कंधमाल हिंसा के पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवज़ा

Aug 02, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के कंधमाल जिले में ईसाईयों के ख़िलाफ़ वर्ष 2008 में हुई हिंसा के पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है.

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जो मुआवज़ा पीड़ितों को दिया गया है वो संतोषजनक नहीं है.

वर्ष 2008 में 23 अगस्त को विश्व हिन्दू परिषद् के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और उनके चार साथियों की ह्त्या के बाद कंधमाल और उसके आसपास के इलाक़ों में हिंसा भड़क गयी थी जिसमें 38 लोग मारे गए थे.

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की ह्त्या चाकापाड़ा स्थित उनके आश्रम में हुई थी.

वर्ष 2008 से ही सुप्रीम कोर्ट कंधमाल में हुई हिंसा के पीड़ितों के मुआवज़े और पुनर्वास की देखरेख कर रहा था.

मगर ओडिशा के आर्चबिशप रफ़ाएल चीनाथ ने सर्वोच्च अदालत में अर्ज़ी दायर कर कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिया गया मुआवज़ा नाकाफ़ी है.

ईसाई समुदाय का कहना है कि कंधमाल में हुई हिंसा में चर्चों पर हमले हुए और इलाक़े से 25 हज़ार से ज़्यादा ईसाईयों का पलायन हुआ था.

बीबीसी से बात करते हुए कंधमाल के ईसाई समुदाय के बीच काम करने वाले कार्यकर्ता फादर अजय कुमार सिंह का कहना था कि 2008 की हिंसा में 6000 से ज़्यादा ईसाई प्रभावित हुए थे जबकि मुआवज़ा सिर्फ़ 4000 पीड़ितों को ही मिल पाया.

उनका कहना था कि जिनके मकान पूरी तरह नष्ट हो गए थे उन्हें सिर्फ 50 हज़ार रूपए देने का प्रावधान किया गया जबकि पूरी तरह से नष्ट सिर्फ उन मकानों को माना गया जिसकी नींव ही नष्ट कर दी गयी जो.

वो कहते हैं : “लगभग सभी नष्ट हुई संपत्तियों को आंशिक मानते हुए सिर्फ 5000 रूपए बतौर मुआवज़ा दिया गया. इसके खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट गए. अब नुक़सान का पुनरावलोकन किया जाएगा.”

(बीबीसी हिन्दी के के लिए करें. आप हमें और पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>