70 साल बाद नक्सलियों के गढ़ में आदिवासियों की सेवा करने पहुंचे डॉक्टर, जहां बिछी हैं बारूदी सुरंगे

Oct 31, 2016
70 साल बाद नक्सलियों के गढ़ में आदिवासियों की सेवा करने पहुंचे डॉक्टर, जहां बिछी हैं बारूदी सुरंगे
नक्सलियों की बारूदी सुरंगों के डर से जहां सरकार विकास के काम कराने से भी डरती रही, छत्तीसगढ़ के उस बीजापुर जिले की सूरत एक युवा डीएम ने बदल दी है। आजादी के 70 साल बाद नक्सलियों के गढ़ में सर्जन सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती करवा दी। जो चिकित्सक तैनात हुए हैं, वे आदिवासियों के इलाज के लिए  हर रोज जान हथेली पर रखकर अस्पताल आते हैं। क्योंकि उन्हें नहीं पता कब पैर कहां पड़ जाए और कोई अनहोनी हो जाए। क्योंकि बीजापुर का जिला मानो नक्सलियों की बारूदी सुरंगों के ढेर पर खड़ा है। यहां हर पांच किलोमीटर पर सीआरपीएफ को इन बारूदी सुरंगों से जान-माल की रक्षा के लिए बम  निरोधक क्लीयरिंग वेहिकल खड़ी करनी पड़ती है। आजादी के बाद छत्तीसगढ़ में जो काम कोई सरकार नहीं कर पाई वह काम कर दिखाया है बीजापुर के डीएम डॉ. अय्याज ताम्बोली ने। चिकित्सा की शिक्षा लेने वाले डॉ. अय्याज अपने काम से आदिवासियों की जिंदगी में आजादी के बाद से छाया अंधेरा अब दूर कर रहे हैं।
बीजापुर में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना मानो रेत में से तेल निकालना
बीजापुर के नक्सलियों के गढ़ बीजापुर के आदिवासी इलाकों के अस्पतालों में आजादी के बाद भी कोई डॉक्टर कभी अस्पताल में तैनात नहीं हुआ। कभी अगर तैनाती हुई भी तो डॉक्टर नक्सलियों के बारूदी सुरंग की डर से ही नौकरी छोड़कर भाग जाते। चिकित्सा सुविधा से आदिवासी किस कदर वंचित थे, आंकड़े देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है। बीजापुर में कुल 67 में से 56 चिकित्सकों के पद खाली रहे।
जब बीजापुर जिले में डॉक्टर अय्याज की नियुक्ति हुई तो उन्होंने अपने मेडिकल ज्ञान का लाभ आदिवासियों को देने की पहल की। चूंकि डॉ. अय्याज खुद एमबीबीएस डिग्रीधारी रहे तो उन्होंने मेडिकल बिरादरी में एक संदेश जारी किया कि क्या कोई उनके जिले बीजापुर में आदिवासियों को आजादी के बाद पहली बार स्वास्थ्य सुविधा देने की पहल कर सकता है। इस पर डॉ. अय्याज को चौंकाने वाला रिजल्ट प्राप्त हुआ। पूरे देश से करीब सौ की संख्या में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों ने उनके पास आवेदन किया। नतीजा रहा कि पहली पर बाल रोग  विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती हो सकी।
अच्छी सेलरी, पॉवर और सुविधाएं देकर डॉक्टरों को लुभाया
डीएम डॉ. अय्याज जानते थे कि नक्सलियों के इलाके में जब तक जान हथेली पर रखकर काम कर रहे चिकित्सकों को अच्छी सेलरी और सुविधाएं नहीं मिलेंगी वह ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। लिहाजा डीएम डॉ. अय्याज ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) का पैसे का सीधे उपभोग करने के लिए चिकित्सकों को अधिकृत कर दिया। चिकित्सकों के पहले से नियत अधिकारों को भी बढ़ा दिया। सेलरी भी सामान्य इलाकों में नियुक्त चिकित्सकों से करीब दोगुनी कर दी। नतीजा रहा कि आज पूरे बीजापुर में आदिवासियों को आजादी के बाद पहली बार स्वास्थ्य सुविधाएं नसीब होने लगीं।
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