ज्यादातर कॉलेजों में ठेके पर फैकल्टी, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

Aug 18, 2016

ज्यादातर कॉलेजों में ठेके पर फैकल्टी, छात्रों के भविष्य से खिलवाड़

भोपाल। नवदुनिया न्यूज

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में बुधवार को हुई कार्यपरिषद की बैठक हंगामेदार रही। सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इसके साथ ही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोप भी लगाए।

बैठक में कार्यपरिषद के सदस्य प्रमोद गुगालिया ने आरोप लगाया कि बीयू फार्मेसी, एमबीए, एमसीए, बीएड, बीपीएड, इंजीनियरिंग आदि के छात्रों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। इन कॉलेजों में यूजीसी, एनसीटीई, एआईसीटीई, फार्मेसी काउंसिल आदि के नियमों व शर्तों की अवहेलना की जा रही है। कहीं भी नियमों का पालन नहीं हो रहा।

कॉंट्रेक्ट पर फैकल्टी

गुगालिया ने कहा कि उपरोक्त कॉलेजों में स्थायी फैकल्टी का नियम है। यूजीसी की गाइडलाइन है कि कुल फैकल्टी में से केवल 10 फीसदी ही कॉन्ट्रेक्ट पर रखी जा सकती है। लेकिन हो इसका उलट रहा है। 90 प्रतिशत से भी ज्यादा फैकल्टी ठेके पर काम कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि विवि प्रबंधन ऐसे कॉलेजों पर एक्शन क्यों नहीं लेता। उन्होंने कुलपति डॉ.मुरलीधर तिवारी और कुलसचिव को इस संबंध में कॉपी भी मुहैया करवाई।

क्यों नहीं दिया जा रहा वेतन

बैठक में 10 असिस्टेंट प्रोफेसर और एक डायरेक्टर की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए। बीयू प्रबंधन से पूछा गया कि इन्हें 20 माह से वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा? गुगालिया ने कहा बीयू ने इन पदों का सृजन ही क्यों किया था जब उक्त 11 लोगों को सस्पेंड करना था। उन्होंने कहा कि यूजीसी से मिली करोड़ों रुपए की राशि भी लैप्स हो रही है।

इस दौरान संविदा पर रखे गए 37 शिक्षकों का वेतन 25 हजार से 40 हजार रुपए किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। कुलपति से पूछा गया कि जब इनका वेतन बढ़ाया जा रहा है तो पूर्व में विज्ञापन जारी क्यों नहीं किए गए। हो सकता है कि बहुत से लोग ऐसे हों जिन्होंने कम वेतन के कारण आवेदन नहीं किया हो। अगर विज्ञापन जारी होते तो इस बात की संभावना अधिक थी कि बीयू को और ज्यादा योग्य संविदा शिक्षक मिलते। यह भी पूछा गया कि संविदा पर बरसों से काम कर रहे अन्य शिक्षकों का वेतन क्यों नहीं बढ़ाया गया।

इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं की कमी का मुद्दा भी गर्माया। गौरतलब है कि उत्तर पुस्तिकाओं की कमी के कारण एमबीए की परीक्षा स्थगित करना पड़ी थी।

क्लीन चिट दी

बैठक में प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग के डॉ. कालिका यादव, डॉ.नीरजा शर्मा और हेमंत खंडई के विवाद के मामले को क्लीन चिट दे दी गई। गुगालिया ने कहा कि जिस समिति ने इन पर आरोप लगाए हैं उसका आधार क्या है? क्या इस समिति की जांच पूर्व में की गई है। इस तरह के आरोप कोई भी किसी पर लगा सकता है। बैठक में बीयू में सड़क निर्माण की लागत बढ़ने का मुद्दा भी उठा। इस दौरान कार्यपरिषद के सदस्य सुरभि सिंह, सुनील पाटील, लोकेंद्र दवे, मधुमिता पांडे आदि उपस्थित थीं।

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