जोर-शोर से शुरू कीं सुविधाएं पर नहीं मिल रहा लोगों को फायदा

Jul 28, 2016

जोर-शोर से शुरू कीं सुविधाएं पर नहीं मिल रहा लोगों को फायदा

भोपाल। नवदुनिया न्यूज

नगर निगम ने इस साल जनवरी में जनसुविधा से जुड़ी कुछ योजनाएं शुरू कीं। इनमें महापौर एक्सप्रेस, मोबाइल कोर्ट और वाई-फाई जोन और शिवनीर आदि शामिल हैं। हालांकि प्रचार-प्रसार की कमी से इनका लोगों को फायदा नहीं मिल सका। शुरुआत में योजनाओं पर काम चालू तो हुआ, लेकिन सुविधा अधूरी होने के कारण लाभ नहीं मिला। नवदुनिया ने इन योजनाओं का जायजा लिया, तो हकीकत सामने आई।

1. महापौर एक्सप्रेस की जानकारी ही नहीं, वेल्डर, माली की सुविधा को एमआईसी का इंतजार

महापौर एक्सप्रेस ‘जनसुविधा केंद्र’ के तहत नगर निगम ने 8 फरवरी 2016 को योजना शुरू की। इसमें सुबह 7 से शाम 7 बजे तक इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और कारपेंटर एक कॉल पर घर पहुंचाने की सुविधा दी गई थी। इस कार्य के लिए 10 प्रशिक्षु और चार कम्प्यूटर ऑपरेटर दो पालियों में तैनात किए गए थे। लोग इन्हें 0755-2701555 कॉल करने पर बुला सकते हैं। योजना के तहत प्रति सुविधा एक बार कॉल के 200 और दूसरे कॉल के 100 रुपए तय किए गए थे। इसमें वेल्डर और माली की सुविधा भी उपलब्ध कराया जाना है लेकिन अब तक एमआईसी में मंजूरी का इंतजार है।

हश्रः फरवरी में 176, मार्च 151, अप्रैल 108, मई 94, जून में 30 और जुलाई में 60 लोगों ने कॉल किए।

वजहः इस योजना का प्रॉपर प्रचार प्रसार नहीं हो पाया।

2. सिर्फ वोट क्लब में मुफ्त वाई-फाई सुविधा

नगर निगम ने 20 जनवरी 2016 को बोट क्लब पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा शुरू की। इसके लिए एक कंपनी से करार भी किया गया, जो कि विज्ञापन के एवज में यह सुविधा दे रही है। शुरुआत में वाई-वाई की रेंज वर्धमान पार्क से वन विहार के गेट तक और बड़े तालाब में 200 मीटर तक होनी थी। इसकी सफलता के बाद एमपी नगर जोन-1 व 2, न्यू मार्केट, 10 नंबर, बिट्टन मार्केट आदि को शामिल किया जाना था। योजना के तहत करीब 15 से 20 एमबीपीएस की स्पीड मुहैया कराई जाना थी। ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों को एमपी नगर में प्रीपेड मुहैया कराया जाता। प्रीपेड की कीमत 20 रुपए प्रति घंटा तय की गई थी।

हश्रः बोट क्लब और भोपाल रेलवे स्टेशन के बाद दूसरे स्थानों पर यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई।

वजहः अब इस प्रोजेक्ट को स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया है। जिसको शुरू होने में डेढ़ साल और इंतजार करना पड़ेगा।

3. पांच महीने में सिर्फ तीन बाद चली मोबाइल कोर्ट

शहर को स्वच्छ एवं साफ-सुथरा रखने के लिए 16 फरवरी 2016 को मोबाइल कोर्ट का शुभारंभ किया गया। म्युनिसिपल मजिस्ट्रेट संजय सिंह ने राजधानी के प्रमुख बाजार न्यू मार्केट में कार्रवाई की थी। इस दौरान 80 व्यापारियों के चालान काटे गए और 1 लाख 60 हजार रुपए जुर्माना वसूला गया। इसके बाद एमपी नगर इलाके में बड़ी कार्रवाई हुई थी। फिर सप्ताह भर पहले कोलार क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख रुपए जुर्माना लगाया गया। मोबाइल कोर्ट गंदगी करने, गुमास्ता लाइसेंस आदि पर स्पॉट फाइन की कार्रवाई करती। इसके साथ ही स्पॉट पर प्रॉपर्टी टैक्स, समेकित कर, वॉटर टैक्स की वसूली और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान मौके पर निपटारा करती। इसमें फाइन व सजा का भी प्रावधान था।

हश्रः एक-दो स्थानों पर बड़ी कार्रवाई हुई, बाद में मोबाइल कोर्ट द्वारा कार्रवाई नहीं की गई।

वजहः इसके लिए अलग से कर्मचारी तैनात नहीं किए गए।

4.बॉटल में नहीं मिलता शिवनीर का ठंडा पानी

वर्ष 2014-15 के बजट में शुद्घ पेयजल के लिए शहर के प्रमुख बाजारों व अन्य सार्वजनिक स्थलों जैसे में शिवनीर लगाया जाना था। इसके तहत लोगों को एक रुपए में एक लीटर शुद्घ पानी मिलना था। 20 लीटर के केन का रेट 20 रुपए रखा गया था।

हश्रः मिंटोहाल और एमपी नगर जोन टू स्थित सरगम टॉकीज के पास शिवनीर की सुविधा चालू तो हुई पर बॉटल में पानी नहीं मिलता। सिर्फ ग्लास में पीने की सुविधा है। 10 नंबर, न्यूमार्केट, आईएसबीटी, नादरा बस स्टैंड, हलालपुर बस स्टैंड, चौक आदि बाजारों में शिवनीर का काम तक चालू नहीं हो पाया।

वजहः बजट की कमी के कारण शिवनीर के स्टॉल शो-पीश बनकर रह गए हैं।

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