खराब दवाएं बनाने के आरोप में सिपला, फाइजर समेत 200 दवा कंपनियां जांच के घेरे में

Jun 21, 2016

नई दिल्ली। सिपला और फाइजर समेत 200 दवा निर्माता कंपनियों पर निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने और खराब गुणवत्तायुक्त दवाएं बनाने के आरोप हैं। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए इन कंपनियों के खिलाफ जांच ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने जांच भी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, पिछले महीनों के दौरान इन कंपनियों की 36 निर्माण इकाइयों की जांच की जा चुकी है। आने वाले दिनों में कई और कंपनियों की निर्माण इकाइयों पर उनके द्वारा उत्पादित दवाइयों की जांच की जा सकती है।

सिपला और फाइजर को नोटिस

सूत्रों ने यह भी बताया कि सिपला और फाइजर को हाल में नोटिस भी भेज दिया गया है। नोटिस में उनकी दवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायत के साथ ही जांच के बारे में भी जानकारी दी गई है। दवा कंपनियों के खिलाफ इस तरह का मामला पहली दफा नहीं आया है। दवाओं के घरेलू नियामक ने इससे पहले भी जांच-पड़ताल की है।

347 दवाओं पर नियामकीय प्रतिबंध

नियामक का यह कदम इसलिए और महत्वपूर्ण हो जा रहा है, क्योंकि हाल ही में 347 दवाओं पर नियामकीय प्रतिबंध लगाया गया था। सूत्रों ने बताया कि जिन 200 कंपनियों में कई के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही थीं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और भारतीय दवा संयंत्रों से दवाएं आयात करने वाली कंपनियों से भी नियामक को शिकायतें मिली हैं।

36 दवा निर्माण इकाइयों की जांच
नियामक ने जिन कंपनियों के खिलाफ शिकायतें हैं, उनकी दवाओं के सैंपल बाजार से ले लिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने के मामले में कंपनियों की पहचान के लिए राज्यों के संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों से भी बातचीत की गई है। जिन 36 दवा निर्माण इकाइयों की जांच गई है, वे तमिलनाडु, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में हैं।

गौरतलब है कि लंबे समय से भारतीय दवा निर्माता कंपनियां अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के रडार पर रही हैं। अब सन फार्मा का हिस्सा बन चुकी रैनबैक्सी लैबोरेटरीज को यूएस एफडीए द्वारा बड़े उल्लंघन के आरोप लगाने के बाद अपनी आपूर्ति रोकनी पड़ी थी। भारत से 2016 के 14 अरब डॉलर से बढ़कर 2020 में 20 अरब डॉलर हो जाने की संभावना है।

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