आईएस के 2 आतंकियों को 7 साल की जेल

Apr 22, 2017
आईएस के 2 आतंकियों को 7 साल की जेल

एक अदालत ने शुक्रवार को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के दो सदस्यों को सात वर्ष की सजा सुनाई है। अदालत ने इन दोनों द्वारा अपना जुर्म कबूल करने की अर्जी को स्वीकार करते हुए यह सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमरनाथ ने शेख अजहर-उल-इस्लाम उर्फ अब्दुल सत्तार शेख और मुहम्मद फरहान उर्फ मुहम्मद रफीक को यह सजा सुनाई।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शेख अजहर, मुहम्मद फरहान और अदनान हसन उर्फ मुहम्मद हुसैन को जनवरी में गिरफ्तार किया था। इन पर अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन के लिए लोगों की पहचान करने, उन्हें प्रोत्साहित करने, कट्टर बनाने, भर्ती करने और प्रशिक्षण देने के आरोप लगे थे।

हालांकि बाद में दो आतंकियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। जबकि हसन अभी न्यायिक हिरासत में है और मुकदमें का सामना कर रहा है।

न्यायाधीश अमरनाथ ने कहा, “ये लोग आतंकी संगठन के सदस्य थे और अपने क्रिया कलापों से संगठन के साथ जुड़े थे। यह उनकी नादानी हो सकती है कि उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो या परिस्थितियों के हिसाब से कम समझ हो।”

न्यायाधीश ने कहा, “उनके अपराध स्वीकर कर लिए जाने के चलते इसे सकारात्मक रूप में लिए जाने की आवश्यकता है।”

न्यायालय ने पाया कि अपराधियों को अपनी गलतियों का एहसास है और अपने इन गलत कार्यो का पश्चाताप करना चाहते हैं।

न्यायाधीश ने कहा, “इस मामले में अपराधियों को अपने आपको सुधारने और इस देश के एक अच्छे नागरिक बनने का एक मौका मिलना चाहिए।”

न्यायालय द्वारा दो आतंकी को जेल की सजा देते हुए कहा गया, “तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मैं इस बात पर पहुंचा हूं कि इन पर दंड देने में थोड़ी उदारता दिखाई देने की आवश्यकता है। लेकिन साथ ही समाज में एक गलत संदेश नहीं जाना चाहिए।” न्यायालय ने प्रत्येक अपराधी पर 12,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने न्यायालय में एक माफीनामा पेश किया था, जिसमें दोषियों द्वारा अपने कार्यो के लिए पछतावा जताया गया था और न्यायालय से अपराधियों को समाज से दोबारा जुड़ने के लिए एक मौका देने का अनुरोध किया गया था।

शेख अजहर के वकील ने अपने मुवक्किल के लिए उसके युवा, अवविवाहित और अपने परिवार के भरण पोषण के लिए एकलौता व्यक्ति होने के चलते कुछ उदारता बरतने की मांग की थी। जबकि मुहम्मद फरहान के वकील ने उसके गरीब परिवार के अलावा पिछली पृष्ठभूमि को देखते हुए सजा में कुछ सहूलियत की मांग की थी।

दोनों अपराधियों ने न्यायालय से उनके कार्यो को देखते हुए एक मौका देने का अनुरोध किया था ताकि वे वापस अपनी सामान्य जिंदगी में वापस जा सकें।

अपनी अपील में दोनों ने अपनी गलती पर पछतावा जताया था।

इन दोनों ने अपनी अर्जी में कहा था, “हम वापस मुख्यधारा की जिंदगी में लौटना चाहते हैं और समाज के लिए लाभकारी होने के साथ अपने आपको फिर से आबाद करना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया था कि उन्होंने बिना किसी दबाव में यह अर्जी दी थी।

शेख अजहर जम्मू एवं कश्मीर जबकि फरहान महाराष्ट्र निवासी हैं। हसन कर्नाटक राज्य से ताल्लुक रखता है।

न्यायालय ने इस बात पर ध्यान दिया था कि अपराधी आतंकी ग्रुप के सदस्य थे। जो आतंकी संगठन आईएस के प्रमुख ग्रुप के तौर पर लोगों को उत्तेजित करने, प्रोत्साहित करने, उनकी पहचान करने और अलग अलग देशों के लोगों को सुविधा देकर उन्हें अपने देशों को छोड़कर सीरिया में अपने कार्यो के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे थे।

न्यायालय ने इसका भी उल्लेख किया कि इन्होंने समान विचारधारा के लोगों के समूह की एक मीटिंग की थी और लोगों को देश की सीमाएं भूल जाने के लिए उकसाने के अलावा सीरिया जाने के लिए प्रोत्साहित किया था।

न्यायालय ने इन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 40(आतंकी संगठन के लिए पैसे जुटाने), धारा 39(आतंकी संगठन को समर्थन देने),धारा 38(आतंकी संगठन की सदस्यता),धारा 20(आंतकी समूह के सदस्य होने), धारा 18(आतंकी कार्य करने) और गैर कानूनी कार्यों (प्रतिबंध) कानून और 120 बी(आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराधी घोषित किया गया।

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