सरकार ही भरेगी निजी कॉलेजों की एमबीबीएस सीटें

Aug 08, 2016

सरकार ही भरेगी निजी कॉलेजों की एमबीबीएस सीटें

भोपाल। नवदुनिया न्यूज

निजी कॉलेजों की एमबीबीएस व बीडीएस सीटें प्रदेश सरकार ही भरेगी। अभी तक असमंजस था कि इन सीटों पर दाखिला निजी कॉलेज देंगे या चिकित्सा शिक्षा संचालनालय, लेकिन हाल ही में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति (एएफआरसी) में निजी कॉलेजों की बैठक में इस पर निर्णय हो गया है।

पिछले सत्र तक सरकार निजी मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस की 42 फीसदी सीटों पर स्टेटे कोटे के तहत दाखिला देती थी। 43 फीसदी सीटें निजी कॉलेज डीमेट व 15 फीसदी एनआरआई कोटे से भरते थे। इस साल सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निजी मेडिकल कॉलेज दाखिले के लिए अलग से कोई परीक्षा नहीं कराएंगे। नीट-1 या नीट-2 से कॉलेजों में दाखिले होंगे। इसके बाद निजी कॉलेजों ने डीमेट बंद करने का ऐलान कर दिया, लेकिन यह साफ नहीं था कि निजी कॉलेजों की सीटों के लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया क्या होगी। इस वजह से उम्मीदवार भी असमंजस में थे। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में एएफआरसी में इस मामले को लेकर बैठक हुई है। इसमें तय किया गया है निजी कॉलेजों की सीटें चिकित्सा शिक्षा संचालनालय भरेगा। एडमिशन के बाद छात्रों के दस्तावेज व फीस कॉलेजों को सौंप दी जाएगी।

पीजी सीटों पर दिया था एडमिशन

इस साल निजी कॉलेजों की पीजी सीटों में दाखिले भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने दिए थे। इससे कई निजी कॉलेज संचालक नाराज थे। उन्होंने फीस लेने के लिए काउंसलिंग के दौरान अपने प्रतिनिधि तक नहीं भेजे थे। दाखिले के बाद छात्र कॉलेजों में ज्वाइन करने पहुंचे तो उनसे तीन साल की फीस के लिए बैंक गारंटी मांगी गई, जिससे वे सीट छोड़कर न जा सकें।

उम्मीदवारों को यह होगा फायदा

– उन्हें अब अलग-अलग काउंसलिंग में भाग नहीं लेना होगा।

– एक ही जगह काउंसलिंग होने से उन्हें कॉलेज का विकल्प तय करने में आसानी होगी।

– एएफआरसी द्वारा तय फीस ही उम्मीदवारों से ली जाएगी।

– मप्र में दाखिला नहीं मिला तो वे दूसरे राज्यों की काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे।

जल्द तैयार होंगे प्रवेश नियम

प्रदेश के निजी और सरकारी कॉलेजों में दाखिले के लिए प्रवेश नियम बनाए जा रहे हैं। इस बार नियमों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जा रहा है। एससी-एसटी उम्मीदवारों को एडमिशन के दौरान फीस के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए कुछ प्रावधान किए जा रहे हैं। अभी तक उन्हें खुद फीस देना होती थी। बाद में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से मिल जाती थी।

– डॉ. जीएस पटेल, संचालक, चिकित्सा शिक्षा

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