आत्मकेंद्रित और पाखंडी देश है भारत: चीन

Jun 29, 2016

भारत को मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रीजीम की आधिकारिक सदस्यता मिलने से चीन इतना चिढ़ गया है कि उसने भारतीयों को आत्मकेंद्रित और पाखंडी तक करार दे दिया.

चीन के अखबार में छपे एडिटोरियल में भारतीयों के लिए आत्मकेंद्रित के अलावा यह भी कहा गया है कि उनमें नैतिकता की कमी है. बता दें कि भारत सोमवार को एमटीसीआर का 35वां सदस्य बना है, जबकि चीन अभी तक इसका सदस्य नहीं बना है.

इसकी वजह है कि चीन ने अपने मिसाइल कार्यक्रमों की जानकारी को पूरी तरह से साझा नहीं किया है.

चीनी अखबार में एनएसजी की सदस्यता को लेकर कहा गया कि किस तरह भारतीय मीडिया और भारत सरकार ने चीन को भारत की एनएसजी सदस्यता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बताया है.

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साथ ही पश्चिमी देशों की चाटुकारिता करने को लेकर भी भारत की आलोचना की गई है. क्योंकि अमरीका, फ्रांस, कनाडा और कुछ अन्य देशों ने भारत की एनएसजी सदस्यता को समर्थन दिया है.

 

अखबार ने लिखा है, ‘1975 में एनएसजी के गठन के बाद से ही स्पष्ट है कि सभी सदस्यों का एनपीटी पर हस्ताक्षर होना अनिवार्य है. यह संगठन का प्राथमिक सिद्धांत है. अभी भारत पहला देश है जो बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किए एनएसजी सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है.

यह चीन और अन्य एनएसजी सदस्यों के लिए सिद्धांत की सुरक्षा में भारत की सदस्यता का विरोध करना नैतिक रूप से प्रासंगिक है.’

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हाल के वर्षों में साफ दिखा है कि पश्चिम की दुनिया ने भारत को खूब शाबाशी दी है और चीन का विरोध किया है. भारत इनका दुलारा बन गया है.

हालांकि दक्षिण एशियाई देशों की जीडीपी चीन का महज 20 फीसदी है. पश्चिमी देशों की आंखों में चीन चुभता है. भारत की अंतरराष्ट्रीय चापलूसी इनके लिए सुखद है.

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