अलीगढ़ में मामूली विवाद ने लिया भीषण साम्प्रदायिक दंगे का रूप, पिता और पुत्र की मौत:देखे विडियो

Nov 01, 2016
अलीगढ़ में मामूली विवाद ने लिया भीषण साम्प्रदायिक दंगे का रूप, पिता और पुत्र की मौत:देखे विडियो

अलीगढ़ में दिवाली पर कस्बा कौड़ियागंज सांप्रदायिक बलवे की आग से सुलग गया। रविवार दोपहर को आतिशबाजी चलाते समय बाइक टकराने पर हुए बवाल में समुदाय विशेष के पिता-पुत्र की मौत हो गई। इलाक़े में शांति बनाये रखने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डेरा डाले हुए हैं और क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है |

पुलिस ने बताया कि 55 वर्षीय बुन्दू खान और उनका 17 वर्षीय बेटा मोहब्बत अलीगढ़ के कौड़ियागंज इलाके में पार्किंग को लेकर हुए विवाद में मारे गए हैं जबकि स्थानीय निवासियों के मुताबिक़ विवाद पटाखे फोड़ने को लेकर हुआ था। एसओ डॉ. विनोद के अनुसार घटनाक्रम की शुरुआत रविवार दोपहर ढाई बजे हुई। कस्बा निवासी किसान बुंदू खान (60) के मकान का निर्माण चल रहा है। वह अपने बेटे मोहब्बत (18) व मेहराज उर्फ मेहरुद्दीन (25) के साथ बाइक पर बालू-बदरपुर खरीदने जा रहे थे। बाइक मोहब्बत चला रहा था। वह मोहल्ला बेरिया में पहुंचे तो वहां आरामशीन संचालक धनीराम कश्यप के दरवाजे पर बच्चे व युवक आतिशबाजी चला रहे थे। धनीराम का आरोप है कि आतिशबाजी को देख मोहब्बत की बाइक बहक गई और उनके बेटे दिनेश को टक्कर मार दी।

उसने बताया कि जब वह वापस आया उसकी नाक से खून बह रहा था मालूम करने पर उसने बताया दिनेश के भतीजे कपिल ने उसे पीटा था | हम इसकी वजह जानने के लिए कपिल के घर गये लेकिन हमारी बात सुनने से पहले ही हमारे साथ मारपीट शुरू कर दी गयी | मैं भागने में कामयाब रहा लेकिन मेरे पिता और भाई नहीं भाग सके | हमें पता चला कि उन्हें दो घंटे तक बांस और पत्थरों से पीटा गया | यहां तक कि पुलिस भी उन्हें बचाने के लिए इस इलाक़े में आने की हिम्मत नहीं कर सकी |

इस बीच दोनों ओर से जमकर लाठी-डंडे चले और पथराव-फायरिंग भी हुई। कम संख्या में सिपाहियों संग पहुंचे चौकी इंचार्ज तक को उपद्रवियों ने पीटकर दौड़ा दिया। मीडियाकर्मियों को भी नहीं छोड़ा। घायलों को कई घंट तक घटनास्थल से नहीं उठने दिया। बाद में भारी पुलिस बल के बीच घायलों को मौके से निकाला गया और हालात काबू किए जा सके। डीएम राजमणि यादव ने शासन के नियमानुसार मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है।

एम-एसएसपी ने रात को कस्बे में ही कैंप किया और चेयरमैन आवास पर पंचायत के माध्यम से लोगों को शांत करने की कोशिश की। पोस्टमार्टम के बाद रात तीन बजे ही दोनों शव कस्बे में लाए गए। सुबह होते ही प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों के शव दफन कराने के प्रयास शुरू कर दिए। इस पर लोग आरोपियों की गिरफ्तारी व मुआवजे की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। जब बताया कि दो आरोपी हिरासत में हैं तो उन्हें मौके पर लाने की जिद होने लगी। जैसे-तैसे दोपहर तीन बजे लोगों को समझाकर शव दफन कराए गए। तनाव को देखते हुए जोन भर से दो दर्जन एसओ, एक कंपनी पीएसी, एक कंपनी आरएएफ तैनात कर की गई है। नामजद दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

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