इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद, योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री रहते जेल जाने वाले होंगे पहले व्यक्ति

Apr 05, 2017
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद, योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री रहते जेल जाने वाले होंगे पहले व्यक्ति

रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच के महासचिव राजीव यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा योगी आदित्यनाथ के खिलाफ साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने के आरोंपों की जांच के लिए 153 (ए) के तहत अनुमति नहीं देने पर सरकार को जवाब तलब करने का स्वागत किया है। मंच ने उम्मीद जताई है कि इस संगीन आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सजा होगी और योगी मुख्यमंत्री के बतौर जेल जाने वाले पहले व्यक्ति होंगे।

वाच डॉग में छपी खबर के अनुसार, रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता परवेज परवाज और असद हयात की याचिका पर 2007 में गोरखपुर में हुए मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक हिंसा की जांच मामले पर अदालत द्वारा राज्य सरकार से योगी और अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीसीआईडी जांच के लिए 153 (ए) के तहत अनुमति नहीं दिए जाने पर राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए तीन हफ्तों के अंदर रिपोर्ट माँगी है।

महासचिव कहा कि पिछले दो साल से अखिलेश सरकार इस मामले में जांच की अनुमति नहीं देना साबित करता है कि अखिलेश अपने पिता मुलायम सिंह यादव की तरह ही संघी तत्वों को अदालती कार्यवाईयों से बचाने के नक्शे कदम पर कायम है।

रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने बताया कि 27 जनवरी 2007 की रात गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर योगी आदित्यनाथ ने विधायक राधामोहन दास अग्रवाल और गोरखपुर की मेयर अंजू चौधरी की मौजूदगी में हिंसा फैलाने वाला भाषण देते हुए ऐलान किया था कि वो मुहर्रम में ताजिया नहीं उठने देंगे और खून की होली खेलेंगे।

इस भाषण के बाद भीड़ ‘कटुए काटे जाएंगे, राम राम चिल्लाएंगे’ के नारों के साथ मुसलमानों की दुकानें फूंकी। इसके साथ ही गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज, बस्ती, संत कबीरनगर और सिद्धार्थनगर में योगी के वजह से मुस्लिम विरोधी हिंसा हुई थी। जिसमें मुसलमानों की करोड़ों की सम्पत्ति का नुकसान हुआ था, एफआईआर तक दर्ज नहीं किया गया। जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं परवेज परवाज और असद हयात द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिट पिटीशन दायर कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। लेकिन अदालत ने उसे खारिज करते हुए सेक्शन 156 (3) के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया। जिसके बाद सीजेएम गोरखपुर की कोर्ट में एफआईआर दर्ज कराने के लिए गुहार लगाई गई। जिस पर कुल 10 महीने तक सुनवाई चली और बाद में मांग को खारिज कर दिया गया। जिसके खिलाफ फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई। तब जाकर इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी।

एफआईआर के दर्ज होने के बाद योगी के साथ देने वाली अंजू चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर और जांच पर स्टे ले लिया था। जिसके बाद 13 दिसम्बर 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने अंजू चौधरी की एसएलपी को खारिज कर दिया और जांच के आदेश दे दिए। लेकिन सीबीसीआईडी की इस जांच के लिए अखिलेश सरकार ने अपने जांच अधिकारी को अनुमति ही नहीं दी और मामला रुका रहा।

यादव ने कहा है कि अगर अखिलेश सरकार ने जांच की अनुमति दे दी होती तो आज योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री आवास में नहीं बल्कि जेल की सलाखों के पीछे अपने सजा काट रहे होते। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

राजीव यादव ने कहा लेकिन अब रिहाई मंच को पूरी उम्मीद है कि गोरखपुर दंगे के आरोपी षड़यंत्रकर्ता और मास्टरमाइंड योगी आदित्यनाथ के मुकदमे में न्यायपालिका उनके साथ न्याय करते हुए उन्हें सजा सुनाएगी और योगी मुख्यमंत्री रहते हुए जेल जाने वाले पहले व्यक्ति बनेंगे।

गौरतलब है कि 26 जनवरी 2007 को गोरखपुर में एक महिला से छेड़छाड़ कर रहे थे। पुलिस ने आरोपी लड़कों को गिरफ्तार करना चाही लेकिन मोहर्रम के जा रहे जुलूस का फायदा उठाकर भीड़ में शामिल हो गए। इसी बीच मोहर्रम के जुलूस में कही से फायरिंग हो गई। जिसमे एक लड़के की मौत हो गयी थी। कई लोग घायल हो गये थे। इसके बाद इलाके में साम्प्रदायिक तनाव फ़ैल गया था।

पत्रकार का दावा है की उसके पास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से दिए गए भड़काऊ भाषण की वीडियो फुटेज है जो उन्होंने कर्फ्यू लगे होने के दौरान दिए थे। इस दौरान योगी के साथ उस मौके पर मौजूद गोरखपुर एमएलए राधामोहन दास अग्रवाल, बीजेपी राज्य सभा एमपी शिव प्रताप शुक्ला, मेयर अन्जु चौधरी और पूर्व बीजेपी एमएलसी वाई डी सिंह भी मौजूद थे।

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