मुंबई विस्फोट मामले में अबू सलेम सहित 5 अन्य दोषी करार

Jun 17, 2017
मुंबई विस्फोट मामले में अबू सलेम सहित 5 अन्य दोषी करार

मुंबई विस्फोट के 24 साल बाद विशेष टाडा अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में माफिया डान अबु सलेम व मुस्तफा दोसा सहित छह लोगों को दोषी करार दिया, जबकि एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। मुंबई में हुए श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

देश के एक बेहद खतरनाक आतंकवादी हमले में दोषी पाए गए आरोपियों में पुर्तगाल से 2005 में प्रत्यर्पित कर लाया गया माफिया डॉन अबु सलेम, मुस्तफा दोसा, मोहम्मद ताहिर मर्चेट उर्फ ताहिर टकला, करीमुल्लाह खान, रियाज सिद्दीकी और फिरोज अब्दुल राशिद खान शामिल हैं। मुस्तफा दोसा को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित कर लाया गया है।

एक अन्य प्रमुख आरोपी अब्दुल कयूम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया। फिल्म स्टार संजय दत्त के घर हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने में कयूम ने सलेम का साथ दिया था। कयूम को 13 फरवरी, 2007 को गिरफ्तार किया गया था।

विशेष टाडा (आतंकवादी और विध्वंसक गतिविधि (निवारण) अधिनियम) अदालत के न्यायाधीश जी.ए. सनप ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जून तय की है। इस दिन विशेष अदालत दोषियों के लिए सजा तय करने पर बहस की तारीख तय करेगी।

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सभी सातों को ‘देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ के गंभीर आरोप से बरी कर दिया गया।

दोषी ठहराए गए सभी आरोपी और दोषमुक्त किया गया आरोपी, सभी विशेष न्यायाधीश सनप के समक्ष उस समय मौजूद थे, जब खुली अदालत में फैसला सुनाया गया।

मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक सलेम पर हथियार व गोलाबारूद सहित एके-47 राइफल और हथगोला आपूर्ति का आरोप था, जिसका विस्फोट में इस्तेमाल किया गया था। इसे गुजरात से मुंबई 1993 के प्रारंभ में लाया गया था।

विशेष अदालत ने 2013 में सीबीआई की याचिका पर सलेम के खिलाफ कुछ आरोप हटा दिए थे। इस याचिका में सीबीआई ने उन आरोपों को भारत व पुर्तगाल के बीच हुई प्र्त्यपण संधि के विपरीत बताया था।

आरोपियों को व्यक्तिगत तौर पर या संयुक्त तौर पर प्रमुख आरोपों के लिए दोषी करार दिया गया। इसमें साजिश रचने, आतंकवाद, हथियार व गोला-बारूद की आपूर्ति करने, हत्या, सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं। विस्फोट 13 जगहों पर किए गए थे, जिसमें 257 लोगों की मौत हुई थी।

साल्वे के अनुसार, यह श्रृंखलाबद्ध विस्फोट छह दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस के बदले के तौर पर किया गया था। विध्वंस के बाद मुंबई में दिसंबर 1992 व जनवरी 1993 में दो चरणों में खूनी सांप्रदायिक दंगे हुए थे।

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अभियोजनन पक्ष ने कहा कि दाऊद गिरोह के सदस्यों ने अपने स्थानीय गुंडों टाइगर मेनन, दोसा भाइयों व अन्य के साथ मिलकर मुंबई में आतंकी कृत्य की साजिश रची थी।

दोसा के साथ टाइगर व अन्य माफिया छोटा शकील ने भारत और पाकिस्तान में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए थे, और शिविर में प्रशिक्षण के लिए उन्होंने भारत से गुर्गो को दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा था। दोसा को साजिश रचने का दोषी और विस्फोटक की व्यवस्था करने दोषी ठहराया गया। उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर करीब 3000 किलोग्राम आरडीक्स रायगढ़ में उतारने का इंतजाम किया था।

मर्चेट ने इस साजिश में शामिल अन्य के लिए दुबई के रास्ते पाकिस्तान जाने की व्यवस्था की थी, जबकि कयूम पर सलेम के साथ बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को हथियार की आपूर्ति करने का आरोप था।

कलीमुल्लाह खान को रायगढ़ में शेखाड़ी बंदगरगाह के जरिए देश में विस्फोटकों की तस्करी करने का दोषी करार दिया गया, जबकि सिद्दीकी और फिरोज खान पर लक्षित जगहों पर विस्फोटक पहुंचाने के लिए दोषी करार दिया गया।

इनके तीन नापाक इरादे थे, जिसमें भारत सरकार को आतंकित करना, लोगों के बीच आतंक फैलाना, आम जन के बीच सांप्रदायिक फूट डालकर समाज के एक वर्ग अलग-थलग करना था।

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अपने घृणित कृत्यों को अंजाम देने के लिए साजिशकर्ताओं ने घातक हथियार व गोलाबारूद, डेटोनेटर्स, हथगोले, करीब तीन टन घातक आरडीएक्स (रिसर्च एंड डेवलेपमेंट विस्फोटक या साइक्लोट्राइमेथलीन ट्राईनाइट्रामीन) का इस्तेमाल किया था। इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर किया गया था।

इससे पहले इसी मामले में विशेष टाडा अदालत ने 100 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसमें याकूब अब्दुल रजाक मेनन भी शामिल था, जिसे 30 जुलाई, 2015 को फांसी दी गई।

फिल्म अभिनेता संजय दत्त को आतंकवाद के आरोपों से बरी किया गया, लेकिन उन पर शस्त्र अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया और दोषी करार दिया गया था। संजय दत्त ने अपनी पूरी सजा काटी और उन्हें फरवरी 2016 में जेल से रिहा किया गया।

13 साल तक चली लंबी सुनवाई के अंत में सितंबर 2006 में 12 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसमें से 10 की सजा को सर्वोच्च न्यायालय ने आजीवन उम्रकैद में बदल दिया था। अन्य 20 आरोपियों को उम्र कैद की सजा दी गई थी।

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