योगी राज में एक पिता बेटे के शव को कंधे पर घर ले जाने को मजबूर नहीं मिली एम्बुलेंस

May 02, 2017
योगी राज में एक पिता बेटे के शव को कंधे पर घर ले जाने को मजबूर नहीं मिली एम्बुलेंस

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार आते ही कई ताबड़तोड़ फैसले लिए गए। एंटी रोमियो स्क्वाड के बनने से लेकर किसानो की कर्ज माफ़ी तक। लेकिन कुछ ऐसे विभाग अभी भी है जहाँ योगी सरकार को सख्ती की जरुरत है। इनमे सरकारी अस्पतालों की हालत और प्रशासन सुधारना के बहुत बड़ी चुनौती है।

हालाँकि हर सरकार के आगे स्वास्थ को लेकर चुनौती रहती है। जिसमे बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए मुफ्त एम्बुलेंस सेवा की सुविधा दी जा रही है लेकिन अस्पताल प्रशासन की मनमर्जी की वजह से इस सुविधा का लाभ जरुरत मंदों को नही मिल पा रहा है। इसका ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के इटावा में देखने को मिला। जहाँ एक पिता मजबूर होकर अपने बेटे का शव सिर्फ इसलिए कंधे पर उठाकर घर ले जाना पड़ा क्योकि अस्पताल वालो ने एम्बुलेंस देने से मना कर दिया।

आपको उड़ीसा के दानी मांझी की तस्वीर तो याद ही होगी जिसने पुरे देश को हिला कर रख दिया था। जो अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठाये पैदल चल रहा था। कुछ ऐसी ही तस्वीर इटावा में भी देखने को मिली।

दरअसल इटावा से 7 किलोमीटर दूर एक गाँव में रहने वाले उदयवीर के 15 वर्षीय बेटे पुष्पेन्द्र के पैरो में दर्द था इसलिए वो अपने बेटे का इलाज कराने इटावा के जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर्स ने बिना देखे उसके बेटे को मृत घोषित कर दिया और जल्द से जल्द अस्पताल से चले जाने के लिए कहा।

उदयवीर का आरोप है की पुष्पेन्द्र को बिना देखे ही डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। अस्पताल के इस व्यवहार से उदयवीर ने अपने बेटे के शव को अपने कंधे पर रख कर अस्पताल से चल दिए। उनका आरोप है की अस्पताल प्रशासन ने बेटे को शव को गाँव ले जाने के लिए एम्बुलेंस देने से भी मना कर दिया।

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