एक ऐसा अजीबो-गरीब शहर, जहाँ शादी से पहले लड़कियों का माँ बनना बेहद जरूरी..

Jun 16, 2017
एक ऐसा अजीबो-गरीब शहर, जहाँ शादी से पहले लड़कियों का माँ बनना बेहद जरूरी..

इस दुनिया में ऐसे कई सारे गांव और कस्बे हैं। जहाँ पर ऐसी-ऐसी परंपरा है। जिस पर आज की पीढ़ी को यकीन कर पाना बड़ा मुश्किल है। ऐसे ही पश्चिमी बंगाल में जलपाईगुड़ी के टोटोपडा कस्बे में एक बहुत ही पुरानी परंपरा चली आ रही है। जहाँ पर लड़कियों को पहले मां बनना पड़ता है उसके बाद शादी होती है।

यहाँ के लोगों का अपना एक अलग ही रिवाज है। इस जनजाति के लोग अपने ज़िन्दगी को बचाने में जी-जान से लगे हुए हैं। इनकी संख्‍या देश में बहुत कम है। देश क्या पूरी दुनिया में ये सबसे छोटी जनजातियों में से एक है। इसी लिए ये अपने जनजातियों को बचाने के लिए ऐसे नियम बनाते हैं ताकि उनके लोग भटक न सकें और एक-दूसरे से बंधे रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इनके परंपरा यही चली आ रही है। कि लड़का अपनी पसंद की हुई लड़की को घर से भगाता लाता है। और एक साल तक लड़की, लड़के के घर पर रहती है। इस बीच अगर लड़की माँ बन गई तो उसे शादी के लायक समझा जाता है। और फिर ये दोनों अपने घर वालों की मर्ज़ी के मुताबिक शादी कर लेते हैं। यहाँ की परंपरा के हिसाब से लड़के अपने मामा की बेटी को लेकर भागते हैं। और उन्हीं से शादी करते हैं। लेकिन अगर कोई लड़की मां नहीं बन पाती है। और ये दोनों एक दूसरे से अलग होना चाहते हैं। तो इनको इस संबंध से तभी मुक्ति मिलती है। जब वो सुअर की बलि देते हैं। और नियम के मुताबिक अगर कोई लड़का या लड़की शादी तोडऩा चाहता है तो विशेष महापूजा का आयोजन करना पड़ता है। जिसमें बहुत खर्चा होता है।

यहाँ की महिलाएं खेतों में काम करती हैं। और कुछ तो पत्थर तोड़कर अपने परिवार को चलाती हैं। पश्चिम बंगाल का यह इलाका भारत-भूटान बॉर्डर पर है। यहां भारत से ज्यादा भूटान के नोट चलते हैं। भूटान के शहर-बाजार यहां से ज्यादा करीब हैं। टोटो जनजाति के लोगों अपनी जनसंख्या बढ़ाने के लिए बहुत कड़े कायदे-कानून बना दिए हैं। लेकिन अब इनकी हालत बदलने की जगह बिगड़ने लगी है। इनको थैलिसीमिया नाम की खतरनाक बीमारी ने पकड़ लिया है। और इस खतरनाक बीमारी के बारे में इन लोगों को भी पता नहीं है। इसका खुलासा तब हुआ जब कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र कैंसर रिसर्च सेंटर ने इनके खून के नमूने लिए और उसकी जांच की। तब पता चला कि टोटो जनजाति के 56 फीसदी लोग थैलीसीमिया नाम की खतरनाक बीमारी के शिकार हैं।

बता दें कि थैलीसीमिया खून की बीमारी है। ये बीमारी मां-बाप से बच्चों में पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती है। इस बीमारी से टोटो जनजाति के लोगों की औसत उम्र 35 से 45 साल तक सिमट गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस जनजाति के लोगों ने अपनों में ही शादी के रिवाज बनाए हैं। इसलिए इस बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है। लेकिन अब टोटो जनजाति को बचाने की कोशिशें शुरू हो चुकी है। चंद लोग अपने-अपने स्तर पर टोटो को बचाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं।

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