राज्यसभा में मैटरनिटी लीव संशोधन बिल पास, महिलाओं को मिलेगी 26 सप्ताह की छुट्टी

Aug 12, 2016

सरकारी और संगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को 26 सप्ताह का प्रसूता अवकाश करने वाले प्रसूति प्रसुविधा (संशोधन) विधेयक 2016 को गुरुवार को राज्यसभा ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी.

सदन में लगभग दो घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने कहा कि संगठित क्षेत्र में महिलाओं को सबसे अधिक प्रसूता अवकाश देने वाला भारत तीसरा राष्ट्र बन जाएगा. प्रसूता महिलाओं को कनाडा में 50 सप्ताह और नार्वे में 44 सप्ताह का अवकाश प्रदान किया जाता है. फिलहाल में देश में प्रसूता महिलाओं को 12 सप्ताह का सवैतनिक अवकाश दिया जाता है.

इससे लगभग 18 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा लेकिन सेरोगेट मदर को यह सुविधा नहीं मिलेगी. दत्तात्रेय ने कहा कि इसके अलावा प्रसूता महिलाओं को 3500 रुपए भी दिए जाएगें.

उन्होंने कहा कि प्रसूता अवकाश बढ़ने से मां और बच्चे को बेहतर जीवन मिलेगा. उन्होंने विधेयक के अन्य प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा कि कम से कम 50 कर्मचारियों वाले संस्थान को शिशु गृह (क्रेच) स्थापित करना अनिवार्य होगा. महिला अपने बच्चे से मिलने दिन में चार बार जा सकेंगी. संबंधित कानूनों का प्रावधान नहीं करने वाले नियोक्ता को एक वर्ष तक की जेल हो सकती है.

उन्होंने कहा कि 26 सप्ताह के प्रसूता अवकाश का लाभ दो बच्चों तक लिया जा सकता है. यह लाभ अधिकृत माता और दत्तक माता को मिलेगा लेकिन सेरोगेट मदर इसकी हकदार नहीं होगी.

इससे पहले सदन में इस विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुये कांग्रेस की रजनी पाटिल ने कहा कि इस विधेयक से 18 लाख महिला कर्मचारियों को लाभ होगा और भारत दुनिया के उन 40 देशों में शामिल हो जायेगा जहां महिला कर्मचारियों को 18 सप्ताह से अधिक का अवकाश मिल रहा है.

उन्होंने कहा कि बच्चो के पालन पोषण का काम सिर्फ महिलाओं का नहीं होता है इसलिए संबंधित बच्चे के पिता को भी पितृत्व अवकाश मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब 12 सप्ताह का अवकाश है तब निजी क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों से मातृत्व के बारे में पूछा जाता है और उस आधार पर भेदभाव किया जाता है.

तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने भी पितृत्व अवकाश का भी प्रावधान किये जाने की मांग करते हुये कहा कि बच्चों का पालन पोषण का जिम्मा सिर्फ महिलाओं पर नहीं छोडा जाना चाहिए. जनता दल यू की कहकंशा परबीन ने भी पितृत्व अवकाश दिये जाने की मांग करते हुये कहा कि इसके कानून बनने पर शिशु मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी क्योंकि नियोक्ताओं को शिशु कक्ष बनाने का प्रावधान किया जा रहा है.

वामपंथी तपन कुमार सेन ने कहा कि जो संशोधन किये जा रहे हैं उसका लाभ कर्मचारियों मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी 12 सप्ताह के अवकाश का लाभ मात्र 30 प्रतिशत महिला कर्मचारियों को ही मिल रहा है. उन्होंने आशंका जतायी कि इस अवकाश में बढोतरी किये जाने के बाद निजी क्षेत्र में महिलाओं की भर्ती पर विपरीत असर पड़ सकता है.  उन्होंने कहा कि इसके लागू होने पर निजी क्षेत्र में महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और इसकी निगरानी की जानी चाहिए.

अन्नाद्रमुक की विजला सत्यनाथ ने कहा कि तमिलनाडु में पहले से ही 26 सप्ताह का अवकाश दिया जा रहा है और अब इसे बढाकर 39 सप्ताह करने पर विचार किया जा रहा है. इसके साथ ही अन्य सभी महिलाओं को गर्भकाल, प्रसव और उसके बाद तीन बार में 12 हजार रुपये की वित्तीय मदद भी दी जा रही है. केन्द्र सरकार को तमिलनाडु के इस कानून को पूरे देश में लागू करना चाहिए.

चर्चा में बीजू जनता दल की सरोजिनी हेमब्रम, बहुजन समाज पार्टी के अशोक सिद्धार्थ, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा, कांग्रेस की वांसुक सियेम, कांग्रेस नरेंद्र बुढानिया, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चौहान, नामांकित अनु आगा, समाज वादी पार्टी के जया बच्चन और बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा ने भी हिस्सा लिया.

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

 

 

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>