अखिलेश सरकार जिम्मेदार, मथुरा में एस पी सिटी, थानाध्यक्ष की मौत के लिए: योगी

Jun 04, 2016

गोरखपुर: गोरक्षपीठाधीश्वर एवं शहर सांसद महन्त योगी आदित्यनाथ ने मथुरा हिंसा में एस पी सिटी, थानाध्यक्ष समेत 21 लोगों के मारे जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है की मथुरा की बर्बर हिंसा प्रदेश में व्याप्त अराजकता, गुण्डाराज और जंगलराज का प्रदर्शन है। मथुरा में जो कुछ भी हुआ उप्र सरकार इसके लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार है। जब प्रदेश में पुलिस की वर्दी ही सुरक्षित नहीं तो आमजन की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा मथुरा में जो कुछ हुआ वह प्रदेश सरकार के जंगलराज का नमूना है। अवैध कब्जाधारी तथा उपद्रवी तत्व सीधे सत्ता के संरक्षण में वर्षों से वहॉ रह रहे थे, अवैध असलहों का संग्रह कर रहे थे किसी से छुपा हुआ नही है। शासन द्वारा असामाजिक और अपराधिक तत्वों को प्रश्रय देने तथा प्रशासनिक संवादहीनता का उदाहरण है मथुरा की घटना। जब पुलिस की वर्दी ही प्रदेश में सुरक्षित नही तो आम जनता की सुरक्षा पर स्वंय प्रश्नचिह्न खड़े हो जाते है।

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2012 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अबतक लगभग एक दर्जन पुलिस अधिकारियों तथा पुलिस कर्मी प्रदेश की अराजकता का शिकार हुए है। जब सत्ता सरेआम पेशेवर अपराधियों और माफियाओं को संरक्षण देगी, आतंकवादियो की पैरवी करेगी तो अन्ततः आमजन ही नहीं अपितु वर्दी भी उसकी चपेट में आयेगी।

उन्होंने कहा प्रदेश सरकार ने अपनी राजनीतिक स्वार्थो के लिए न केवल समाज में जातीय विष घोला है बल्कि मुआवजा राशि भी मत और मजहब को देखकर दिया जा रहा है। एक वर्ग विशेष से जुड़े हुए मृतकों के लिए मुआवजा राशि 50-60 लाख होता तो पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की शहादत पर मुआवजा 20 लाख तक सीमित हो जाती है।

सांसद ने कहा अगर प्रदेश सरकार द्वारा मथुरा की घटना में संलिप्त तत्वों को प्रश्रय नही दिया होता तथा प्रशासन ने बेहतर संवाद स्थापित करके ठोस रणनीति बनाकर कार्य किया होता तो इतनी बड़ी घटना को टाला जा सकता था तथा शहीद हुए पुलिस अधिकारी मुकुल द्विवेदी और पुलिस इन्सपेक्टर संतोष यादव समेत अन्य निर्दोष को बचाया जा सकता था। ये घटना प्रदेश सरकार की पूर्ण विफलता को प्रदर्शित करता है।

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उन्होंने कहा प्रदेश में कोई भी दिन ऐसा नही जब हत्या, लूट, अपहरण, बलात्कार की बड़ी-बड़ी वारदातें घटित न हो रही हो। अब प्रदेश के मठ-मन्दिर तथा साधु-सन्त भी सुरक्षित नही। जनपद देवरिया के पेकोली गांव में स्थित पौहारी आश्रम के पुजारी की निर्मम हत्या कर आश्रम में रखी दुर्लभ मुर्तियों की चोरी होना, 48 घंटे के बाद भी पुलिस को कोई सुराग नही मिलना, पुलिस संरक्षण से दुर्दान्त अपराधियों को भाग जाना, प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अराजकता को प्रदर्शित करता है।

इतनी बड़ी-बड़ी बारदातें होने के बावजूद यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश सरकार के मुखिया के चेहरे पर कोई शिकन नही। लगातार शहीद हो रहे अधिकारी और पुलिस कर्मियों के श्रृखंला में मथुरा के एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी तथा थानाध्यक्ष संतोष यादव की शहादत के बाद भी प्रदेश सरकार ने कोई सबक लेगी इसकी संभावना कम है।

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अगर इस सरकार ने इसका सबक लिया होता तो अपराधियों और माफिया सरगनाओं पर शासन-प्रशासन का शिकंजा कसता हुआ दिखाई देता लेकिन प्रदेश की भ्रष्ट, संवेदनहीन सरकार से इनकी अपेक्षा करना ही बेईमानी है। मथुरा की घटना इसी ध्वस्त कानून व्यवस्था की उपज है। इस सरकार के रहते प्रदेश में किसी की भी सुरक्षा की गारंटी नही। राष्ट्रपति शासन ही इसका एकमात्र विकल्प हो सकता है।

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