भोपाल की हकीकत पांच साल से नहीं खुला इस अस्पताल का ताला, कोई डॉक्टर भी नहीं

Jun 28, 2016

भोपाल. प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों की हकीकत राजधानी से सटे बगरोदा ग्राम पंचायत के उप स्वास्थ्य केंद्र पर लटके ताले को देखकर समझी जा सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक स्वास्थ्य केंद्र की इमारत 1998 में तैयार हुई थी पर ग्रामीणों को आज तक इलाज नहीं मिला। खास बात है कि 11 फरवरी 2011 में जब उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी बगरोदा गांव आए थे तब इस स्वास्थ्य केंद्र के ताले भी खुले थे और यहां आनन-फानन में बेड समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं भी जुटाई गई थीं, पर उप राष्ट्रपति के जाने के बाद से यहां फिर ताला लगा दिया गया।

दीवार बताती है यहां आरोग्य केंद्र भी है

इसके अलावा वर्ष 2012 में गांव को ग्राम आरोग्य केंद्र की सुविधा दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक आरोग्य केंद्र की जानकारी केंद्र की दीवार पर तो चस्पा है, पर न तो यहां से दवाई मिली और न ही मर्ज का इलाज हुआ। मजबूरन ग्रामीणों को इलाज के लिए 14 किमी दूर मिसरोद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक का सफर करना पड़ रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं की गैरमौजूदगी के चलते ग्रामीणों की जिंदगी गांव में सक्रिय झोला छाप डॉक्टरों के भरोसे हैं।

छह हजार से अधिक आबादी लाइलाज

गोकुल ग्राम और निर्मल गांव घोषित ग्राम पंचायत बगरोदा की छह हजार से अधिक आबादी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम है। उप स्वास्थ्य केंद्र पर एक एएनएम गायत्री अहिरवार की नियुक्ति की गई है, जबकि दो आशा कार्यकर्ताओं के साथ ग्राम आरोग्य केंद्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्रामीण पतिराम ने बताया, उप स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम कक्ष की भी व्यवस्था है, पर यहां कभी एएनएम नहीं रुकी, जबकि नियमानुसार एएनएम को केंद्र पर रुकना अनिवार्य है। टीकाकरण के लिए भी यदाकदा एएनएम नजर आती हैं। ग्रामीण गुलाब सिंह के मुताबिक केंद्र पर प्रत्येक गुरुवार एवं सप्ताह के प्रथम मंगलवार को गर्भवतियों की जांच करने की सूचना चस्पा है, पर यहां न तो स्ट्रेचर है और न ही कोई अन्य उपकरण।

इलाज का यहां टोटा, फिर भी नई इमारत

उप स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग को पुराना बताकर अब यहां नई बिल्डिंग बनाई जा रही है। ग्रामाीण महेंद्र पटेल के अनुसार जब पुरानी बिल्डिंग में स्वास्थ्य केंद्र का ताला खुला ही नहीं तो नई बिल्डिंग बनाने का क्या फायदा। वहीं दूसरी ओर नई बिल्डिंग बनाने के लिए उपयोग में लाई जाने वाली निर्माण सामग्री उप स्वास्थ्य केंद्र के एक कमरे में रखी गई है, जबकि स्वास्थ्य केंद्र के लिए कोई अन्य जगह व्यवस्था नहीं की गई।

इनका कहना है…

आशा कार्यकर्ता के घर से स्वास्थ्य केंद्र का काम कर रहे हैं। सप्ताह में चार दिन गांव जाते हैं। केंद्र की स्थिति ठीक नहीं है वहां कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बारे में कई बार अधिकारियों को बताया है। रुकने की व्यवस्था नहीं है इसलिए यहां नहीं रहते।

– गायत्री अहिरवार, एएनएम

उप स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति है। उप स्वास्थ्य केंद्र पर एएनएम की मौजूदगी नहीं होने की शिकायत पहले आई थी, जिसके बाद एएनएम ने गांव में ही रहने की जानकारी दी थी। केंद्रों पर लगने वाले स्वास्थ्य शिविरों में डॉक्टर जाते हैं। इसके अलावा समय-समय पर डॉक्टर विजिट करते हैं।

– डॉ. योगेश कौरव, सेक्टर अधिकारी एवं प्रभारी पीएचसी मिसरोद

हमने कभी भी स्वास्थ्य केंद्र का ताला खुला नहीं देखा। टीकारण के लिए भी एएनएम कब आती हैं पता नहीं। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी आए थे तब केंद्र पर डॉक्टर एवं स्टाफ मौजूद था। इसके बाद फिर यहां ताला लगा दिया गया। कई बार इसकी शिकायत की गई, पर कोई नतीजा नहीं निकला।

– हेमराज पटेल, सरपंच

बगरोदा उप स्वास्थ्य केंद्र की नई बिल्डिंग का काम चल रहा है। केंद्र पर ताला लगे रहने और एएनएम के मौजूद नहीं रहने की जांच करवाई जाएगी।

– डॉ. वीणा सिन्हा, सीएमएचओ

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