अमेठी प्रशासन से दुखी हो गए है, ग्रामीण वासी, प्रशासन मूक दर्शक बना नारा नहीं, गाय को चारा चाहिये I

May 10, 2016

अमेठी जनता की समस्या का समाधान हो , सभी प्रसासनिक अधिकरियो के मोबाइल पर सुनाई देता और प्रशासनिक प्रचारों में दिखाई देता है इसकी विपरीत प्रशासन की अनदेखी से रसूख व प्रभावशाली लोगो से तहसील के चारागाह पर कब्ज़ा कर लिया है I गरीब और अल्पसंख्यक के लिए आवंटित चारागाह को भी नहीं छोड़ा, प्रशासन की मिली भगत से चारागाह का अवेध रूप से पट्टा कर दिया था , भूमि अधिनियम के तहत सार्वजानिक भूमि का पट्टा नहीं हो सकता गरीब सिर्फ मायूसी के बीच में इन्साफ की आशा में अधिकारियो के चक्कर लगते रहे है इन्साफ से आज तक वंचित है

ऐसा लगता है की गाय हमारी माता है किताबो के पन्नो में खो जाता है I गाय के मुद्दे पर सब राजनितिक पार्टिया रोटी सेक लेते है I लेकिन ग्रंथो में माँ का दर्जा प्राप्त बेजुबान मवेशी खाने के स्त्रोत पर पिछले दो साल से गाज गिर चुकी है पर किसी भी राजनितिक दल ने आगे आकर मदद करने की कोशिश नहीं की I
क्या है मामला

ग्रामीणो की दर्जनों शिकायत बाद भी प्रशासन खाली कराने में अस्मर्थ रहा है,तहसील सूत्र के अनुसार डेहरा ग्राम ,तहसील-अमेठी में लगभग 9 बीघा की भूमि चिन्हित है रसूख दारो और अधिकारियो की मिलीभगत से तथ्यों को छुपा कर मेड बाँध दिया गया है भूमि अधिनियम के मुताबिक चारागाह की भूमिं पर किसी भी प्रकार का निर्मार्ण कार्य व अन्य काम नहीं किया जा सकता

आर.टी.आई. मांगी गयी

मामले को तूल पकडते देखा, तो शुरुआती दोर में आर.टी.आई. मांगी गयी, जिसका जवाब आज तक जवाब नहीं मिला, इसका मतलब पट्टा संदेह जनक प्रतीत होता है I

माननीय मुख्यमंत्री के माध्यम से शिकयत पत्र, ऑनलाइन द्वारा

मामले को तूल पकड़ते देखा मुख्यमंत्री ऑफिस से सिकायत की गयी, लेकिन प्रशासन ने मुख्यमंत्री के माध्यम से भी गोल मोल जवाब प्राप्त हुआ उसमे ये नहीं दिखाया किस प्रकार की भूमि चारागाह ,कब्रिस्तान,शमशानघाट और तालाब चिन्हित नहीं दिखाया यहाँ दाल पूरी काली है I

रिपोर्टो और आदेशित मीटिग की अनदेखी ,नियम,क़ानून और नोटिस,की धज्जिया उड़ा कर रख दी

मामले की जांच करने पर पता चला पट्टा हो चूका था , लेखपाल की और से सम्बंधित विभाग को रिपोर्ट सौपी थी ,उच्च न्याय्याल्या लखनऊ खंडह पीठ 15 मई 2013 और राजस्व विभाग 6 दिसम्बर 2013 को नोटिस देकर मोके पर खाली और दोषी अधिकारियो के खिलाफ उचित कार्यवाही करने का भी आदेश दिया है और s.d.m. ने नही आदेश दिया था पुलिस बल के साथ मोके पर खाली कराया जाए I
A.D.M. ने भी लिखित आदेश दिया था की S.D.M. को खाली करने से पहले और खाली होने के बाद वीडियोग्राफी के साथ दस्तावेज उच्च न्यायायलय में भेजे जाए I
S.D.M.के अनुसार जमीन का पट्टा हुआ था साथ में ये भी माना नियम के विरुद्ध भाई ये रेपर्ट एक बार नहीं तीन बार लेखपाल द्वारा सम्बंधित अधिकारियों को सोंपी गयी है प्रश्न चिन्ह लगा दिया गया है S.D.M. द्वारा

प्रश्न चिन्ह लगी जमीन इस प्रकार खाली होती है

राजस्व विभाग द्वारा प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश ,किशन अटोरिया ने अपने पेज नंबर 4 प्रपत्र क्रमश 20 में स्पस्ट किया है की पेज नंबर 5 पैराग्राफ नंबर 7 में क,ख,ग,घ, से ज्ञान हुआ है की ग्राम समाज की संपत्तियों का स्थानीय सत्यों तथा उसपे कब्ज़ा हटाने का कार्य मोके पर किया जाए I

