अपने फायदे के लिए कागजों में किए करोड़ों के काम, गड़बड़ी मिली तो अब होगी जांच

Jul 25, 2016

अपने फायदे के लिए कागजों में किए करोड़ों के काम, गड़बड़ी मिली तो अब होगी जांच

भोपाल। नवदुनिया न्यूज

लोगों को 24 घंटे पानी देने का सपना पूरा करने की बजाय नगर निगम के अफसरों ने 415 करोड़ रुपए के वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में जमकर गड़बड़ियां कीं। लोकायुक्त में इसकी शिकायत हुई तो नगर निगम ने जांच शुरू कर दी है। नवदुनिया ने जब इस मामले की पड़ताल की तो हर स्तर पर घोटालों की कहानी सामने आई है।

इस काम में शुरू से ही डिजाइन से लेकर निर्माण तक घटिया हुआ और वित्तीय गड़बड़ियां की गईं। लिहाजा, आठ साल में भी यह योजना अधूरी है। इसके चलते शहर के अधिकांश हिस्सों में लीकेज और कम प्रेशर की समस्या बनी हुई है। ज्ञात हो कि दो साल से पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसी दौरान निगम अफसरों ने कमीशन के चक्कर में हर स्तर पर वित्तीय गड़बड़ियां कीं। इसकी शिकायत पर लोकायुक्त से की गई तो निगम को नोटिस भेजा गया। इसके बाद निगम प्रशासन ने नोडल अधिकारी नियुक्त किया, जिसने जलकार्य शाखा के नगर यंत्री एआर पवार के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

यह है गड़बड़ियों की कहानी 30 करोड़ के काम कागजों पर

पाइपलाइन बिछाने के लिए तीन योजनाओं से 190 करोड़ रुपए की राशि ली गई, लेकिन इसमें 30 करोड़ रुपए कागजों पर ही खर्च हो गए। हकीकत में 160 करोड़ रुपए से ही काम हुए। दरअसल, निगम ने जेएनएनयूआरएम में गैस राहत बस्तियों में पानी सप्लाई के लिए 50 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। निगम ने टेंडर जारी कर यहां काम करवाया। जलकार्य शाखा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक निगम ने जेएनएनयूआरएम में जिन कामों के टेंडर किए थे, उन्हें यहां भी बता दिया। ऐसे करीब 30 करोड़ रुपए के काम गैस राहत विभाग वाले प्रोजेक्ट में शामिल किए गए। इन प्रोजेक्ट में तत्कालीन नगर यंत्री सुबोध जैन और वर्तमान एके पवार ने ही यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट बनाया था। वित्त अधिकारी रजनी शुक्ला ने इसे मंजूर किया। तत्कालीन कमिश्नर रजनीश श्रीवास्तव और विशेष गढ़पाले ने ही इन प्रोजेक्ट की रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी। नगरीय प्रशासन ने भी इन गड़बड़ियों पर ध्यान नहीं दिया।

दूसरे प्रोजेक्ट में भी गड़बड़ी

जेएनएनयूआरएम का दूसरा प्रोजेक्ट था, 415 करोड़ रुपए में वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क। इसके तहत पूरे शहर में निगम को 24 घंटे पानी देना था। समय पर काम पूरा नहीं हो पाया। इधर केंद्र से तीसरी और चौथी किस्त लेने के लिए निगम ने 235 करोड़ रुपए का काम होना बता दिया। इसके लिए 90 करोड़ रुपए की एडीबी योजना में कराए गए 54 करोड़ रुपए के कामों का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जेएनएनयूआरएम में लगा दिया गया।

दो जगह से कैश कराया एक ही काम का बिल

जेएनएनयूआरएम के गैस राहत प्रोजेक्ट में आईएचपी कंपनी को भी काम मिला था। इसी काम के एक बिल का पेमेंट 1.81 करोड़ रुपए था। निगम अफसरों ने इस बिल को राज्य सरकार के गैस राहत विभाग के प्रोजेक्ट में भी भेज दिया और यहां से यह रकम रिलीज करा ली।

कमीशन के चक्कर में हेरफेर

लक्ष्मी इंजीनियरिंग व आईएचपी जैसी बड़ी कंपनियों ने भी यह टेंडर लिए थे। छोटी कंपनियां भी शामिल थीं। इनका भुगतान करने के लिए निगम के पास पैसे नहीं थे। सूत्रों के अनुसार जब कंपनियों ने पेमेंट रिलीज करने के लिए कमीशन की मोटी रकम ऑफर की तो अफसरों ने ऐसे हेरफेर करना शुरू कर दिए।

टंकी निर्माण में गड़बड़ी

निगम ने वर्ष 2009 में 52 टंकियों का ठेका दिया था। 8 मई 2011 को इनका काम पूरा होना था, लेकिन लगातार देरी हुई। इसके बाद अलग से 10 टंकियों का ठेका मई 2010 में दिया गया। नारियलखेड़ा, भारत नगर, काजी कैंप, वहीदिया स्कूल, इंद्रपुरी, खजूरी कला आदि में कहीं डिजाइन गलत तो कहीं घटिया मटेरियल के कारण लीकेज और कम प्रेशर की समस्या है।

लोकायुक्त ने इन आरोपों पर मांगा जवाब

– लक्ष्मी कंपनी पाइपलाइन का नेटवर्क बिछा रही है, वह घटिया है। काम में देरी की जा रही है।

– जलकार्य के नगर यंत्री एआर पवार और विभाग के स्टाफ की मिलीभगत है।

– कंसल्टेंट प्रॉपर अपनी ड्यूटी नहीं कर रहा है।

– गैस राहत वाले क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाना था, लेकिन देरी की गई। यहां घटिया निर्माण किया गया।

इन योजनाओं से ली थी राशि

– 90 करोड़ रुपए की एडीबी दूसरे चरण की योजना

– 50 करोड़ रुपए की जेएनएनयूआरएम गैस राहत प्रोजेक्ट

– 50 करोड़ रुपए की गैस राहत विभाग की योजना

इधर, गंभीर आरोप फिर भी पद से नहीं हटाए गए नगर यंत्री

लोकायुक्त ने निगम प्रशासन से नगर यंत्री पवार के खिलाफ अनियमितताओं के संबंध में जांच रिपोर्ट मांगी, लेकिन प्रशासन ने तीन दिन बाद भी नगर यंत्री को पद से नहीं हटाया। जबकि इससे पहले आरोपों के चलते तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी को हटा दिया गया।

जिम्मेदारों से वसूली हो

टेंडर की शर्तों के विपरीत रेट बढ़ाकर लक्ष्मी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया है। कई बार रेट रिवाइज किए गए हैं। हमें लड़ते-लड़ते दो साल हो गए, लेकिन बल्क कनेक्शन के रेट तय होने के बाद भी कॉलोनियों में पानी नहीं पहुंचा। जिम्मेदारों से वसूली होना चाहिए।

– गिरीश शर्मा, पार्षद कांग्रेस

नगर यंत्री ने कहा- नहीं है जानकारी

जलकार्य के नगर यंत्री एआर पवार से जब लोकायुक्त में हुई शिकायत और वित्तीय गड़बड़ियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई नोटिस नहीं मिला और न ही किसी तरह के गड़बड़ी के बारे में उन्हें जानकारी है।

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