मप्र में फिर 2 किसानों ने दी जान, संख्या 19 दिन में 34 हुई

Jul 01, 2017
मप्र में फिर 2 किसानों ने दी जान, संख्या 19 दिन में 34 हुई

मध्यप्रदेश में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला थम नहीं रहा है, कर्ज से परेशान दो और किसानों ने फांसी लगाकर जान दे दी। राज्य में किसान आंदोलन के बाद आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 19 दिन में 34 हो गई। उज्जैन जिले के खाचरौद थाने के भेसोला निवासी बाबूलाल (35) ने शुक्रवार की सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि उस पर साहूकार और बैंक का कर्ज था। उसकी सोयाबीन की फसल भी खराब हो गई, जिससे वह तनाव में था। कर्ज के कारण बढ़ते तनाव की बात वह परिवार से अक्सर किया करता था। वहीं, पुलिस का कहना है कि वह मामले की जांच कर रही है।

उधर, बड़वानी जिले के मेणीमाता गांव में कर्ज से परेशान किसान मिनसा आदिवासी (32) ने गुरुवार की रात आने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, मिनसा कर्ज को लेकर परेशान था। उसने सामूहिक खाते पर किसान क्रेडिट कार्ड से दो लाख रुपये का कर्ज लिया था, उसे बैंक का नोटिस भी आया था।

पलसूदा थाने के प्रभारी राजेंद्र हिंगले ने बताया कि मिनसा का परिवार अभी शोक में है, शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों के बयान अभी नहीं लिए गए हैं।

इससे पहले, बुधवार को सीहोर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के बड़नगर गांव के किसान जगदीश चौधरी (45) ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी थी। कोतवाली पुलिस जांच कर रही है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले में 19 दिन में आठ किसान आत्महत्या कर चुके हैं। राज्य में किसान आंदोलन 1 से 10 जून तक चला था। आंदोलन के दौरान 6 जून को पुलिस की कार्रवाई में 6 किसानों की जान गई थी। उसके बाद से अब तक 34 किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

खुद को किसान हितैषी बताने वाली शिवराज सरकार का कहना है, कोई किसान कर्ज के कारण नहीं, बल्कि नशा या पारिवारिक कलह की वजह से आत्महत्या कर रहा है।

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