमकार सिंह मरकाम और कमलेश्वर पटेल के ही सवाल चर्चा में शामिल हो सके। जहां लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के चांचौड़ा विधानसभा क्षेत्र में नलकूप खनन में गड़बड़ी, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था में केंद्र से मिलने वाली राशि और सिंहावल संचालित नलजल योजनाओं में कितनी बंद हैं और क्यों तथा प्रदेश में चिटफंड कंपनियों द्वारा लोगों की राशि लेकर भागने की घटनाओं पर उठाए गए सवालों पर ही सरकार का पक्ष आ सका।

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प्रश्नकाल में 25 लिखित सवाल शामिल थे लेकिन समयाभाव के कारण शेष प्रश्नों पर कोई चर्चा ही नहीं आ सकी। इसको लेकर बीजेपी के गिरीश गौतम, मोहन यादव से लेकर कांग्रेस के गिरीश भंडारी तक ने चिंता जाहिर की। हालांकि भंडारी ने यह भी कहा कि जब मंत्रियों द्वारा गलत जानकारी दी जाती है तो फिर विपक्ष का उठाना भी जरूरी है। वहीं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की एक बैठकर बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा करने का निर्णय किया।

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