तो इस वजह से, किसी गांव को गोद नहीं ले रहे सांसद

Aug 05, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के सभी सांसदों से हर साल अपने संसदीय क्षेत्र में किसी एक गांव को गोद लेकर उसका विकास करने की अपील और मंशा फलीभूत होते नहीं दिख रही है.
ज्यादातर सांसदों ने तो गांव को गोद ही नहीं लिया है.

और अगर कुछ ने लिया भी तो उसे कुछ माह बाद ही छोड़ दिया. गांव को गोद लेकर फिर उसे छोड़ देने के पीछे भी गजब किस्सा सामने आया है. वह किस्सा यह है कि सांसद के किसी एक गांव को गोद लेने के बाद उसके संसदीय क्षेत्र के बाकी सभी गांव वाले नाराज हो गए कि उनका गांव गोद क्यों नहीं लिया गया!
ज्यादातर सांसदों ने इस डर के मारे इस कार्य को त्याग दिया कि चुनाव में दूसरे गांव वालों की नाराजगी भारी पड़ जाएगी.
कई सांसदों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर इस संवाददाता से कहा कि किसी एक गांव को गोद लेना आत्मघाती कदम है. उनका कहना है कि एक तो गोद लिए गए गांव के विकास के लिए अलग से कोई फंड का बंदोबस्त सरकार ने नहीं किया है. दूसरे एक गांव के चक्कर में शेष सभी दूसरे गांवों की नाराजगी कौन मोल ले. जिस गांव को गोद लो, उसका विकास न कर पाओ तो उसकी किरकिरी अलग से.

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