आख़िरकार राज्यसभा में भी जीएसटी बिल पास

Aug 04, 2016

राज्य सभा ने जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर बिल के लिए लाए गए संविधान संशोधन बिल को पास कर दिया है.

बिल के समर्थन में 197 वोट पड़े जबकि बिल का विरोध कर रही तमिलनाडु की पार्टी एआईएडीएमके के 35 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया और सदन का बहिष्कार किया.

प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बिल का समर्थन ज़रूर किया लेकिन इसके लिए उसने सरकार के सामने कई शर्ते भीं रखीं.

संशोधन बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस का पक्ष रखते हुए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार से यह भरोसा मांगा कि संविधान संशोधन बिल पास होने के बाद सरकार मूल जीएसटी बिल को पिछले दरवाज़े से पास नहीं कराएगी.

चिदंबरम ने राज्यसभा में कहा, ”हमें वित्तमंत्री से यह भरोसा चाहिए कि संविधान संशोधन बिल पास होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से जीएसटी बिल मनी बिल के रूप में पास नहीं कराया जाएगा.”

चिदंबरम ने कहा कि इस बिल पर दोनों सदनों की मुहर लगना ज़रूरी है, इसलिए इसे मनी बिल के रूप में नहीं लाया जाना चाहिए.

नियमों के अनुसार संविधान संशोधन बिल पास होने के बाद सरकार को असल जीएसटी बिल पेश करना होगा. लेकिन अगर सरकार उस बिल को मनी बिल के रूप में लाने का फ़ैसला करती है, तो फिर बिल को राज्यसभा से पास कराने की बाध्यता नहीं होगी.

मोदी सरकार के पास लोकसभा में बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में एनडीए अल्पमत में है और उसे वहां दिक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है.

इसलिए विपक्ष चाहता है कि सरकार संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के बाद मूल बिल को मनी बिल के रूप में न लाए.

चिदंबरम ने कहा कि टैक्स दर 18% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि अप्रत्‍यक्ष कर अमीर और ग़रीब, दोनों को प्रभावित करते हैं.

उन्होेंने कहा कि कांग्रेस ने बिल का विरोध किया था, इस विचार का नहीं. चिदंबरम के अनुसार अब भी बिल में कई तरह की ख़ामियां हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी ने बहस के दौराना कहा, ”क्या हम चाहते हैं कि केंद्र के पास राज्य सरकारें भीख का कटोरा लेकर जाएं. देश का संघीय ढांचा ख़त्म नहीं होना चाहिए.”

वहीं जेडीयू के शरद यादव ने सवाल उठाया कि क्या जीएसटी आने के बाद भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी.

समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहते हुए भी जीएसटी बिल का समर्थन कर रही है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि लोग उन्हें भारत के आर्थिक विकास की राह का रोड़ा समझें.

इससे पहले राज्य सभा में बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ”जीएसटी भारतीय इतिहास में पेश हुए सबसे महत्वपूर्ण कर सुधार में से एक है. जीएसटी बिल से भारत ‘एक आर्थिक बाज़ार’ बन जाएगा.”

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