बेटियों के बिना सबका घर है सूना, मत समझों इन्हें अभिशाप..

Jan 28, 2017
बेटियों के बिना सबका घर है सूना, मत समझों इन्हें अभिशाप..
भारत की यह एक बहुत ही बड़ी विडंबना है कि यहां हम बालिकाओं का तो कन्या-पूजन जैसे धार्मिक अवसरों पर पूजन करते हैं। लेकिन जब खुद के घर बालिका जन्म लेती है तो माहौल मातम सा बना लेते हैं। यह हालात देश के हर हिस्से में हैं। खासकर हरियाणा और राजस्थान के हालात तो और भी बदतर हैं।
कुछ रूढ़िवादी मानसिकता के लोग बच्चियों को अभिशाप तक मानते हैं। कन्याओं को अभिशाप मानने वाले यह भूल जाते हैं कि वह उस देश के वासी हैं जहां देवी दुर्गा को कन्या रूप में पूजने की प्रथा है। वह भूल जाते हैं कि वह उस देश के नागरिक हैं जहां रानी लक्ष्मीबाई जैसी विरांगनाओं ने समाज के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। जो लोग कन्याओं को बोझ मानते हैं उन्हें ही सही राह दिखाने व कन्या-शक्ति को जनता के सामने लाने के लिए प्रतिवर्ष 24 जनवरी को राष्ट्रीय कन्या दिवस मनाया जाता है।
आज की बालिका जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, चाहे वो क्षेत्र खेल हो या राजनीति, घर हो या उद्योग। स्वस्थ और शिक्षित कन्याएं आने वाले समय की मुख्य जरूरत हैं। उच्च शिक्षा हासिल करके ही कन्याएं पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं। इसलिए कन्याओं को शिक्षा का हक दिलाना देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
घट रही हैं कन्याओं की संख्या
अपने देश में अगर लिंग अनुपात देखा जाए तो बेहद निराशजनक स्थिति देखने को मिलती है। 2011 में हुई जनगणना के हिसाब से अपने देश में 1000 पुरूषों पर 940 लड़कियां हैं। यह आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर औसतन हैं। अगर राजस्थान और हरियाणा जैसे प्रदेशों की बात करें तो वहां हालात बेहद भयावह हैं। पंजाब में 893, राजस्थान में लिंग अनुपात 877 है।
क्यो होती हैं कन्या भू्रण हत्याएं
एक पत्रिका में छपे अध्ययन के अनुसार वर्ष 1980 से 2010 के बीच कन्या भू्रण हत्या की संख्या 42 लाख से एक करोड़ 21 लाख के बीच रही। वहीं सेन्टर फॉर सोशल रिसर्च का अनुमान है कि बीते बीस वर्ष में भारत में कन्या भू्रण हत्या के कारण एक करोड़ से अधिक बच्चियां जन्म नहीं ले सकीं। भारत में एक मानसिकता है कि बेटे संपत्ति हैं और बेटियां कर्ज। इसी मानसिकता के चलते कन्याओं की उपेक्षा हो रही है।
क्या है राष्ट्रीय कन्या दिवस
राष्ट्रीय कन्या दिवस की शुरूआत साल 2009 से की गई। 1966 में इंदिरा गांधी ने देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के तौर पर 24 जनवरी को शपथ ली थी। स्व. इंदिरा गांधी के सम्मान में 24 जनवरी को कन्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इस दिन महिला एवं बाल विकास विभाग अपने स्तर पर समाज में बाल कन्याओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने के लिए विभिन्न क्रियाकलाप करते हैं।
मुहम्मद फैज़ान
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