19 पुलिस वाले सस्पेंड, UP पुलिस की खुली पोल, बुलंदशहर गैंगरेप घटना में निर्दोष लोगों को फंसाया

Aug 19, 2016

नेशनल हाईवे एनएच 91 पर मां-बेटी के साथ गैंगरेप मामले की गूंज देश की सांसद तक सुनाई पड़ी थी। जिसके बाद सिपाही से लेकर जिले के एसएसपी समेत 19 पुलिस वाले सस्पेंड हुए। लेकिन, इन सब के बीच एक चीज जो नहीं बदली थी, वह थी यूपी पुलिस की फर्जीवाड़े के सहारे वारदात का खुलासा करने की कार्यशैली।

प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी जावीद अहमद ने इस वारदात के खुलासे की पहली प्रेस कांफ्रेस में दो बदमाशों की शिनाख्त और गिरफ्तारी की पुष्टि की थी। उनके नाम थे बबलू बाबरिया और नरेश ठाकुर, लेकिन बाद में ये दोनों नाम पुलिस की स्क्रिप्ट से गायब हो गए। इन दो नामों की जगह पुलिस ने अपनी स्क्रिप्ट में दो नए नाम शाजेब और जबर सिंह को शामिल कर लिया।

पुलिस की खुल गई पोल

सवाल उठता है आखिर क्यों? जिन बदमाशों को डीजीपी ने असली बताया क्या वो नकली थे? लेकिन गुरुवार को पुलिस के फर्जीवाड़े का खुलासा एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन के बाद हो गया। न्यूज चैनल के स्टिंग में पुलिस के एक मुखबिर ने बताया कि बबलू और नरेश ठाकुर अपनी बहन मंजू के यहां ककोड़ क्षेत्र के गांव निठारी में रहते थे। बबलू अपनी बहन को दवाई दिलाने के लिए 27 जुलाई को डॉक्टर के पास गया था। वहां से ककोड़ थाने की पुलिस ने दोनों को उठा लिया था।

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फर्जी लोगों को फंसा दिया पुलिस ने

बबलू की उम्र 19 साल है जबकि नरेश ठाकुर की उम्र 16 साल है। दरअसल, इन दोनों युवकों को 27 जुलाई को बुलंदशहर की ककोड़ पुलिस ने वैर गांव से गिरफ्तार किया था। यानी ये वारदात के दो दिन पहले ही अरेस्ट किए गए थे। इनके खिलाफ न तो कोई केस दर्ज था और न ही ये किसी मामले के वांछित थे। इस स्टिंग के सामने आने के बाद यही लगता है कि पुलिस अधिकारियों का यह खुलासा सफेद झूठ था। दरअसल इस वारदात में पुलिस ने बबलू बावरिया और नरेश ठाकुर नाम के दो व्यक्तियों को फर्जी फंसाने की कोशिश की। जिनका न तो कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड है और न ही वो पेशेवर अपराधी हैं।

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बावरिया समुदाय पर मड़ना चाहा सारा मामला

बताते चलें इलाके की पुलिस अक्सर बावरिया परिवारों से इसी तरह वसूली करती हैं। ककोड़ थानेदार महेन्द्र सिंह और हलका दारोगा अशोक वशिष्ठ ने भी वसूली के मकसद से इन दोनों को पकड़ा था। लेकिन जब 29 जुलाई को वारदात हो गयी तो पुलिस ने पूरा मामला बाबरिया अपराधियों पर खोलना चाहा। इसके लिए जिले के थानों में तलाश की गयी तो पता चला कि ककोड़ में पहले से ही दो बाबरिया युवकों को बिठाए रखा गया है। पूर्व एसएसपी वैभव कृष्ण ने अपनी वाहवाही के लिए इन युवकों को इस मामले में जबरन घसीट दिया और वारदात के अगले दिन बुलंदशहर आए डीजीपी को पूरी स्क्रिप्ट दे दी।

डीजीपी ने भी छाती ठोंक कर की प्रेसवार्ता

डीजीपी ने भी छाती ठोंककर प्रेसवार्ता में बेकसूर युवकों के नाम लेकर वारदात का खुलासा कर दिया। लेकिन तीन घंटे बाद जब जिले में अधिकारियों के बंपर सस्पेंशन हो गए तो प्रभारी एसएसपी पंकज पांडेय ने रातोंरात इन दोनों के नाम पुलिसिया स्क्रिप्ट से निकलवा कर दूसरे बदमाशों को इसमें सेट कर दिया। लेकिन पोल खुलने के डर से बबलू और नाबालिग नरेश ठाकुर को पुलिस ने 19 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा।

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पुलिस ने धमकी दी

बबलू और नरेश को बुलंदशहर से मेरठ ले जाया गया, जहां जोन की क्राइम ब्रांच की टीम उन्हें जेल भेजने के रास्ते तलाशती रही। बाद में जब पुलिस ने इस वारदात का नोएडा में पूरा खुलासा कर दिया तो बबलू और नरेश 15 अगस्त की शाम को ककोड़ थाने से छोड़ दिए गए। दोनों को पुलिस ने सख्त हिदायत दी है कि न तो वह अपनी बहन के घर आएंगे और न ही इलाके में रहेंगे। इसलिए ये दोनों और उनकी बहन भी अब इस गांव में नहीं हैं।

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