आजाद के लिए भी कठिन है, बेजान कांग्रेस में जान फूंकना

Jun 13, 2016

उत्तर प्रदेश का प्रभार वरिष्ठ नेता गुलामनबी आजाद को सौंपे जाने से कांग्रेस पार्टी में कुछ जान अवश्य आएगी.

जून के आखिरी सप्ताह में पार्टी राज्य में अपना बड़ा अभियान भी शुरू करने जा रही है. हालांकि काम आसान नहीं है, क्योंकि राज्य में कांग्रेस चौथे नंबर की पार्टी है. पुराना इतिहास भी अच्छा नहीं है. कांग्रेस का बार-बार प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदलने का प्रयोग भी विफल ही रहा है.

राहुल गांधी के करीबी बनकर आए पिछले प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री तो पार्टी में जान डालने में कुछ ज्यादा ही नाकाम साबित हुए. गुजरात से आने वाले मिस्त्री उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं से आखिर तक संवाद नहीं बना सके और उनकी पारी समाप्त हो गई.

ये भी पढ़ें :-  बिहार में बीजेपी को रगड़-रगड़ के धोया, अब बाकि दुलाई उत्तर प्रदेश में करेंगे- लालू यादव

अब देखना यह है कि कांग्रेस में बड़े प्रबंधक के रूप में पहचान रखने वाले गुलामनबी आजाद उत्तर प्रदेश में अपनी दूसरी पारी कैसे खेलते हैं. अभी से इस बात के कयास लगाए जाने लगे हैं कि चुनावी रेस की बड़ी पार्टी सपा-बसपा में से किसी के साथ आजाद खुला या छिपा समझौता कराने में कितना सफल रहते हैं.

कांग्रेस का दूसरी पार्टियों के साथ समझौता कराने में आजाद बड़े कुशल खिलाड़ी रहे हैं. मुश्किल मौकों पर पार्टी ने कई बार उनका इस्तेमाल किया है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए इस वक्त सबसे मुश्किल चुनौती है. सोनिया-राहुल का राज्य होने के बावजूद वहां कांग्रेस जरा भी अच्छा नहीं कर पा रही है.

ये भी पढ़ें :-  नवजोत सिंह सिद्धू जैसे आदमी के आने-जाने से, BJP को कोई फर्क नहीं पड़ेगा- बीजेपी महासचिव

आजाद मुस्लिम जरूर हैं और राज्य में मुस्लिम वोट भी अच्छी संख्या में है, लेकिन आजाद को सिर्फ इस वजह से प्रभारी नहीं बनाया गया है. दरअसल कांग्रेस भी अच्छी तरह से जानती है कि पहले उत्तर प्रदेश के प्रभारी रह चुके आजाद राज्य के मुस्लिमों में कोई विशेष पैठ नहीं रखते हैं, पर इतना जरूर है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस के बड़े-छोटे नेताओं से काम लेना आजाद को आता है.

पुराने प्रभारी मिस्त्री को उत्तर प्रदेश में घूमने के लिए राहुल गांधी से नजदीकी प्रचारित करनी पड़ती थी, लेकिन आजाद की पार्टी में हैसियत और हाईकमान से नजदीकी से उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश के कांग्रेसी वाकिफ हैं.

ये भी पढ़ें :-  इस बार ईवीएम में हुआ बड़ा बदलाव, पता कर सकेंगे वोट सही पड़ा या नहीं

जहां मिस्त्री फैसले नहीं ले पाते थे, वहीं आजाद की जल्द फैसले लेने वाली कार्यशैली राज्य में कार्यकर्ताओं को खुश कर सकती है. यही वजह है कि प्रदेश कांग्रेस में भी बदलाव में समय नहीं लगेगा. कार्यकर्ताओं में जान फूंकना है, इसलिए जून के आखिरी सप्ताह से पार्टी उत्तर प्रदेश में बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है.

अनुसूचित जाति विभाग के प्रमुख ने इस पर काफी काम किया है. इसमें सोशल इंजीनियरिंग के हिसाब से पार्टी राज्य में विभिन्न छोटी जातियों को महत्व देगी.

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

 

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>
error: 24hindinews.com\'s content is copyright protected
error: 24hindinews.com\'s content is copyright protected