लंबित पड़े तीन करोड़ से अधिक मामले के लिए 70 हजार जजों की जरूरत: ठाकुर

May 09, 2016

प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि लंबित मामलों की भारी संख्या के निपटारे के लिए देश को 70 हजार से ज्यादा न्यायाधीशों की जरूरत है.

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने रविवार को कहा कि देश की विभिन्न अदालतों में तीन करोड़ से अधिक मामले लंबित पड़े हैं और इन मामलों के निपटारे के लिए कम से कम 70 हजार जजों की जरुरत होगी.

उड़ीसा उच्च न्यायालय के सौ साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1987 में कानून आयोग ने लंबित मामलों के निपटारे के लिए देश में 44 हजार जजों की आवश्यकता का सुझाव दिया था.

30 साल बाद भी हम 18 हजार जजों के साथ ही काम जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से संबंधित 170 प्रस्ताव सरकार के समक्ष लंबित पड़े है और प्रधानमंत्री को इससे अवगत करा दिया गया है.
 

उन्होंने कहा, भारतीय न्यायपालिका में जजों की कमी एक गंभीर समस्या है. न्यायपालिका वर्तमान समय में अपने कठिन दौर से गुजर रही है लेकिन हम लोगों के लिए न्यायपालिका को लेकर लोगों में विश्वास को बनाये रखना बहुत मुश्किल है.

न्यायमूर्ति ठाकुर ने जेलों में लंबे समय से बंद विचाराधीन कैदियों के बारे चिंता प्रकट करते हुए कहा, न्याय पाना एक मौलिक अधिकार है और सरकार लोगों को उनके मौलिक अधिकार से वंचित नहीं रख सकती.

उन्होंने कहा, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कई वर्षों से जेलों में बंद विचाराधीन कैदी जल्द ही रिहा हो और लंबित पड़े मामलों को निपटाना पड़ेगा.

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