इस देश में दो तरह के कानून-शरीफ और गरीब के लिए अलग, गुंडे बदमाश और अमीर के लिए अलग…

May 12, 2016

देश में जितने भ्रष्टाचारी हैं। वे सभी या तो सांसद और विधायक हैं या फिर कोई न कोई महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं। आज तक देश में कितने भ्रष्टाचारियों को सजा मिल पाया है ?
देश में कितने बड़े बड़े घोटाले हो गए पर आज तक एक भी घोटाले बाज पकड़ में नही आये। नाही वे पकड़े जायेंगे नाही उन्हें सजा मिलने वाली है। क्यों की वे बड़े लोग हैं। उनके पास अकूत धन सम्पप्ति है। वे देश में कुछ भी करने को स्वतंत्र हैं। सजा तो उन्हें मिलनी है जो बिचारे लाचार हैं। जिनके पास रूपये पैसों का आभाव है। जो कमजोड़ किस्म के लोग हैं। जो असहाय हैं। जिनका कोई मददगार नही। यही देखने को मिला जब मै मंगलवार 01/12 को सुबह 09 बज कर 15 मिनट पर झारखण्ड के चन्द्रपुर स्टेशन से पटना जाने के लिए पटना हटिया सुपर फास्ट ट्रेन पकड़ा। ट्रेन जैसे ही झारखण्ड के कोडरमा प्लेटफार्म पर रुकी, दो GRP वाले लगभग 18 से 20 वर्ष के दो निहायत ही गरीब लड़कों को हाँथ में हाथकड़ी और कमर में रस्सा लपेटे लगभग धकियाते हुए उन्हें ट्रेन की बोगी में खिंच लाये। पूछने पर GRP वालों ने हेंकड़ी झाड़ते हुए बताया की ये लोग बिना टिकट ट्रेन में सफर कर रहे थे। इनका चलान कर दिया गया है। इन्हें बिहार के गया जिले में मजिस्टेट के सामने पेश किया जायेगा। उनका कुसूर बस इतना भर था। की उनके पास टिकट नही थे। तो क्या मात्र बिना टिकट सफर केलिए इतनी बड़ी सजा ?
क्या बिना टिकट सफर करना इतना बड़ा गुनाह है ?
जिसके लिए उन बिचारों को GRP द्वारा हथकड़ी लगा कर घसीटा जाये और उसके साथ मार पिट किया जाये। ये तो कोई इंसाफ नही। उनके साथ GRP वालों द्वारा जो ब्यौहार किया गया। सिर्फ इसिलिय ना के वे बिचारे गरीब थे। असहाय थे। कमजोड़ थे। उनकी सहायता करने वाला कोई नही था। यदि उनके पास यात्रा करने लायक पैसे होते तो क्या वे टिकट नही खरीद लिए होते। कौन है इसका जिम्मेदार ?
65-70 वर्ष हो गए हमारी आज़ादी को पर आज भी हम इतने सबल नही की मामूली ट्रेन का एक टिकट भी खरीद सकें।
वे GRP वाले इतने बत्तमीज थे के बार बार उन लड़को को ट्रेन में ही मार पिट रहे थे। एक मामूली गलती केलिए इतनी बड़ी सजा ये तो कोई न्याय नही। ये तो कोई इंसाफ नही हुआ। यदि वे लड़के जेल जा कर कोई गलत रास्ता अख्तियार कर लेंगे तो इसकी जिम्मेदारी लेगा कौन ? एक मामूली गलती पर उन लड़कों के साथ जो सुलूक किया गया। वो असभ्यता का बिलकुल नमूना था। देश में इस तरह का ब्यौहार किसी के भी साथ नही होनी चाहिए।
ये तो हमारे देश वासिओं को समझना होगा की आम लोगों की एक मामूली सी गलती को भी माफ़ नही किया जाता। और दूसरी तरफ देश को लूटने वाले और देश के साथ गद्दारी करने वालों को कोई सजा नही मिलती आखिर क्यों।
क्या यही मानने केलिए पर्याप्त सुबूत नही है। की देश में दो तरह के कानून है। एक आम लोगों केलिए जो उसकी जड़ा सी गलती पर उसे सजा देने को उत्तरु रहता है।
और एक तरफ वे लोग हैं। जो देश को गिरवी भी रख दें। फिर भी सजा देना तो दूर की बात है। उनकी तरफ कोई ऊँगली भी नही उठा सकता। यही है हमारे देश का कानून। गरीबों केलिए अलग अमीरो केलिए अलग।

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