पहलू खान की हत्या गौतस्करी के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय मुस्लिमों में डर पैदा करने के लिए है

Apr 08, 2017
पहलू खान की हत्या गौतस्करी के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय मुस्लिमों में डर पैदा करने के लिए है

राजस्थान के अलवर में गौरक्षको के नाम पर पहलू खान की हत्या पुरे प्लानिंग के साथ की गयी है। ऐसा कहना है वहाँ के स्थानीय मेव समुदाय का, इस हत्याकाण्ड के पीछे अल्पसंख्यक समुदाय और वंचित वर्गो में डर पैदा करना था।

दरअसल, अलवर इलाका पूरा मेवात से जुड़ा हुआ हैं, जिसके कारण यहाँ पर ज्यादातर मुस्लिम आबादी मेव समुदाय की है जिनका पेशा ही है पशुपालन और खेती, इस बारें में अलवर मेव समुदाय के सिफ़त मैनेजर कहते हैं, दरअसल समुदाय को भयभीत करने का पूरी तैयारी थी। वे कहते हैं, आप सोच सकते हैं इस घटना से हमारे बच्चों में तरक्की पर कितना असर पड़ा होगा।

अलवर के सामाजिक कार्यकर्त्ता वीरेंद्र विद्रोही का कहना हैं, कि यह अल्पसंख्यक और वंचित वर्गो में डर पैदा करने के लिए ऐसा किया गया है। ये उन लोगों का काम है जो धर्म के आड़ में सियासत करते हैं। वहीँ मेवात क्षेत्र में लम्बे समय से शिक्षा का अभियान चला रहे नूर मोहम्मद कहते हैं, इस घटना से लोग बहुत डरे हुए हैं. मगर राहत की बात है कि बहुसंख्यक समाज के लोग मेव समुदाय के साथ खड़े हैं।

आप जिले की जनगणना के आंकड़े देखे तो पता चलेगा, इस क्षेत्र में मेव समुदाय के पास दस हजार गाएँ हैं। वे खेती और पशुपालन करते हैं। यह घटना एक प्लानिंग का हिस्सा है। मैनेजर का कहना हैं, 1990 -92 में देश के कई भागों में घटनाएँ हुई लेकिन इस क्षेत्र में शांति रही। कारण यही रहा है कि यहाँ के लोग सुलझे है।

नूर मोहम्मद बताते हैं कि इस बार भी मेव समाज के पांच लोगों ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा का मुख्य परीक्षा पास की है। लड़कियां आई आई टी तक पहुंची हैं और आगे पढ़ रही हैं। लेकिन इस घटना ने सबको हिला कर रख दिया है वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अलवर जिले में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी 14 प्रतिशत से ज्यादा है. अलवर और भरतपुर के मेवात क्षेत्र में 789 गावों में मेव बिरादरी के लोगों की अच्छी संख्या है. (बीबीसी इनपुट के साथ)

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