कश्मीर की समस्या के समाधान के लिए ईमानदार राजनीतिक पहल हो: BJP

Aug 11, 2016

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री और जम्मू-कश्मीर से सांसद जीतेन्द्र सिंह ने जम्मू- कश्मीर समस्या के समाधान के लिए ईमानदारी से राजनीतिक पहल करने और इसके लिए राज्य के तमाम पक्षों के साथ बातचीत शुरू करने पर जोर दिया.

सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में कश्मीर घाटी की वर्तमान स्थिति पर जारी चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि वहां की समस्या के समाधान के लिए न केवल हुर्रियत बल्कि लद्दाख, पाकिस्तान के नाजायज कब्जे वाले कश्मीर, लद्दाख और कश्मीरी पंडितों से भी बातचीत करनी चाहिये. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह इस माह के 23 और 24 तारीख को श्रीनगर में थे और उन्होंने कांग्रेस के नेताओं से मिलने का प्रयास किया लेकिन इस पार्टी का कोई भी नेता उनसे नहीं मिला.

सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर सर्वदलीय बैठक हो, यह अच्छी बात है लेकिन वहां की भाजपा, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गठबंधन सरकार को वहां के लोगों का जनादेश मिला है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का संविधान भी कहता है कि वह भारत का अभिन्न हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि घाटी में हाल की घटनाओं में बेहद गरीब लोगों के बच्चें मारे गये है.  जो लोग यह मानते है कि जेहाद में शहीद होने वाला जन्नत में जाता है. पहले उन्हें अपने बच्चों को जेहाद के लिए भेजना चाहिये न कि उनको विदेशों में पढ़ाना चाहिए.

पीडीपी के नजीर अहमद लबे ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के अधिकांश नवयुवक बंदूक के साथ नहीं हैं बल्कि वे देश के साथ हैं. मुट्ठी भर लोगों ने बंदूकें उठायी हैं. उन्होंने कहा कि कश्मीर के युवक पढना चाहते हैं लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोग उन्हें देश का दुश्मन समझते है. उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहां भेजने की मांग की.

पीडीपी के मीर मोहम्मद फैयाज ने कहा कि 1947 से 1987 के दौरान जो गलतियां की गयी उसका खामियाजा जम्मू-कश्मीर के लोग भुगत रहे हैं. इस समस्या को लेकर समय-समय पर जो वादे किये गये थे उसे पूरे नहीं किये गये जिसके कारण लोग गुस्से में हैं और वे आजादी का नारा लगाते हैं.  उन्होंने कहा कि बातचीत ही समस्या का समाधान है और इसके लिए ठोस पहल करने की जरूरत है.

 भाजपा के सदस्य शमशेर सिंह मन्हास ने जम्मू और लद्दाख क्षेत्र का उल्लेख किये बिना कश्मीर के मसले पर चर्चा को बेमानी बताते हुये कहा कि वहां राष्ट्रवाद और अलगाववाद की लड़ाई है.

मन्हास ने कहा कि जम्मू कश्मीर राज्य में जम्मू, लद्दाख और कश्मीर अलग-अलग क्षेत्र हैं. राज्य की 55 प्रतिशत आबादी जम्मू क्षेत्र में रहती है. पहले हमें जम्मू और लद्दाख के बारे में जानना होगा.

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर कभी भी गुलाम नहीं रहा है और महाराजा हरि सिंह ने प्रदेश में छुआछुत को दूर किया और अभी भी उस प्रदेश में छुआछुत नहीं है. सभी लोग मिलजुल कर रहते हैं लेकिन चंद लोग अलगाववाद को बढावा दे रहे हैं. यह राष्ट्रवाद और अलगाववाद की लड़ाई है. जिन बच्चों के हाथ में किताब होनी चाहिए उनके हाथ में पत्थर कौन थमा रहा है.

उन्होंने कहा कि यदि बेरोजगारी के कारण युवा बंदूक उठा रहे हैं तो जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में ऐसा क्यों नहीं हुआ. सिर्फ और सिर्फ घाटी में अलगाववाद की वजह से यह समस्या उत्पन्न हुयी है और इसके जड़ में जाने की जरूरत है. पूरा कश्मीर जल नहीं रहा है बल्कि कुछ लोग अलगाववादियों के इशारे पर यह काम कर रहे हैं. उन्होंने वर्ष 1947 में विभाजन के दौरान जम्मू कश्मीर आये लोगों को नागरिकता नहीं दिये जाने का सवाल उठाते हुये कहा कि आतंकवाद के पनपने और अलगाववादी नेता बनने के जड़ को जानना होगा.

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