हॉस्टलों में आवासीय टैक्स लगाने के मामले में निगम बैकफुट पर, मश्विरा लेकर पलटेगा फैसला

Aug 06, 2016

हॉस्टलों में आवासीय टैक्स लगाने के मामले में निगम बैकफुट पर, मश्विरा लेकर पलटेगा फैसला

भोपाल। नवदुनिया न्यूज

राजधानी में संचालित हो रहे हॉस्टलों से आवासीय दर से संपत्ति कर की वसूली के फैसले पर नगर निगम बैकफुट पर आ गया है। नगर निगम के बजट में गड़बड़ी कर लिए गए यह फैसला अब पलट सकता है। इसके लिए पिछले दरवाजे से विधि विभाग की राय का हवाला देकर फिलहाल इस प्रावधान को लागू नहीं किया गया है। यह भी तब जबकि बजट लागू हो चुका है।

शहर में वैध 800 हॉस्टल संचालित हो रहे हैं। जबकि अवैध हॉस्टलों की संख्या 5000 से अधिक है, लेकिन सभी से कमर्शियल दरों पर कर की वसूली की जा रही थी। इसी बीच बजट में जून 2012 में आए भूमि विकास नियम को हवाला देते हुए हॉस्टल्स को आवासीय श्रेणी में रख दिया गया। इससे निगम को करीब 12 करोड़ रुपए की चपत लगने वाली थी। नवदुनिया ने इस गड़बड़ी को प्रकाशित किया। इसके बाद कांग्रेसी पार्षद गिरीश शर्मा ने निगम परिषद में प्रश्न लगाकर हॉस्टलों को आवासीय घोषित करने जवाब मांगा था। शनिवार को इस पर चर्चा होनी है। इसी के मद्देनजर निगम ने विधि विभाग का हवाला देकर प्रावधान लागू न होने की सूचना दी है। वहीं, पार्षद शर्मा का आरोप है कि हॉस्टल संचालकों को फायदा पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार है। गौरतलब है कि बजट बैठक में इस प्रस्ताव को बहुमत के आधार पर मंजूरी दी गई थी।

इसलिए पलटना पड़ेगा फैसला

– भूमि विकास नियम 2012 में हॉस्टल कर परिभाषा आवासीय बताई है, लेकिन यह तभी मान्य होगा जबकि टीएंडसीपी एक्ट में भी हॉस्टल आवासीय हो। टीएंडसीपी एक्ट में हॉस्टल आवासीय में नहीं आता है, इसलिए निगम का फैसला भी गलत साबित होगा। कोर्ट में यदि मामला गया तो निगम अफसर फंस सकते हैं। इसी वजह से हॉस्टल को कमर्शियल में रखने पर ही विचार किया जा रहा है।

खबर का असर

नवदुनिया ने इस मुद्दे पर 6 अप्रैल के अंक में ‘हॉस्टल संचालकों पर निगम मेहरबान, प्रॉपर्टी टैक्स में दी रियायत, 12 करोड़ का नुकसान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसमें गड़बड़ियों को उजागर किया गया था।

निगम ने विधि विभाग से मांगा अभिमत

राजस्व उपायुक्त प्रदीप वर्मा का कहना है कि निगम परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद यह लागू हुआ है। इसके लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ता से अभिमत मांगा गया है। गत मई महीने में प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया।

ऐसे समझें गड़बड़ी का गणित

व्यवसायिक के बादः एमपी नगर स्थित 1000 वर्गमीटर के हॉस्टल पर व्यवसायिक दर पर वार्षिक भाड़ा मूल्य 880 रुपए प्रतिवर्ग मीटर है। इस हिसाब से 88 हजार रुपए टैक्स होता है। समेकित कर, शिक्षा उपकर, नगरीय विकास कर 79 हजार 450 रुपए होते हैं। कुल 1 लाख 67 हजार 450 रुपए पड़ता है।

आवासीय के बादः 1000 वर्गमीटर के हॉस्टल पर आवासीय दर पर वार्षिक भाड़ा मूल्य 440 रुपए प्रतिवर्ग मीटर है। इस हिसाब से टैक्स 44 हजार रुपए आता है। अन्य कर 39 हजार 725 रुपए आता है। कुल टैक्स 83 हजार 725 रुपए होते हैं।

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>