कॉलेजों को पता नहीं चलेगा कौन आएगा जांच करने

Aug 01, 2016

कॉलेजों को पता नहीं चलेगा कौन आएगा जांच करने

भोपाल। राहुल शर्मा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने बीएड, बीपीएड कॉलेजों में जांच के दौरान फर्जीवाड़ा रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत महज कुछ अधिकारियों के अलावा किसी को भी यह जानकारी नहीं होगी कि किस कॉलेज की जांच कौन-सा पर्यवेक्षक करेगा। यहां तक की पर्यवेक्षक भी एक-दूसरे से पूरी तरह अनजान होंगे।

मप्र में बीएड और बीपीएड के 700 से ज्यादा कॉलेज हैं। पहले कई बार ऐसी शिकायतें आई हैं जब जांच के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है। परिषद ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि कॉलेजों की सही स्थिति सामने आ सके। इसी के साथ कॉलजों और पर्यवेक्षकों की मिलीभगत को रोका जा सके।

ऐसे तय होंगे पर्यवेक्षक

अधिकारियों ने बताया कि एनसीटीई ने देशभर में करीब डेढ़ हजार पर्यवेक्षक बनाए हैं। यह रिटायर्ड प्रोफसर, प्रोफेसर, अधिकारी आदि होते हैं। इनमें से कोई भी दो पर्यवेक्षक कॉलेजों की जांच के लिए जाएंगे। एनसीटीई ने इसके लिए ऑटोमैटिक इंस्पेक्शन जनरेशन सिस्टम तैयार किया है। इसमें जैसे ही किसी कॉलेज का नाम डाला जाएगा, इन डेढ़ हजार पर्यवेक्षकों में कोई भी दो के नाम तय हो जाएंगे।

तारीख भी जनरेट भी होगी

अधिकारियों के मुताबिक संभव है कि भोपाल के किसी कॉलेज का जब नाम डाला जाए तो उसमें एक पर्यवेक्षक जयपुर का हो और दूसरा किसी दक्षिणी राज्य का। इसकी जानकारी किसी को नहीं होगी कि किस कॉलेज में कौन जांच करने जाएगा। इनकी जांच की तारीख भी सॉफ्टवेयर जनरेट करेगा। जब एक-दूसरे से अपरिचित पर्यवेक्षक जांच करेंगे तो निश्चित ही यह पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। कॉलेजों की वस्तुस्थिति भी सामने आ जाएगी।

बंद हो सकते हैं कॉलेज अ

धिकारियों के मुताबिक अगर किसी कॉलेज ने गलत जानकारी दी और जांच के बाद अगर तथ्य साबित हो जाता है तो कॉलेजों की मान्यता समाप्त की जाएगी। नए सिस्टम के तहत इस बात की संभावना है कि गलत जानकारी देने वाले कॉलेजों पर गाज गिर सकती है।

अब तक यह थी व्यवस्था

कॉलेजों की जांच के लिए जो टीम बनती थी, उसके नाम क्षेत्रीय कार्यालय से तय होते थे। इस कारण कई बार कर्मचारियों से भी कॉलेज संचालकों को यह जानकारी मिल जाती थी कि जांच करने कौन आएगा। इस कारण वे उनसे सीधे संपर्क साध लेते थे। अब ऐसा नहीं होगा।

इनका कहना है

मिलीभगत की आशंका शून्य एनसीटीई ने यह व्यवस्था देशभर में लागू की है। इससे किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े और मिलीभगत की आशंका शून्य हो गई है।

– सतीश गुप्ता, क्षेत्रीय संचालक, एनसीटीई

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