आयोग में अध्यक्ष बने, लाल बत्ती भी पा ली पर काम कर रहे पार्टी का

Aug 05, 2016

आयोग में अध्यक्ष बने, लाल बत्ती भी पा ली पर काम कर रहे पार्टी का

भोपाल। ब्यूरो। लाल बत्ती के साथ आयोग के अध्यक्ष पद पर काबिज नेताओं का संगठन से मोह नहीं छूट रहा। बात चाहे कृषक कल्याण आयोग की हो या राज्य महिला आयोग की, इनके अध्यक्ष सत्ता-संगठन से जुड़े कार्यक्रमों व पार्टी दफ्तर में दिखाई दे जाते हैं। कई तो ऐसे हैं जो अभी संगठन में मिले अपने पद पर कायम हैं। ऐसे ही हाल अन्य आयोग के अध्यक्षों के भी हैं।

हालांकि इन आयोग के पूर्व अध्यक्ष भी मान्य परंपरा के पक्षधर हैं। दरअसल, मप्र राज्य कृषक कल्याण आयोग के अध्यक्ष बंशीलाल गुर्जर तो अब भी भाजपा के प्रदेश महामंत्री जैसे अहम पद पर कार्यरत हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में भी उनकी बराबर भागीदारी रहती है।

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इस संबंध में उनका तर्क है कि कृषक कल्याण आयोग अध्यक्ष का पद संवैधानिक नहीं है, इसलिए वह पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि आयोग को लेकर वह अपनी अरुचि सत्ता-संगठन के नेताओं को बता चुके हैं। वहीं, उनके पूर्ववर्ती इस आयोग के अध्यक्ष रहे डॉ. राजेंद्र पाठक मान्य परंपरा के पक्षधर रहे।

अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने संगठन के कार्यक्रमों से अपने आपको हमेशा दूर रखा। इसी तरह भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रहीं लता वानखेड़े को सरकार ने राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वानखेड़े का कहना है कि उन्होंने शपथ लेने के ठीक पहले मोर्चा अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था।

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कार्यकर्ताओं से मिलने कभी-कभार भाजपा कार्यालय चली जाती हैं, लेकिन उनके पहले आयोग की अध्यक्ष रहीं उपमा राय ने परंपरा का पालन करते हुए पार्टी कार्यालय और संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी थी। वहीं, मप्र राज्य अनुसूचित जाति आयोग अध्यक्ष भूपेंद्र आर्य कहते हैं कि भाजपा कार्यालय में आने वाले अजा वर्ग के कार्यकर्ताओं से मिलने वह पार्टी दफ्तर जाते हैं, लेकिन आयोग अध्यक्ष बनने के बाद कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते।

मीडिया ने टोका तो मंच से चले गए मरावी

राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष नरेंद्र मरावी भी पार्टी दफ्तर आकर नेताओं से मेल-जोल में सक्रिय रहते हैं। शहडोल जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में एक बार वह पहुंचे मीडिया के टोकने पर उठकर चले गए। अब बैठकों से परहेज करने लगे हैं लेकिन बड़े कार्यक्रमों के दौरान क्षेत्र में आकर नेताओं के संपर्क में बने रहते हैं। शहडोल लोकसभा उपचुनाव प्रत्याशी के लिए उनका नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है।

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सियासी कार्यक्रमों से दूर रहें

मान्य परंपराओं के अनुसार विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष पद पर आसीन रहने के कारण राजनीतिक प्रापर्टी नहीं रह जाते, लिहाजा उन्हें सियासी कार्यक्रमों से दूर ही रहना चाहिए भले ही जिस विचारधारा से वे उपकृत हैं, उसे समर्पित रहें।

-केके मिश्रा, मुख्य प्रवक्ता मप्र कांग्रेस

परंपरा का पालन करें तो अच्छा मान्य परंपरा और स्वनिर्धारित सीमा है जो जितना पालन कर सके, अच्छा है।

-अजय प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष मप्र भाजपा

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