प्रमुख स्वामी के रूप में पितातुल्य व्यक्ति को खो दिया: PM मोदी

Aug 16, 2016

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वामीनारायण पंथ के अगुवा प्रमुख स्वामी को याद करते हुए भावुक हो गये और उन्होंने कहा कि उन्होंने एक पितातुल्य व्यक्ति को खो दिया.

स्वामी का शनिवार को गुजरात के सारंगपुर में निधन हो गया था.
उनके साथ अपने करीबी संबंधों को याद करते हुए मोदी ने उन्हें अपना ‘‘पिता’’ बताया और एक मंदिर में यहां लगभग 20 मिनट के भाषण के दौरान दो बार भावुक नजर आए. इसी मंदिर में स्वामी का पार्थिव शरीर रखा गया है.
मोदी ने कहा, ‘‘आपमें से कई ने एक गुरू को खोया होगा लेकिन मैंने एक पिता को खो दिया.’’ इस पंक्ति को बोलने के बाद वह अपनी भावनाओं को काबू करने के लिए करीब एक मिनट तक रूके.
प्रधानमंत्री ने उन्हें ‘‘श्रेष्ठता और दिव्यता का संगम’’ बताते हुए कहा कि वह प्रमुख स्वामी को उस समय से जानते हैं जब वह सार्वजनिक शख्सियत नहीं थे. मोदी ने ‘‘संत’’ संस्कृति में सुधार लाने के लिए उनकी प्रशंसा की.
प्रमुख स्वामी महाराज का पार्थिव शरीर 17 अगस्त तक मंदिर में रखा जाएगा ताकि उनके अनुयायी और नागरिक उनके अंतिम दर्शन कर सकें.
मोदी ने सोमवार को उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किये.
प्रमुख स्वामी के साथ अपने ‘‘करीबी जुड़ाव’’ की कुछ घटनाओं को याद करते हुए मोदी ने कहा कि एकबार स्वामी ने उनसे अहमदाबाद के एक मंदिर में स्वामीनारायण पंथ के संतों के समूह को संबोधित करने के लिए कहा था जिस पर उन्होंने आश्चर्य जताते हुए पूछा था कि उन्हें (संतों) उनसे क्या प्राप्त होगा?
मोदी ने कहा, ‘‘जब मैंने प्रमुख स्वामी से यह कहा तो वह बोले, नहीं, संतों को सामाजिक वास्तविकता के बारे में पता होना चाहिए क्योंकि उन्हें सही दिशा में समाज के लिए काम करना है.’’
प्रधानमंत्री ने प्रमुख स्वामी को स्वामीनारायण पंथ में लाने वाले योगीजी महाराज को भी याद किया और कहा कि स्वामी ने एक उदाहरण तय किया कि शिष्य कैसा होना चाहिए.
मोदी ने कहा, ‘‘हम प्रमुख स्वामी को गुरू के रूप में जानते हैं. लेकिन उन्हें देखकर कोई यह भी समझ सकता है कि शिष्य कैसा होना चाहिए.’’
उन्होंने याद किया कि किस तरह प्रमुख स्वामी ने दिल्ली में यमुना नदी के किनारे अक्षरधाम मंदिर बनाकर अपने गुरू की इच्छा पूरी की.
मोदी ने कहा, ‘‘बहुत समय पहले, यमुना नदी के किनारे टहलते हुए योगीजी ने प्रमुख स्वामी के सामने यमुना के तट पर एक मंदिर बनवाने की इच्छा जताई थी. यह इच्छा अनौपचारिक रूप से व्यक्त की गई थी. उनके गुजर जाने के बाद एक शिष्य के रूप में प्रमुख स्वामी ने अक्षरधाम मंदिर बनवाकर उनकी इच्छा पूरी की.’’
मोदी ने कहा कि उनके गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद, प्रमुख स्वामी ने उनके भाषणों के वीडियो जो उन्होंने सुने थे, वे मंगाए और उन्हें फोन करके (उनके भाषणों में प्रयुक्त कुछ शब्दों के संदर्भ में) कहा कि, ‘‘आपको इन शब्दों को प्रयोग नहीं करना चाहिए था.’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘(प्रमुख स्वामी) ने मुझे ऐसी चीजें सिखाईं जो मुझे मेरे राजनीतिक गुरू तक ने नहीं सिखाईं.’’
मोदी ने कहा कि स्वामी अंतर्ज्ञान के जरिये उनके बारे में बहुत सारी चीजें जानते थे. उन्होंने स्वामी द्वारा उन्हें दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में इसके निर्माण के समय बुलाने की घटना याद की.
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रमुख स्वामी जानते थे कि उनके (मोदी) पास धन नहीं है और उन्होंने शिष्य ब्रहमबिहारी स्वामी से उन्हें धन देने को कहा.
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी जेब में वास्तव में उस समय धन नहीं था.’’
मोदी ने एक और घटना याद की जब वर्ष 1992 में प्रमुख स्वामी और उनकी (मोदी) मां ने उन्हें उस समय फोन किया था जब वह लाल चौक पर तनावपूर्ण स्थिति में तिरंगा फहराने के बाद जम्मू कश्मीर के श्रीनगर हवाई अड्डे पर थे.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘स्वामी ने आश्वस्त किया ‘स्वामीनारायण सब अच्छा करेंगे.’ उस तनाव में उनके फोन कॉल और उनके परवाह करने वाले शब्दों से मैं आश्चर्यचकित था. उस दिन मेरे पास दूसरा फोन मेरी मां का था.’’
मोदी ने दो साल पहले की वह घटना याद की जब वह स्वामी जी को भोजन करने के लिए मनाने में सफल रह थे. उनके एक शिष्य का उनके पास फोन आया था कि स्वामी ने कुछ खाना छोड़ दिया है और उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘उन्होंने मेरा अनुरोध मान लिया और मुझे बताया गया कि उन्होंने भोजन करना शुरू कर दिया है. हमारा ऐसा संबंध था.’’
मोदी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें ‘विजन 2020’ हासिल करने की दिशा में मुख्य व्यक्ति बताया था.
स्वामी का यहां बुधवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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