नवरात्र के बाद लगने वाले मेले में हो रहा ‘अश्लील डांस’

May 03, 2016

आस्था के नाम पर लगने वाले मेले में हो रहा है फुहड़ डांस। युवा व पुलिसकर्मी जमकर उठाते है लुत्फ और होती है नोटो की बरसात। लेकिन इस पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है। हम बात कर रहे हैं ओल्ड फरीदाबाद बाराही तालाब में हर साल नवरात्र के बाद लगने वाले मेले की। इस बार मेले में आने वालों को फूहड़ डांस का जलवा देखने को मिल रहा है।

मेले में सबसे ज्यादा भीड़ इसी स्टॉल पर रहती है।इस स्टॉल को आयोजकों ने चारों से ढक रखा है। एक पर्दा लगाया गया है जो कुछ सेकेंड के लिए हटाया जाता है। जिससे की मेले में घूमने वाले युवक आकर्षित होकर डांस देखने आएं। मेले में 30 रुपये देकर प्रवेश मिलता है। उसके बाद अंदर पांच मिनट के लिए चार से पांच युवतियां अश्लील हिंदी और भोजपूरी गानों पर फूहड़ डांस करती हैं। पांच स्टेज में डांस किया जाता है।

पहली स्टेज में एक युवती, दूसरी में दो, तीसरी में तीन युवती डांस करती है और अपने लटके झटके दिखाती है। चौथी और पांचवी स्टेज में युवतियां मिलकर आपस में डांस करती है। यह देखकर युवा खुब पैसे उड़ाते है और मस्ती करते है। सेफ सिटी का नारा देने वाली शहर की पुलिस मेले और जनसभाओं में हो रही फुहड़ डांस पर रोक लगाने के बजाए लुत्फ उठा रही है। महिला थाने से महज एक किलोमीटर दूर और एसीपी सराय का कार्यालय बिल्कुल सामने हैं।
इन सबके बावजूद सरेआम मेले में फूहड डांस हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस पर ऐसी हरकतों को रोकने की जिम्मेदारी है वह खुद फूहड़ डांस का लुफ्त उठा रहे हैं। शहर के पश्चिम में बाराही तालाब का नाम से कई सालों से प्रसिद्ध है। सैकड़ों साल पहले अरावली की पहाडिय़ों से जड़ी-बूटी युक्त पानी प्राकृतिक बहाव से तालाब में एकत्रित होता था।
जानकारों का कहना है कि तालाब में नहाने से शारीरिक व्याधियां जैसे फुन्सी,चर्म रोग व अन्य रोगों से छुटकारा मिलता था। इससे लोगों में यह तालाब आस्था का स्थल बन गया। आबादी बढ़ी और पानी सुखने लगा। इसके बाद हर वर्ष चैतमास की पूर्णिमा को यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है।

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