आजादी के बाद सबसे बड़ा कर सुधार बिल GST रास से पारित

Aug 04, 2016

राज्यसभा में बुधवार को बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर देश में नई परोक्ष कर प्रणाली के लिए मार्ग प्रशस्त कर दिया गया.

इससे पहले सरकार ने कांग्रेस के एक प्रतिशत के अतिरिक्त कर को वापस लेने की मांग को मान लिया तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आश्वासन दिया कि जीएसटी के तहत कर दर को यथासंभव नीचे रखा जाएगा.

जेटली ने बुधवार को संविधान (122वां संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मार्गदर्शक सिद्धान्त होगा कि जीएसटी दर को यथासंभव नीचे रखा जाए. निश्चित तौर पर यह आज की दर से नीचे होगा. वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने शून्य के मुकाबले 203 मतों से विधेयक को पारित कर दिया. साथ ही इस विधेयक पर लाए गए विपक्ष के संशोधनों को खारिज कर दिया गया.

विपक्ष को साधने के लिए ये किये बदलाव
1. राज्यों के बीच कारोबार पर 1 फीसद अतिरिक्त टैक्स नहीं लगेगा. मूल विधेयक में राज्यों के बीच व्यापार पर 3 साल तक 1 फीसद अतिरिक्त टैक्स लगना था.
2. जीएसटी से नुकसान होने पर अब 5 साल तक 100 फीसद मुआवजा मिलेगा. मूल विधेयक में 3 साल तक 100 फीसद, चौथे साल में 75 फीसद और 5वें साल में 50 फीसद मुआवजे का प्रस्ताव था.
3. विवाद सुलझाने के लिए नई व्यवस्था की गई है, जिसमें राज्यों की आवाज बुलंद होगी. पहले विवाद सुलझाने की व्यवस्था मतदान आधारित थी, जिसमें दो-तिहाई वोट राज्यों के और एक तिहाई केंद्र के पास थे.
4. विधेयक में जीएसटी के मूल सिद्धांत को परिभाषित करने वाला एक नया प्रावधान जोड़ा जाएगा, जिसमें राज्यों और आम लोगों को नुकसान नहीं होने का भरोसा दिलाया जाएगा.

यह विधेयक लोकसभा में पहले पारित हो चुका है. किन्तु चूंकि सरकार की ओर से इसमें संशोधन लाए गए हैं, इसलिए अब संशोधित विधेयक को लोकसभा की मंजूरी के लिए फिर भेजा जाएगा. राज्यसभा में विधेयक पर मतदान से पहले सरकार के जवाब से असंतोष जताते हुए अन्नाद्रमुक ने सदन से वाकआउट किया. कांग्रेस ने इस विधेयक को लेकर अपने विरोध को तब त्यागा, जब सरकार ने एक प्रतिशत के विनिर्माण कर को हटा लेने की उसकी मांग को मान लिया. साथ ही इसमें इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्यों को होने वाली राजस्व हानि की पांच साल तक की भरपाई की जाएगी.

इस संशोधित विधेयक के जरिये एकसमान वस्तु एवं सेवा कर पण्राली के लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा. इसके माध्यम से केन्द्रीय उत्पाद कर तथा राज्य वैट-बिक्री कर सहित सभी परोक्ष कर इसी में शामिल हो जाएंगे. वोटिंग से पहले कांग्रेस की तरफ से विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, पी. चिदम्बरम, कपिल सिब्बल, जयराम रमेश ने वित्त मंत्री से यह स्पष्ट आासन चाहा कि जीएसटी से संबंधित अन्य विधेयक जो नवम्बर में लाया जाएगा, वह मनी बिल नहीं होगा और सरकार संसद में पूरी चर्चा के बाद उसे पारित करेगी. कांग्रेस सांसदों ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि पिछला रिकॉर्ड उसका इस मामले में खराब रहा है इसलिए वह ऐसा आासन चाहते हैं.

जीएसटी से क्या है बाहर
जीएसटी से कुछ पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ शराबी और नशे से जुड़े उत्पादों को बाहर रखा गया है. इसके लिए कर की दरें अलग से तय की जाएंगी.

15 विधानसभाओं की लेनी होगी मंजूरी
संविधान संशोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लगने के बाद कम से कम 15 राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी चाहिए होगी. इसके बाद राष्ट्रपति हस्ताक्षर करेंगे, जिससे ये कानून बनेगा. इसके बाद केंद्र सरकार को सेंट्रल जीएसटी और राज्य सरकारों को स्टेट जीएसटी से जुड़े कानून बनाने होंगे. केंद्र सरकार को इंटिग्रेटेड जीएसटी के लिए अलग से कानून बनाना होगा. ये सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जीएसटी के नियम बनाए जाएंगे, जिन पर काम पहले से चल रहा है. केंद्र सरकार की योजना अगले साल पहली अप्रैल से जीएसटी लागू करने की है.

