दुष्कर्म पीड़िताओं को मेडिकल जांच के लिए 7 घंटे करना पड़ा इंतजार

Aug 01, 2016

दुष्कर्म पीड़िताओं को मेडिकल जांच के लिए 7 घंटे करना पड़ा इंतजार

भोपाल, ब्यूरो। ज्यादती के मामले में पीड़िता को किसी भी अस्पताल में तत्काल प्राथमिक उपचार और जांच कराने की सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता बनी हुई है। ज्यादती की शिकार हुईं दो आदिवासी बहनों को रविवार को मेडिकल जांच के लिए पुलिस के साथ 7 घंटे इंतजार करना पड़ा।

राजधानी के जिला अस्पताल जेपी में उन्हें जांच से मना करते हुए संबंधित थाना क्षेत्र के ही अस्पताल में जाने को कह दिया गया। जब पीड़िताओं को कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, तो वहां भी डॉक्टर घंटों बाद पहुंचीं। मामला कोलार थाना क्षेत्र का है।

2 जुलाई को अपहृत हुईं दो आदिवासी किशोरियों को कोलार पुलिस ने शनिवार रात आरोपियों से छुड़ाकर आरोपियों के खिलाफ अपहरण और ज्यादती का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिसकर्मी रविवार सुबह उन्हें मेडिकल जांच के लिए जेपी अस्पताल ले गए।

यहां डॉक्टरों ने यह कहते हुए उन्हें वापस भेज दिया कि अगर दूसरे क्षेत्र मामलों में एक बार जांच कर दी, तो फिर सभी मामले यहीं आने लगेंगे। यह मामला कोलार स्वस्थ्य केंद्र का है, इन्हें वहीं ले जाओ। पुलिस जब कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, तो वहां कोई डॉक्टर नहीं था।

स्टाफ का कहना था कि डॉक्टर अवकाश पर हैं। फोन पर सूचना देने के बाद भी महिला डॉक्टर पांच घंटे बाद पहुंचीं। तब जाकर रात 8 बजे मेडिकल हो पाया। पीड़िताओं के परिजन ने अपहरण को लेकर 3 दिन पहले विधानसभा के सामने प्रदर्शन भी किया था। जिसके बाद मामले की जांच सीएसपी हबीबगंज को सौंपी गई थी।

कोलार थाना प्रभारी गौरव बुंदेला के अनुसार 13 और 15 साल की अपहृत दोनों किशोरियों को शनिवार देर रात गुनगा इलाके में क्रेशर खदान से आरोपियों के चंगुल से मुक्त करा लिया गया था। गिरफ्तार आरोपी नाबालिग हैं और क्रेशर खदान में ही काम करते हैं। टीआई ने बताया कि मेडिकल जांच में करीब 7 घंटे का समय लग गया।

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