व्लादिमीर पुतिन को 3rd वर्ल्ड वॉर का खतरा: स्टाफ से कहा-विदेशों में रह रहे अपने करीबियों को तुरंत देश लाएं

Oct 13, 2016
व्लादिमीर पुतिन को 3rd वर्ल्ड वॉर का खतरा: स्टाफ से कहा-विदेशों में रह रहे अपने करीबियों को तुरंत देश लाएं

रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन को तीसरे विश्व युद्ध का डर है। उसने अपने सभी ऑफिशियल्स को ऑर्डर जारी करके कहा है कि वे विदेशों में रह रहे अपने करीबियों को तुरंत देश वापस ले आएं। रशियन साइट Znak.com की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के बड़े लीडर्स और हाई रैंकिंग ऑफिशियल्स ने बताया है कि ये चेतावनी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने जारी की है। ऑर्डर भी उनके ऑफिस की तरफ से मिला है। पुतिन ने यह कदम अपना फ्रांस दौरा अचानक रद्द करने के बाद उठाया है। पूर्व सोवियत लीडर मिखाइल गोर्बाच्येव ने भी कहा है कि रूस और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से दुनिया एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है।

मास्को की भूमिका की आलोचना होने पर पुतिन ने यह दौरा कैंसल किया है। वह अगले हफ्ते पेरिस जाने वाले थे। फ्रांस्वा ओलांद ने हाल ही में कहा था कि क्रेमलिन सीरिया में युद्ध अपराधों में लिप्त है। खबर यह है की रूस ने पाेलैंड के साथ लगे बॉर्डर के पास न्यूक्लियर कैपेबल मिसाइल्स तैनात कर दी हैं। इस महीने की शुरुआत में पुतिन के मिनिस्टर्स ने ऐलान किया था कि उन्होंने मास्को के 12 लाख लोगों को सुरक्षित करने के लिए न्यूक्लियर बंकर बना लिए हैं।

व्लादिमीर की ऑफिस की तरफ से आर्डर जारी किया गया है एडमिनिस्ट्रेशन स्टाफ, रीजनल एडमिनिस्ट्रेटर्स, लॉ मेकर्स और पब्लिक कॉर्पोरेशंस के इम्प्लाॅइज को यह ऑर्डर जारी किया गया है कि वे विदेशी स्कूलों में पढ़ रहे अपने बच्चों और वहां रह रहे अपने करीबी लोगों को तुरंत देश वापस ले आएं। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो अपने प्रमोशन से हाथ धो बैठेंगे। आदेश जारी होने के पीछे की असली वजह अभी तक साफ नहीं है। रशियन पॉलिटिकल एनालिस्ट स्तानिसलव बेलकोवस्की का कहना है- ‘यह ऑर्डर बड़े युद्ध के लिए देश के एलीट क्लास को तैयार करने के उपायों का हिस्सा है।’
कोल्ड वॉर के वक्त से ही रूस और अमेरिका के बीच रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं। हाल के दिनों में इसमें तब और तनाव आ गया जब वॉशिंगटन ने सीरिया मसले पर बातचीत से अपने हाथ खींच लिए और रूस पर हमलों को हैक करने का आरोप लगा दिया।

आईएस के आतंकी द्वारा पकड़े गए अमेरिकियों के साथ बेहद क्रूरता से पेश आते हैं। सितंबर 2014 में अमेरिकी विमानों ने सीरिया में आईएस आतंकियों को निशाना बनाना शुरू किया। अमेरिका के साथ गठबंधन देशों की सेना में सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन और यूएई शामिल हैं। अमेरिकी कार्रवाई को देख रूस भी एक्टिव हुआ। 30 सितंबर 2015 को सीरिया में हवाई हमले के लिए रूस की पार्लियामेंट में प्रपोजल पास हुआ और उसी दिन शाम को होम्स पर रूस ने पहले हवाई हमले को अंजाम दिया।

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