भोपाल जेल से रिहा होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने कहा- मैं कांग्रेस की साजिश का शिकार बनी थी

Apr 27, 2017
भोपाल जेल से रिहा होने के बाद साध्वी प्रज्ञा ने कहा- मैं कांग्रेस की साजिश का शिकार बनी थी

मालेगांव विस्फोट के मामले में मुंबई उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद गुरुवार को भोपाल के केंद्रीय जेल से रिहा होते ही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्हें कांग्रेस की साजिश के कारण नौ साल जेल में गुजारना पड़ा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “कांग्रेस और यूपीए सरकार ने वर्ष 2008 में जो षड्यंत्र रचा था, उससे आज कारागार के बंधन से अर्धमुक्त हुई हूं, क्योंकि अभी प्रकरण मुंबई न्यायालय में चलेगा।”

‘भगवा आतंकवाद’ को लेकर पूछ गए सवाल पर उन्होंने कहा, “भगवा आतंकवाद नाम तो कांग्रेस की देन है, यह शब्द पी. चिदंबरम ने कहा था। जो विधर्मी लोग होते हैं, उनके लिए यह भगवा आतंकवाद ही होगा, क्योंकि वे इससे डरते हैं और डरना भी चाहिए। राक्षसी प्रवृत्तियों के लिए यह बहुत बड़ा हथियार है।”

उन्होंने एक सवाल के जवाब में इशारों-इशारों में मोदी सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह तो निश्चित था कि कांग्रेस का षड्यंत्र था और यह भी निश्चित है कि वर्तमान में कोई ऐसी सरकार है जो षड्यंत्र नहीं करेगी। वर्तमान में ऐसी सरकार है जो न्याय के लिए प्रयास करती है, मेरा तो प्रकरण लंबित था न्यायालय में, न्यायालय ने जो भी किया वह मुझे स्वीकार है।”

उन्होंने न्यायालय के प्रति आभार जताते हुए कहा, “अब मैं अपना इलाज बेहतर तरीके से करा सकूंगी और खुले में सांस ले सकूंगी।”

मुंबई उच्च न्यायालय से 25 अप्रैल को जमानत मिलने के बाद प्रज्ञा को गुरुवार को भोपाल के केंद्रीय कारागार से रिहा कर दिया गया।

स्तन-कैंसर से पीड़ित प्रज्ञा ठाकुर का ढाई वर्ष से भोपाल के पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सा संस्थान में इलाज चल रहा है।

महाराष्ट्र के नाशिक जिले में मुंबई से 290 किलोमीटर दूर मुस्लिम बहुल मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास किए गए बम विस्फोट में 6 लोगों की जान गई थी और 100 लोग घायल हुए थे। जुमे की नामाज के समय किए गए इन विस्फोटों को कांग्रेस ने ‘भगवा आतंकवाद’ नाम दिया था।

आरएसएस से जुड़े हिंदूवादी संगठन ‘अभिनव भारत’ को जिम्मेदार मानते हुए महाराष्ट्र एसआईटी ने मुख्य आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार किया था। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद मई, 2016 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने प्रज्ञा को क्लीनचिट दे दी। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद इस मामले को कमजोर किया गया है।

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