अमेरिका को भारत की सुरक्षा चिंताओं का एहसास है: व्हाइट हाउस

Apr 05, 2016

परमाणु जखीरे में कटौती की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मांग पर भारत की आलोचना के बाद अब व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका को भारत जैसे अपने निकट सहयोगियों की सुरक्षा चिंताओं का एहसास है.

इसके साथ ही, व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि वह दक्षिण एशिया में परमाणु और मिसाइल विकास और परमाणु जखीरे पर ओबामा की चिंताओं का समर्थन करता है.

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जोश अर्नेस्ट ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ”दक्षिण एशिया में परमाणु एवं मिसाइल विकास को लेकर हमें जो चिंताएं हैं राष्ट्रपति की टिप्पणी उनसे प्रेरित थीं. हम हथियारों के बढते जखीरे, विशेष रूप से युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किए गए गैर-सामरिक परमाणु हथियारों से सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं.”

उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां चिंता का विषय हैं क्योंकि उनके आकार और तैनाती की जरूरत के कारण उन के चोरी होने का खतरा है. इन छोटे हथियारों के मद्देनजर भारत और पाकिस्तान के बीच किसी पारंपरिक युद्ध में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल भी होने का खतरा बढ़ गया है.

अर्नेस्ट ने कहा कि हाल में आयोजित हुए परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन का मकसद परमाणु हथियारों से रहित विश्व का निर्माण करना है.

उन्होंने कहा, ”हम निश्चित रूप से उन राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के प्रति खास तौर पर चिंतित हैं और हमें उनका एहसास है जो भारत जैसे अमेरिका के निकट सहयोगी जता रहे हैं. और ऐसा कहते हुए, हमारा मानना है कि इस दिशा में आगे बढने से केवल अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा ही नहीं बढेगी बल्कि इससे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा भी बढ़ेगी.”

अर्नेस्ट ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने किसी भी तरह के गैर-सामरिक परमाणु हथियार पर नियमित रूप से चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा, ”हमें उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार से क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और खुशहाली की संभावनाओं में जबरदस्त इजाफा हो सकता है. यह महत्वपूर्ण है और अमेरिका ने दोनों देशों से यह बात कही है कि दोनों पड़ोसियों के बीच निरंतर और लचीली वार्ता होनी चाहिए.”

अर्नेस्ट ने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में सभी पक्षों को अधिकतम संयम बरतने और तनाव कम करने की दिशा में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है.

उन्होंने कहा, ”स्वाभाविक रूप से दोनों देशों के साथ अमेरिका की जो साझेदारी है हमे उससे फायदा होता है. हम इसको अहमियत देते हैं और यही वजह है कि हम भारत और पाकिस्तान दोनों में अपने साझेदारों के समक्ष बात रखते हैं कि इन दो देशों के बीच तनाव घटाना प्राथमिकता है.”

ओबामा ने शुक्रवार को दक्षिण एशिया, खासतौर पर भारत और पाकिस्तान को उस क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया था जहां परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति करने और परमाणु हथियार कम करने की जरूरत है.  भारत ने ओबामा की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया जताई है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने नई दिल्ली में कहा, ”ऐसा लगता है कि भारत की रक्षा जरूरतों की समुचित समझ का अभाव है. भारत ने किसी भी पड़ोसी के खिलाफ कभी सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं की है. इसके साथ ही, परमाणु हथियार का इस्तेमाल पहले नहीं करने की हमारी नीति है.”

स्वरूप ने कहा, ”चूंकि संदर्भ परमाणु सुरक्षा सम्मेलन था, राष्ट्रपति ओबामा की अपनी ही टिप्पणी वैश्विक चिंता की ओर ध्यान केंद्रित करने वाली है कि ‘कुछ देशों में ज्यादा संख्या में छोटे गैर-सामरिक परमाणु हथियारों के साथ परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ रहा है जिसके चोरी होने का अधिक खतरा है.”’

अर्नेस्ट ने कहा, ”मैं कह सकता हूं कि ये मुद्दे हैं जिन्हें हमने दोनों देशों के समक्ष सीधे उठाया है. हमारे पास देशों के साथ वार्ताओं की ढेर सारी सूचना नहीं है. लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि यह एक विचार है जिसे हमने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ सीधे उठाया है.”

व्हाइट हाउस ने कहा कि उसे भारत की सुरक्षा चिंताओं और दुनिया के इस हिस्से में उसकी अनूठी अवस्थिति की जानकारी है.  अर्नेस्ट ने कहा, ”अमेरिका-भारत रिश्तों और 21वीं सदी की अहम साझेदारियों में से एक को विकसित करने के प्रति अमेरिका वचनबद्ध है. और इसमें सामरिक सुरक्षा वार्ता चलाना शामिल है जो भारत की मंशा और रक्षा आवश्यकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान करने और ऐसे मुद्दों पर चर्चा करने का एक समर्पित माध्यम प्रदान करता है जो सामरिक स्थिरता से जुड़ा हो सकता है.”

 

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