प्रमिख सचिव उत्तर प्रदेश एक अभियान चलने के लिए सही मंडल को प्रेषित किया था I उसमे ये बताया गया था प्रश्न चिन्हत पट्टे को खाली कराकर, उसके दस्तवेज और वीडियोग्राफी किलीप उच्च न्यायालय में जमा किया जाए I

गाव वालो का कहना है की जमीन गाव के निकटतम स्थान पर है वह पर अपने पशुओ को चारा चराने ले जाते थे , कोई ओर जगह ना होने के कारण कानुन के नुमाइंदे के आगे हाथ फैलाने को विवश है I और सामने आकर विरोध करने पर दुसरे पक्ष वाले धनी व्यक्ति कानुन को पैसे के दम पर अपनी जेब में रखने की धाक देते है I और जान माल के नुक्सान पहुचाने की धमकी भी देते है I

केन्द्रीय सरकार अल्प संख्यक को भी चिट्ठी लिखी I उसका जवाब आजतक नहीं मिला ,

दबंगों और अधिकारी मिल कर गाय का चारा खा गए,

यह है कि प्रश्न चिह्न उपजिलाधिकारी द्वारा लगाया गया है उत्तर सरकार कार्यालय सूचना (नोटिस) के अनुसार मोके पर निरास्त होना था पट्टे पर गंभीर सवाल खड़े होते है, फर्जीवाडा पट्टा है उपजिलाअधिकारी से. चारागाह की जमीन गाटा सखया नंबर 948/0.066 के संदर्भ में जनसूचना का अधिकार माँगा है अभी तक जवाब प्राप्त नहीं हुआ है सम्पूर्ण कार्य के लिए, श्री प्रमुख सचिव सी. बी पालीवाल जी के नोटिस अनुसार, सवेर्जनिक भूमि चारागाह पट्टा, निरस्तीकरण से पहले विडियोग्राफी करवाने की लिए, उपरोक्त चारागाह गाटा नंबर- 948/0.066 ग्राम डेहरा, तहसील अमेठी,

भ्रष्टाचार किया हैसरकार नोटिस के अनुसार अमेठी प्रशासन ने, स्थगन आदेश जब लेने आये थे, तो सरकार कार्यालय नोटिस ( राजस्व विभाग और उच्च न्यायालय) क्यों नहीं दिखाए, कि में नहीं दे सकता, स्थानीय प्रशासन के सहयोग से 03/09/2014 को स्थगन आदेश भी प्राप्त कर लिया, , जिसका डायरी नंबर 5336 दिनांक 21/08/2014 है स्थानीय पुलिस अपनी कारवाही करनी थी, इसी मध्यानतर स्थानीय प्रशासन के सहयोग 03/09/2014 से स्थगन आदेश भी प्राप्त कर लिया,

मुझ द्वारा अमेठी प्रशासन को एक-एक प्रेषित पत्र कार्यालय नोटिस के अनुसार लगता है कि भ्रष्टाचार का शिकार है, और जनसुचना का अधिकार प्राप्त नहीं हुआ,

गाय, भैंस व बकरी इत्यादि जानवर को चारा मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है

उपजिलाधिकारी और लेखपाल द्वारा बनाई गई पट्टे की रिपोर्ट में स्पषटीकरण हो गया है पट्टा अधिकारियो को हमवार करते किया गया है ! इसका मतलब क़ानून का हवाला दे कर पट्टा नहीं किया था, और पट्टा निरस्तीकरण अभी तक नहीं किया है उपजिलाधिकारी द्वारा बनाई रिपोर्ट पर जमीन खाली नहीं हो रही तो भाषटाचार और संकेत जाता है

प्रश्न चिह्न उपजिलाधिकारी द्वारा लगाया गया है
उत्तर प्रदेश सरकार कार्यालय सूचना (नोटिस) के साथ
नोट- समस्त कार्यालय सूचना (नोटिस) और प्रेषित पत्र आपको भेज रहा हु श्री प्रवेन्द्र सिंह अनु सचिव का ( कार्यालय ज्ञाप ) नोटिस संख्या-2095(1) o6 दिसम्बर 2013 (पेज न. 05 क,ख,ग,घ,) गम्भीरता से एक-2 शब्द और कार्यालय सूचना (नोटिस) अवयस्क पढे !
समस्त कार्यालय सूचना (नोटिस) आपको भेज रहा हु इस (पेज न. 06 क,ख,ग,घ,) गम्भीरता से ले कर ग्रामीण वासी को सावेर्जनिक भूमि कब्ज़ा हटवाने ओर देनिक समाचार में निकलवाने में मदद करेंगे ,

एक चिठ्ठी केंद्र सरकार को लिखी उसका जवाब आज तक नहीं आया है करप्शन का मुद्दा है

(जैनुल हक)

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