मप्र में किसानों की हड़ताल से आमजन बेहाल, धार में आगजनी

Jun 02, 2017
मप्र में किसानों की हड़ताल से आमजन बेहाल, धार में आगजनी

मध्य प्रदेश में किसानों की हड़ताल के दूसरे दिन मालवा-निमांड अंचल में न सिर्फ दूध और सब्जियों की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई, बल्कि उनकी कीमतें भी बढ़ गईं। हालात इतने बिगड़ गए कि कई स्थानों पर दूध व सब्जियों के बिक्री स्थल पर पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। धार के सरदारपुर कस्बे में आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि झड़प में कई लोग घायल हो गए। राज्य के किसान कर्ज माफी, फसलों के उचित दाम सहित कई अन्य मांगों को लेकर गुरुवार से हड़ताल पर हैं। 10 दिवसीय हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार से ही हालात बिगड़ने लगे। बाजारों तक सब्जी और घरों तक पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं पहुंच पाया, जिसके कारण कई जिलों में लोगों को दूध के लिए परेशान होना पड़ा।

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प्रदेश की राजधानी भोपाल में हड़ताल से दूध की आपूर्ति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, लेकिन सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे उनकी कीमतें बढ़ गई हैं।

मालवा-निमांड अंचल के धार, इंदौर, खंडवा, उज्जैन, शाजापुर, खरगोन, आगर-मालवा, मंदसौर, झाबुआ आदि में किसान दूसरे दिन भी सड़कों पर उतरे। धार के सरदारपुर में किसान और व्यापारियों के बीच तीखी झड़प हो गई, जिस दौरान छह दोपहिया वाहनों में आग लगा दी गई, जबकि मारपीट में कई लोग घायल हुए।

मंदसौर में किसानों ने दूध को सड़कों पर बहाया, वहीं सब्जी को मंडी तक नहीं पहुंचने दिया। ऐसा ही नजारा खंडवा में भी देखने को मिला। इंदौर की मंडियों में सब्जी कम मात्रा में पहुंचीं।

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किसानों ने विरोध में आगरा-मालवा की सड़कों पर दूध बहाया और सब्जियों को शहर तक नहीं जाने दिया। उज्जैन की मंडी और इंदौर में दूध की दुकानों पर पुलिस तैनात करना पड़ा ।

इंदौर के पुलिस उपमहानिरीक्षक हरिनारायण चारी मिश्रा ने आईएएनएस को बताया, “आम लोगों को परेशानी न हो इसके लिए मंडी में देर रात तक और सुबह से ही पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा, दूध की दुकानों पर किसी तरह की अव्यवस्था न फैले, इसके लिए भी पुलिस के जवान मदद कर रहे हैं।”

हड़ताल के दूसरे दिन ही सब्जियों के दाम दोगुने हो गए, क्योंकि गांवों से मंडियों तक सब्जियां पहुंच नहीं पाईं। इसके अलावा दूध की भी किल्लत हो गई है। इसके बावजूद, किसानों के आंदोलन को लेकर सरकार की ओर से किसी तरह की पहल नहीं की गई है। सरकार के मंत्री इस आंदोलन को मुट्ठी भर लोगों का आंदोलन बताने पर तुले हैं।

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वहीं, विरोधी दल कांग्रेस ने किसानों के खिलाफ की जा रही दमनात्मक कार्रवाई का विरोध करते हुए किसानों की मांग मानने की अपील की है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कहना है कि सरकार को किसानों के नाम पर कृषि महोत्सव, ग्रामोदय अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च करने की बजाय उनका हक दिलाने की पहल करनी चाहिए।

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