केंद्रीय कर एवं शुल्क जीएसटी में
केंद्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, सेवा कर, अतिरिक्त सीमा शुल्क, विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क
राज्यस्तरीय कर एवं शुल्क
वैट, विक्रय कर, मनोरंजन कर, केंद्रीय विक्रय कर (केंद्र द्वारा आरोपित एवं राज्य द्वारा संग्रहित) ऑक्ट्रॉय, चुंगी कर, क्रय कर, विलासिता की वस्तुओं पर लगने वाले कर और लाटरी पर आरोपित कर सम्मिलित होते हैं.

महंगी होंगी ये चीजें
डिब्बाबंद फूड प्रोडक्ट 12 फीसद तक महंगे हो सकते हैं : चाय-कॉफी और कई डिब्बाबंद फूड प्रोडक्ट्स पर अभी या तो ड्यूटी नहीं लगती या फिर 4 से 6 फीसद तक लगती है. अगर इन पर 18 फीसद जीएसटी लगा तो ये 12 फीसद तक महंगे हो जाएंगे.
कपड़े, रत्न-आभूषण महंगे हो सकते हैं : रत्न-आभूषणों पर अभी 3 फीसद ड्यूटी लगती है, जबकि कपड़ों पर 4-5 फीसद स्टेट वैट लगता है. जीएसटी के तहत इन पर कम से कम 12 फीसद टैक्स लगने के आसार हैं, जिससे इनके दाम बढ़ सकते हैं.
सभी सेवाएं महंगी होंगी : मोबाइल बिल, क्रेडिट कार्ड का बिल और ऐसी तमाम सेवाएं महंगी होने के आसार हैं, क्योंकि इन पर अभी सेस मिलाकर 15 फीसद टैक्स लागू है. जीएसटी लागू होने पर ये टैक्स 18 फीसद तक हो सकता है.
डिस्काउंट वाले प्रोडक्ट महंगे पड़ेंगे : अभी किसी भी सामान पर डिस्काउंट के बाद वाली कीमत पर ही टैक्स लगता है. लेकिन जीएसटी में टैक्स एमआरपी पर लगेगा. इससे डिस्काउंट वाले सामानों के लिए ज्यादा दाम देने पड़ेंगे.

कुछ चीजों के दाम घट सकते हैं
छोटी कारें या मिनी एसयूवी सस्ती हो सकती हैं : इन पर अभी 30 से 44 फीसद तक टैक्स लगता है. जीएसटी के तहत 18 फीसद टैक्स लगने पर मिनी एसयूवी 45 हज़ार रुपए तक सस्ती हो सकती है.
कंज्यूमर ड्यूरेबल सस्ते हो सकते हैं : एसी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव ओवन जैसे सामानों पर अभी 12.5 एक्साइज और 14.5 वैट लगता है. जीएसटी लागू होने पर 18 फीसद टैक्स लगेगा, जिससे इनके दाम घटेंगे.
रेस्तरां का बिल कम होगा : अभी रेस्तरां के बिल पर सर्विस टैक्स के अलावा राज्यों में अलग-अलग वैट लगता है लेकिन जीएसटी के तहत सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा.
उद्योगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा : क्योंकि जीएसटी लागू होन पर उन्हें करीब 18 तरह के टैक्स नहीं भरने पड़ेंगे. टैक्स भरने की प्रक्रिया भी आसान होगी.
सिनेमा के टिकट सस्ते होंगे : विनोद नायर के मुताबिक जीएसटी लागू होने पर एंटरटेनमेंट टैक्स कम होगा. इससे सिनेमा के टिकट सस्ते होने की उम्मीद की जा सकती है. ये सभी आकलन इस अनुमान पर आधारित हैं कि जीएसटी की दर 18 फीसद के आसपास होगी. जानकारों की राय में जीएसटी लागू होने के बाद पहले 3 साल तक महंगाई बढ़ने के आसार रहते हैं, लेकिन उसके बाद इसमें राहत मिलने की उम्मीद की जाती है.

जीएसटी के फायदे
– सभी वस्तु एवं सेवाओं पर होगा एक समान कर
– मजबूत सूचना पण्राली बनाएगी सरकार
– एक प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण, रिटर्न, भुगतान
– एक समान कर से कारोबार करना आसान
– राज्यों की अलग-अलग कर दरों से मिलेगी छुट्टी
– टैक्स के कारण दूसरे राज्यों में नहीं भागेंगे उद्योग
– लेनदेन पर होने वाले अतिरिक्त व्यय में होगी कमी
– केंद्र और राज्य के सभी कर एक में होंगे समाहित
– विनिर्मित वस्तुओं एवं सेवाओं की लागत घटेगी
– विदेशों में उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी
– इससे देश से होने वाले निर्यात में भी होगी वृद्धि
– डिजिटल तकनीक से होगा जीएसटी आकलन
– देशभर में इंस्पेक्टर राज पर लगेगी रोक
– वस्तु एवं सेवाओं पर देश में होगा एक समान कर
– कर चोरी पर लगेगी लगाम, भ्रष्टाचार बंद होगा

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>