खुद गाय का मांस खाते है, आज गौरक्षक होने का ढोल पीट रहे है: नाटूभाई परमार

Jul 27, 2016

गुजरात के दलित कार्यकर्ता नाटूभाई परमार जोकि नवसृजन ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं  ऐसे दलित कार्यकर्ता हैं जिन्होंने सुरेंद्रनगर में ज़िला कलेक्टर के दफ़्तर के बाहर मरी गायें फेंककर ग़ुस्सा ज़ाहिर किया। उन्होंने बताया कि गुजरात के मोटा समाधियाला गाँव में कुछ दिन पहले मरी गाय का चमड़ा खींचने पर चार दलित नौजवानों की सरेआम पिटाई की गई थी जिसके चलते दलित समुदाय में ग़ुस्सा और बेचैनी है बनी हुई है। कलेक्टर के दफ्तर के आगे मरी हुई गाय फेंक कर विरोध जताना  शांतिपूर्ण मगर साथ ही उग्र तरीक़ा था जिसे भारत के दलित आंदोलन में एक नए आत्मविश्वास के तौर पर देखा जा रहा है।

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नाटूभाई का कहना है कि दलित समुदाय के साथ सदियों से बुरा बर्ताव किया जाता है। जबकि गाय की मांस खाना हमारी परंपरा नहीं बल्कि उनकी थी जो खुद को आज हिंदू कहते हैं। उन्हीं के पापों के कारण ही आज हम उस कगार पर हैं जहाँ हम मरी हुई गाय या मरे हुए पशुओं के माँस खाने को मजबूर हैं।  हिंदू राष्ट्र की बात करने वाले, दलितों को सिर्फ़ संख्या बढ़ाने के लिए हिंदू कहते हैं, पर दरअसल उन्हें हिंदू नहीं मानते। उन्होंने मोदी की निंदा करते हुए कहा कि अमिताभ बच्चन को बुखार भी चढ़े तो प्रधानमंत्री मोदी तुरंत ट्वीट करते हैं, पर इतनी बड़ी घटना हो गई और उन्होंने ट्वीट नहीं किया। चुपचाप सब देख रहे हैं। नाटूभाई ने कहा कि अब दलित और बर्दाश्त नहीं करेंगे।  हज़ारों साल से मरी गाय की खाल निकालकर चमड़ा बनाने का काम अब शिव सैनिक और गौरक्षक ही करें क्योंकि वो ये काम अब नहीं करेंगे। नाटूभाई कहते हैं कि जब समान अधिकार हैं तो आज भी गुजरात में दलितों को मंदिरों में नही जाने दिया जाता, हमारे बच्चों को मिड-डे भोजन अलग से बैठा कर खिलाया जाता है, सार्वजनिक स्थानों पर हम नहीं जा सकते।

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